महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के गोंडपिपरी तहसील के हेटी नांदगांव, चेक नांदगांव और टोले नांदगांव में वर्षों से चली आ रही पेयजल संकट की समस्या आखिरकार दूर हो गई है. आजतक और इंडिया टुडे पर इन गांवों की बदहाल स्थिति दिखाए जाने के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने तुरंत संज्ञान लिया और अब तीनों गांवों में बोरवेल के जरिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कर दी गई है. वर्षों से बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों के चेहरों पर अब राहत और खुशी साफ दिखाई दे रही है.
दरअसल, कुछ दिन पहले आजतक ने इन गांवों की दर्दनाक तस्वीर देश के सामने रखी थी. रिपोर्ट में दिखाया गया था कि महिलाएं गांव से करीब एक किलोमीटर दूर सूखे बरसाती नाले में गड्ढा खोदकर रिस-रिस कर आने वाला पानी घड़ों में भरने को मजबूर थीं. गांवों में जल जीवन मिशन के तहत नल तो लगाए गए थे, लेकिन उनमें पानी नहीं आता था. कभी-कभार पानी आता भी था तो वह इतना गंदा होता था कि पीने योग्य नहीं रहता.
गांव के कुओं का पानी भी खारा और दूषित होने के कारण उपयोग लायक नहीं था. दशकों से ग्रामीण इस गंभीर समस्या से जूझ रहे थे और कई बार प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला था.
अब राजूरा विधानसभा के भाजपा विधायक देवराव भोंगले ने मामले का संज्ञान लिया. उन्होंने लॉयड मेटल्स के CSR फंड से तीनों गांवों में बोरवेल खुदवाने का निर्णय लिया. करीब 600 फीट गहरी खुदाई के बाद पानी मिला. बोरवेल में मोटर लगाकर पानी टंकियों तक पहुंचाया गया और वहां से पाइपलाइन के जरिए गांवों के नलों तक स्वच्छ पानी पहुंचने लगा. चेक नांदगांव और टोले नांदगांव में काम लगभग पूरा हो चुका है, जबकि हेटी नांदगांव में अंतिम चरण का कार्य जारी है.
विधायक देवराव भोंगले ने बताया कि यह समस्या पिछले 50 वर्षों से अधिक पुरानी थी. उन्होंने कहा कि आजतक की खबर के माध्यम से यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया, जिसके बाद CSR फंड से स्थायी समाधान की दिशा में काम किया गया. उन्होंने यह भी घोषणा की कि जल्द ही इन गांवों में RO प्लांट भी लगाए जाएंगे ताकि ग्रामीणों को पूरी तरह शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके.
अब ग्रामीणों को तपती धूप में लंबी दूरी तय कर नाले से पानी लाने की मजबूरी नहीं रही. गांवों में लगे नए नलों से पानी निकलते देख लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं है. ग्रामीणों ने आजतक, इंडिया टुडे और विधायक देवराव भोंगळे का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया की पहल के कारण उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान संभव हो सका.
करीब 1,500 की आबादी वाले इन तीन गांवों के लिए यह बदलाव किसी नई जिंदगी से कम नहीं है. जो लोग कभी एक-एक बूंद पानी के लिए संघर्ष करते थे, आज उनके घरों तक स्वच्छ पानी पहुंच रहा है. यह उदाहरण बताता है कि जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने वाली पत्रकारिता किस तरह लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है.