1993 के मुंबई दंगों के दौरान हुए चर्चित सुलेमान बेकरी पुलिस फायरिंग मामले में एक महत्वपूर्ण गवाह ने अदालत में चौंकाने वाले दावे किए हैं. गवाह ने कहा कि पुलिसकर्मी मदरसे के कमरे में घुस आए थे और वहां मौजूद छात्रों तथा शिक्षक की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी थी.
अब 50 वर्ष के हो चुके गवाह ने अदालत को बताया कि घटना के समय वह मदरसे में पढ़ाई कर रहा था. उसके अनुसार, पुलिस ने उसके सिर के पीछे राइफल के कुंदे से हमला किया, जिससे वह बेहोश हो गया. उसने दावा किया कि इस चोट के कारण वह कई महीनों तक कोमा या अचेत अवस्था में रहा.
मदरसे में करीब 200 से 225 छात्र थे
गवाह ने बताया कि घटना के समय तीन मंजिला मदरसे में करीब 200 से 225 छात्र मौजूद थे, जिनकी उम्र 8 से 22 वर्ष के बीच थी. उस दौरान शहर में सांप्रदायिक तनाव का माहौल था, इसलिए छात्रों की सुरक्षा के लिए दोपहर के भोजन के बाद मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर दिया गया था.
राइफल के कुंदों, लाठियों और लातों से पीटा गया?
उसने अदालत को बताया कि दोपहर के बाद दरवाजा तोड़े जाने की आवाज सुनाई दी और इसके तुरंत बाद पुलिसकर्मी फायरिंग करते हुए अंदर पहुंचे. गवाह के मुताबिक, पुलिस ने कमरे में मौजूद छात्रों और उनके शिक्षक पर हमला कर दिया. उसने आरोप लगाया कि छात्रों को राइफल के कुंदों, लाठियों और लातों से पीटा गया. गवाह ने कहा कि उनके शिक्षक भी पुलिस की मारपीट का शिकार हुए. उन्होंने बताया कि शिक्षक चलने-फिरने में असमर्थ थे और वहां से भाग नहीं सके.
गौरतलब है कि 1993 के मुंबई दंगों के दौरान दक्षिण मुंबई स्थित सुलेमान बेकरी में कथित पुलिस फायरिंग में नौ लोगों की मौत हुई थी. इस मामले में कम से कम छह पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध गोलीबारी करने का आरोप है. हालांकि पुलिस पक्ष का कहना है कि उन्होंने केवल जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई थी, क्योंकि बेकरी के अंदर से पुलिस टीम पर फायरिंग की गई थी.
इस मामले में वर्ष 2001 में एफआईआर दर्ज की गई थी, जब न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण आयोग के समक्ष कई गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए थे. फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और अदालत में गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं.