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मोदी का कानून नहीं मानेंगे शिवराज? SC/ST एक्ट पर बयान के मायने क्या

एससी एसटी एक्ट को लेकर सवर्णों की नाराजगी से बीजेपी बेचैन है. यही वजह है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कहना पड़ा कि बिना पुलिस जांच के किसी की गिरफ्तारी नहीं होने देंगे.

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

मोदी सरकार द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST) संशोधन अधिनियम पर फैसला अब बीजेपी की गले की फांस बनता जा रहा है. सवर्णों की पार्टी का तमगा रखने वाली बीजेपी को उसी का मूल वोटबैंक आंखें दिखा रहा है. तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले सवर्णों की नाराजगी से बीजेपी बेचैन है. यही वजह है कि मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज ने सवर्णों को पटाने की पहल शुरू कर दी है.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि SC/ST उत्पीड़न निरोधक कानून में गिरफ्तारी तब तक नहीं होगी, जब तक कि पुलिस मामले की जांच न कर ले.

चौहान से जब सवाल किया गया कि क्या राज्य सरकार केंद्र सरकार के अध्यादेश के एवज में कोई अध्यादेश लाएगी, तो उन्होंने कहा, 'मुझे जो कहना था वो मैंने कह दिया.' अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सवर्ण, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति सभी वर्गों के हितों को सुरक्षित रखा जाएगा, जो भी शिकायत आएगी, उसकी जांच के बाद ही किसी की गिरफ्तारी होगी.

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दरअसल SC/ST एक्ट की इसी प्रक्रिया को लेकर मध्य प्रदेश में पिछले दिनों सवर्ण समुदाय के लोगों ने सड़क पर उतर प्रदर्शन किया था.

SC/ST एक्ट के खिलाफ सवर्ण समाज, करणी सेना, और सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था (सपाक्स)  सहित सवर्ण समुदाय के 35 संगठन 'भारत बंद' का ऐलान कर सड़क पर उतरे थे.  इस दौरान कई जगह आगजनी और तोड़फोड़ के मामले भी सामने आए थे.

सवर्णों की नाराजगी शिवराज को खुद भी झेलनी पड़ी है. पिछले दिनों शिवराज की जनआशीर्वाद यात्रा चुरहट विधानसभा क्षेत्र में पहुंची तो कुछ सवर्ण समुदाय के लोगों ने उनके रथ पर पत्थरबाजी कर दी थी. इतना ही नहीं एक जनसभा को संबोधित करते समय में उनपर चप्पल भी फेंकने की घटना सामने आई थी.

सवर्णों के लगातार विरोध से शिवराज को अपनी सत्ता जाती दिखने लगी. इसी का नतीजा है कि उन्हें SC/ST एक्ट को लेकर बयान देना पड़ा कि बिना पुलिस जांच के किसी की गिरफ्तारी नहीं होने देंगे. जबकि SC/ST एक्ट में शिकायत के बाद आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी करना पड़ता है.

हालांकि शिवराज ने इसके लिए कोई शासनादेश जारी नहीं किया है गया है. यही वजह है कि इसे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सवर्णों की नाराजगी को दूर कर उन्हें पटाने के मकसद से देखा जा रहा है.

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हालांकि शिवराज सिंह के बयान का बीजेपी में ही विरोध होने लगा है. पार्टी के दलित सांसद उदित राज ने कहा कि इस मामले में मैं तकलीफ महसूस कर रहा हूं कि ऐसा बयान क्यों दिया है. हमारी सरकार कानून मजबूत करती है और हमारे चीफ मिनिस्टर डाइल्यूट करते हैं. इससे बड़ी बेचैनी महसूस कर रहा हूं. फोन भी आ रहे हैं. समाज के अंदर फिर से निराशा है. आक्रोश पैदा हो गया है, इसलिए इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.

उदित राज ने कहा, यह जो हमारा समाज है, इसमें  एकता होनी चाहिए. जो अंतर्विरोध है खत्म होने चाहिए. फासला खत्म होना चाहिए. इससे जातिवाद बढ़ेगा. मैं बात पार्टी में भी रखूंगा. चौहान साहब से बातचीत करूंगा. मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी बात करूंगा. एससी-एसटी के मामले में ही क्यों ऐसा दोहरा चरित्र, दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है. शिवराज सिंह चौहान को कहूंगा कि वह इस मामले को वापस लें, इस बयान को वापस लें.

देश में सवर्ण समुदाय की आबादी करीब 15 फीसदी है. ये बीजेपी का मूल वोटबैंक माना जाता है. इसीलिए बीजेपी को सवर्णों की पार्टी कहा जाता है. ब्राह्मण-राजपूत-कायस्थ, भूमिहार और वैश्य की पार्टी कही जाने वाली बीजेपी धीरे-धीरे समाज के हर तबके की बीच अपना दायरा बढ़ाना चाहती है.

इसी लिहाज से मोदी सरकार ने SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को पलट दिया था. लेकिन सरकार के फैसले उसके सामने नई मुसीबत खड़ी कर दी है. इसी का नतीजा है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले दिनों दिल्ली में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी नेताओं और मुख्यमंत्रियों को सवर्ण समुदाय की नाराजगी को दूर करने और उन्हे्ं समझाने की जिम्मेदारी सौंपी थी.

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