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बेडरूम बना ICU, कार एम्बुलेंस, भावुक कर देगा बुजुर्ग इंजीनियर का बीमार पत्नी के लिए ये समर्पण

मध्य प्रदेश के जबलपुर में बीमार पत्नी के लिए रिटायर्ड इंजीनियर ने अपने घर का पूरा नक्शा ही बदल दिया. उसने अपने घर को आईसीयू बना दिया, तो वहीं अपनी कार को एंबुलेंस. पेशे से इंजीनियर हैं, लेकिन वे एक नर्स से भी ​अधिक अच्छी तरह अपनी पत्नी का ख्याल रखते हैं.

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बीमार पत्नी के लिए रिटायर्ड इंजीनियर ने अपने घर का पूरा नक्शा (फोटो आजतक)
बीमार पत्नी के लिए रिटायर्ड इंजीनियर ने अपने घर का पूरा नक्शा (फोटो आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इंजीनियर पति ने कार को बना दिया एंबुलेंस
  • घर में किया वेंटिलेटर, ऑक्सीजन का इंतजाम

मध्य प्रदेश के जबलपुर में बीमार पत्नी के लिए रिटायर्ड इंजीनियर ने अपने घर का पूरा नक्शा ही बदल दिया. उसने अपने घर को आईसीयू बना दिया, तो वहीं अपनी कार को एंबुलेंस. पेशे से इंजीनियर हैं, लेकिन वे एक नर्स से भी ​अधिक अच्छी तरह अपनी पत्नी का ख्याल रखते हैं. उनकी दवाइयों से लेकर इंजेक्शन लगाने का काम भी खुद ही करते हैं. 

जबलपुर के रहने वाले 74 वर्षीय ज्ञानप्रकाश ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से रिटायर्ड इंजीनियर हैं. उनके बेटा और बेटी विदेश में हैं. यहां पर वे अपनी पत्नी कुमुदनी के साथ रहते हैं. उनकी पत्नी कुमुदनी को सीओटू नार्कोसि​स नाम की बीमारी है. इस बीमारी में उन्हें जिंदा रहने के लिए लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत होती है. अस्पतालों के लगातार चक्कर लगाने के बाद ज्ञानप्रकाश ने अपनी पत्नी को अस्पताल से बेहतर और सुरक्षित माहौल देना चाहा. इसी कवायद में रिटायर्ड इंजीनियर ने अपने घर को अस्पताल और अपनी कार को ऑक्सीजन फिटेट एंबुलेंस में बदल दिया.

बीमार पत्नी के लिए घर को बना दिया अस्पताल 

उनके घर में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन, एयर प्यूरीफायर के अलावा ऐसी कई सुविधाएं हैं, जो आम अस्पतालों में नहीं मिल सकती हैं. रिटायर्ड इंजीनियर ज्ञानप्रकाश ने अपनी पत्नी के लिए कई मेडिकल डिवाइस भी बनाई हैं, जिसमें मोबाइल स्टेथोस्कोप भी अनोखा है. मोबाइल स्टेथोस्कोप की सहायता से वो अपनी पत्नी की हार्टबीट मोबाइल में कैद कर लेते हैं और उसकी साउंड फाइल व्हाट्सएप के जरिए डॉक्टर को भेज देते हैं, ताकि डॉक्टर बिना घर आए भी कुमुदनी को दवाएं प्रिस्क्राइब कर सके.

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ज्ञानप्रकाश ने अपने घर में ऑक्सीजन सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक भी रखा है, जिसे वो खुद जरूरत पड़ने पर बदलते रहते हैं. न अस्पताल के मंहगे इलाज की फिक्र, ना इलाज में लापरवाही का डर और ना हीं इंफेक्शन का खतरा. अपने घर के आईसीयू में कुमुदनी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे उनकी सेहत में सुधार भी नजर आने लगा है.


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