भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड सरकार पर ट्रेजरी घोटाले की जांच में लीपापोती करने का गंभीर आरोप लगाया है. शाहदेव ने रांची में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि पिछले 20 दिनों से सरकार समिति, सीआईडी और एसआईटी के फेर में मामले को लटका रही है. उन्होंने वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर से सीधा सवाल किया कि खजाने से जो 10 हजार करोड़ रुपये गायब हैं, क्या उनका सीधा संबंध इसी ट्रेजरी घोटाले से है.
बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार केवल समितियों का गठन कर असली दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है. उनके मुताबिक, बोकारो में एसपी के नाम पर फर्जी तरीके से 16 करोड़ रुपये निकालने जैसी गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं, लेकिन सरकार ने पहले बनी जांच कमेटी की रिपोर्ट को दबाने की कोशिश की और बाद में मामले को उलझाने के लिए दूसरी कमेटियां बना दीं.
प्रतुल शाहदेव ने सीआईडी द्वारा आईजी (मानवाधिकार) के नेतृत्व में एसआईटी बनाए जाने पर भी संदेह जताया है. उन्होंने सवाल उठाया कि सीआईडी ने खुद इस मामले की जांच क्यों नहीं की और इसे झारखंड पुलिस के अधिकारी के अधीन क्यों सौंपा गया.
शाहदेव का कहना है कि पुलिस के आईजी के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स में सीआईडी के कनिष्ठ अधिकारी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाएंगे. इसके अलावा, एसआईटी के लिए जांच की कोई समय सीमा निर्धारित न करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है. बीजेपी ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है और अब तक केवल छोटे कर्मचारियों पर ही कार्रवाई हुई है.
सीबीआई और ईडी जांच की मांग
बीजेपी ने कहा है कि इस घोटाले की जड़ें बहुत गहरी हैं और राज्य की जांच एजेंसियां बड़े चेहरों पर हाथ डालने से बच रही हैं. प्रतुल शाहदेव ने मांग की है कि इस पूरे ट्रेजरी घोटाले की जांच तत्काल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब तक बड़ी मछलियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी. प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाइक भी मौजूद थे, जहां बीजेपी ने सरकार को चेतावनी दी है कि वे इस घोटाले पर पर्दा नहीं डालने देंगे.