जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उप राज्यपाल की ओर से पांच सदस्य नामित करने वाले प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार की पीठ ने याचिकाकर्ता और कांग्रेस नेता रविंद्र शर्मा से पहले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है.
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में पेश हुए सीनियर अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस तरह के कदम से चुनावी और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा. इस पर पीठ ने कहा कि हम अभी इस पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं, लेकिन हम आपको अपनी बात हाईकोर्ट के समक्ष ले जाने की छूट देते हैं.
HC के बाद फिर आ सकते हैं SC
कोर्ट के इस रुख का मतलब साफ है कि जम्मू -कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में संतोषजनक फैसला नहीं आने पर याचिकाकर्ता उस आदेश को चुनौती देने के लिए फिर से सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं.
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल को अधिकार देते हुए विधानसभा में पांच नामजद सदस्य नियुक्त करने का प्रावधान रखा है, जिसका विरोध शुरू से ही गैर एनडीए दल के नेता कर रहे हैं. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के सुनवाई से इनकार के बाद अब याचिकाकर्ता हाईकोर्ट जाएंगे.
विधानसभा में सीटों की संख्या 90 से 95 हो जाएगी
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के पास वहां की विधानसभा में पांच सदस्यों को नियुक्त करने का अधिकार है. अगर पांच विधायकों को नामित किया जाता है, तो जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सदस्यों की संख्या 95 हो जाएगी. जिसके बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बहुमत की संख्या 45 से बढ़कर 48 हो जाएगी.
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस को सबसे ज्यादा 42 सीटें मिली हैं, जो कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने जा रही है. तो वहीं, भाजपा ने 29 सीटें जीतीं हैं.