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कंटेम्प्ट के मामूली केस में चला गया PM पद, चुनाव लड़ने पर रोक, PAK में 'PoK के पीएम' की बस इतनी हैसियत!

सजा के बाद पीओके के कथित 'प्रधानमंत्री' सरदार तनवीर इलियास ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दो बार माफी मांगी, लेकिन अदालत ने कोई राहत नहीं दी. पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर के लिए बड़े बड़े बयान देने वाले इमरान की पार्टी ने भी इस कथित पीएम की बर्खास्तगी पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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सरदार तनवीर इलियास की सदस्यता रद्द कर दी गई है. (फोटो- ट्विटर)
सरदार तनवीर इलियास की सदस्यता रद्द कर दी गई है. (फोटो- ट्विटर)

पाकिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) का हमदर्द होने का बड़ा बड़ा दावा करता है. लेकिन पाकिस्तान की संवैधानिक व्यवस्था में पीओके के जन प्रतिनिधियों की मामूली हैसियत भी नहीं है. पाकिस्तान में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम में पीओके के कथित 'प्रधानमंत्री' सरदार तनवीर इलियास को   पीएम पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है. सरदार तनवीर इलियास को अदालत की अवमानना का दोषी पाया गया है. सरदार तनवीर इलियास का एक बयान पाकिस्तान की न्यायपालिका को इतना नागवार गुजरा कि उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई.

सरदार तनवीर इलियास पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के नेता हैं.  ये फैसला इस्लामाबाद हाईकोर्ट से आया है.  

इस फैसले के बाद सरदार तनवीर इलियास प्रधानमंत्री नहीं रह गए हैं. इसके अलावा वे अब पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य भी नहीं रहेंगे.  हालांकि इस अपील के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार उन्हें हैं.  

बता दें कि कुछ दिन पहले सरदार तनवीर इलियास ने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम में न्यायपालिका पर आरोप लगाते हुए कहा था कि न्यायपालिका उनकी सरकार के कामकाज को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है और स्थगन आदेशों के माध्यम से कार्यपालिका के क्षेत्र में न्यायपालिका की ओर से हस्तक्षेप किया जा रहा है. 

इसके बाद सरदार तनवीर इलियास को अपने पब्लिक भाषण में सुप्रीम कोर्ट के लिए आपत्तिजनक शब्द प्रयोग करने का आरोप लगा था और उन्हें नोटिस भेजा गया था.  

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बिना शर्त माफी मांगता हूं

मंगलवार को इलियास कोर्ट के समक्ष हाजिर हुए. सुनवाई के दौरान इलियास के भाषणों की तीन क्लिप कोर्ट में सुनाई गई. अपने बचाव में इलियास ने अदालत में ही माफी मांगी लेकिन कोर्ट ने उनकी एक न सुनी. उन्होंने कहा, " अगर मेरे किसी शब्द से जजों को ठेस पहुंची हो तो मैं बिना शर्त माफी मांगता हूं. मैं खुद को अदालत की दया पर छोड़ता हूं." 

चौधरी खालिद रशीद ने मंगलवार को फुल बेंच का फैसला पढ़ा, जिसमें अवमानना के मामले में उन्हें सजा सुनाई गई, जो किसी को दी गई सबसे छोटी सजा है. 

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "इलियास ने उच्च न्यायपालिका को सीधे तौर पर धमकी दी है और एक जनसभा में उनके भाषण की भाषा बेहद अपमानजनक, अनुचित और अशोभनीय है." 

सरदार तनवीर इलियास की माफी को कोर्ट ने साफ साफ खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इलियास ने माना है कि उन्होंने ऐसा बयान दिया है. कोर्ट ने आदेश में कहा गया है कि चूंकि इलियास को "अदालत द्वारा दंडित" किया गया था, इसलिए वह विधान सभा के सदस्य होने और दो साल के लिए किसी भी सार्वजनिक पद पर रहने से अयोग्य हो गए हैं.

अदालत के फैसलों का सम्मान करना महत्वपूर्ण

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यूं तो पीटीआई नेता पाक अधिकृत कश्मीर की रट लगाये रहते हैं, लेकिन इस फैसले पर पीटीआई ने अपने नेता के पक्ष में कोई दमदार प्रतिक्रिया नहीं दी. 

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीटीआई नेता फवाद चौधरी ने कहा कि अदालत के फैसलों का सम्मान करना महत्वपूर्ण है क्योंकि न्याय व्यवस्था को नष्ट करके देश नहीं चल सकता है. 

चौधरी ने इलियास से माफी मांगने का आग्रह किया और उम्मीद जताई कि टॉप कोर्ट से उन्हें राहत मिलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अदालत के फैसले से सबक सीखना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट से भी माफी मांगी, राहत नहीं मिली

इस सजा के बाद  इलियास सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, यहां भी उन्होंने अपने बयान के लिए माफी मांगी. लेकिन पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई नहीं की और 2 हफ्ते के लिए मामले को टाल दिया.  

सरदार तनवीर इलियास PoK के पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के मौजूदा अध्यक्ष हैं. पिछले साल अप्रैल में उन्हें पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर का कथित 'प्रधानमंत्री' चुना गया था. 
 

 

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