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दर्शन के पहले हफ्ते में ही 90 फीसदी पिघल गए बाबा बर्फानी... ग्लोबल वॉर्मिंग या इंसानी दखल?

अमरनाथ यात्रा शुरू होने के पांच दिन के अंदर बर्फ का शिवलिंग करीब 90 प्रतिशत पिघल गया है. इस साल रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं, लेकिन शिवलिंग के जल्दी पिघलने से पर्यावरण को लेकर सवाल उठे हैं. पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती और कांग्रेस ने प्रशासन से जांच की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना 10,000 श्रद्धालुओं की सीमा तय की है, फिर भी बिना पंजीकरण के लोग पहुंच रहे हैं.

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रिकॉर्ड श्रद्धालुओं के बीच अमरनाथ का बर्फ शिवलिंग तेजी से पिघल रहा है (File Photo: ITG)
रिकॉर्ड श्रद्धालुओं के बीच अमरनाथ का बर्फ शिवलिंग तेजी से पिघल रहा है (File Photo: ITG)

जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा की शुरुआत के सिर्फ पांच दिन के अंदर ही पवित्र गुफा में बना बर्फ का शिवलिंग, जिसे बाबा बर्फानी कहा जाता है, करीब 90 प्रतिशत तक पिघल चुका है. कुछ रिपोर्टों में तो यह भी कहा जा रहा है कि यह बर्फानी शिवलिंग लगभग गायब हो गया है. 

इस साल यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, लेकिन इसी बीच शिवलिंग के तेजी से पिघलने ने पर्यावरण को लेकर नई बहस छेड़ दी है. पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने इस पर चिंता जताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है.

अमरनाथ गुफा जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में करीब 3,888 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की लिद्दर घाटी में स्थित है. यहां श्रद्धालु 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग या 14 किलोमीटर के छोटे लेकिन खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग से पहुंचते हैं. यह बर्फ का शिवलिंग हर साल मौसम और गुफा के तापमान के हिसाब से बनता और घटता रहता है.

इस साल यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई और पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच चल रही है, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी. बावजूद इसके शुरुआती चार दिनों में ही 93,000 से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं. 

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5 जुलाई तक 32,000 से अधिक लोग पूजा कर चुके थे, जबकि दूसरे दिन ही 20,000 से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे, जो बीते कई सालों में दूसरे दिन की सबसे ज्यादा संख्या रही. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इसे पिछले चार वर्षों की तुलना में बड़ी बढ़ोतरी बताया.

हालांकि प्रशासन ने बिना पंजीकरण और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के पहुंच रहे हजारों श्रद्धालुओं पर भी चिंता जताई है. सिन्हा ने लोगों से अपील की कि वे बिना पंजीकरण के धैर्य रखें, ताकि यात्रा सुचारू रूप से चल सके. श्राइन बोर्ड ने पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों पर रोजाना 10,000 श्रद्धालुओं की सीमा तय की है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आधारित है.

आजतक संवाददाता अशरफ वानी ने बताया कि यात्रा के पहले हफ्ते में ही शिवलिंग पिघल गया. इल्तिजा मुफ्ती ने भी सवाल उठाया कि जब शिवलिंग इतनी जल्दी पिघल जाता है तो गुफा तक प्रस्तावित रोपवे की क्या जरूरत है. वहीं श्रीनगर के उद्यमी विनीत कौल ने कहा कि 2004, 2006, 2007, 2016 और 2020 में भी ऐसा हो चुका है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

इंदौर से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि पहले बाबा बर्फानी 40 से 45 दिनों तक दर्शन देते थे, लेकिन अब यह अवधि घटकर सिर्फ पांच से सात दिन रह गई है. उन्होंने चौथे दिन दर्शन किए, तब तक शिवलिंग काफी छोटा हो चुका था.

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वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय क्षेत्र बाकी पहाड़ी इलाकों की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है. पिछले दो दशकों में यात्रा मार्ग पर सड़कें चौड़ी हुई हैं, अस्थायी आवास बढ़े हैं, लंगर गुफा के करीब आ गए हैं और भारी मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा है. कांग्रेस प्रवक्ता अश्वनी हांडा ने मांग की है कि गुफा के पास बने रेन शेल्टर के असर की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराई जाए.

यह भी पढ़ें: बिना रजिस्ट्रेशन जा रहे अमरनाथ यात्रा? हो जाएं सावधान, जारी हुई सख्त एडवाइजरी

फिलहाल किसी एक कारण को लेकर कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन यह घटना यात्रा और हिमालय के नाजुक पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को उजागर करती है.

(इंडिया टुडे वेबसाइट में प्रकाशित मूल लेख का अनुवाद)

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