जम्मू कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी पीडीपी की ओर से मांगने के बाद एक निर्दलीय विधायक ने नया शगूफा छोड़ा है. निर्दलीय विधायक शेख अब्दुल राशिद ने दावा किया है कि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू के शव के अवशेष उसके परिवार को सौंपने से केंद्रीय गृह मंत्रालय के इनकार से शक होता है कि गुरू को तिहाड़ में दफनाने के बजाय कहीं उसके शव को जला तो नहीं दिया गया.
राशिद ने कहा, 'गृह मंत्रालय अपने रुख पर कायम है कि के अवशेष उसके परिवार को नहीं सौंपे जा सकते, क्योंकि उसे जेल के नियमों के अनुसार एक अचिह्नित कब्र में दफन कर दिया गया. इस रुख से साफ लगता है कि इस बात की पूरी आशंका है कि अफजल गुरू के शव को दफन करने के बजाय जलाया गया हो और यह धार्मिक नियमों का पूरी तरह उल्लंघन है.'
उत्तर कश्मीर के लांगाते विधानसभा से निर्दलीय विधायक राशिद ने 2012 में गुरू को क्षमादान की मांग करते हुए विधानसभा में प्रस्ताव रखा था. अफजल गुरू को नौ फरवरी, 2013 को तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई थी.
राशिद ने एक बयान में गृह मंत्रालय के इनकार को ‘न्याय का मजाक और अमानवीय मानकों की मिसाल’ करार दिया.
(इनपुट: भाषा)