हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराध, धमकी भरे कॉल्स और रंगदारी (Extortion) की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से ‘अभेद्य’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया है. ये देश का पहला ऐसा मोबाइल आधारित सुरक्षा प्लेटफॉर्म है जो नागरिकों को संदिग्ध कॉल्स, धमकी भरे संदेशों, स्टॉकिंग और डिजिटल उत्पीड़न से बचाने में मदद करेगा. पुलिस का कहना है कि ये कदम मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उठाया गया है.
इस संबंध में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल ने पंचकूला पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ‘अभेद्य’ ऐप के फीचर्स और कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी साझा की.
उन्होंने कहा कि बदलते वक्त में अपराधी इंटरनेट आधारित कॉलिंग, फर्जी नंबरों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को डराने और ठगी करने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में ये ऐप नागरिकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगा.
सिंघल ने कहा कि पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने एक्सटॉर्शन कॉल्स पर रोक लगाने के लिए योजनाबद्ध रणनीति के तहत काम शुरू किया था.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त एवं स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे, जिनके अनुरूप पुलिस ने ठोस कदम उठाए. उन्होंने कहा कि इस मोबाइल ऐप के माध्यम से डॉक्टरों, ठेकेदारों, व्यापारियों सहित आम नागरिकों को व्यापक स्तर पर सुरक्षा और राहत मिलेगी.
रंगादारी मांगने वालों को मानेंगे आतंकी
डीजीपी अजय सिंघल ने अपराधियों को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति भय और आतंक का माहौल पैदा करेगा, उसे आतंकवादी की श्रेणी में रखकर कठोर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि अक्सर अपराधी विदेशी नंबरों और इंटरनेट कॉलिंग का सहारा लेकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश करते हैं. 'अभेद्य' ऐप इसी चुनौती का समाधान है. ये ऐप न केवल कॉल को ब्लॉक करेगा, बल्कि बैकहैंड से संदिग्ध कॉलर को ट्रेस करने में भी मदद करेगा. इससे डॉक्टरों, व्यापारियों और ठेकेदारों जैसे संवेदनशील वर्गों को बड़ी सुरक्षा मिलेगी.
ऐसे मिलेगा ऐप का एक्सेस
उन्होंने बताया कि 'अभेद्य' ऐप एंड्रॉयड और एप्पल दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, लेकिन इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनाई गई है. किसी भी नागरिक को इस ऐप का एक्सेस प्राप्त करने के लिए अपने जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) से संपर्क करना होगा. वेरिफिकेशन के बाद ही उन्हें अधिकृत एक्सेस दिया जाएगा. ऐप अज्ञात, वर्चुअल और अनसेव्ड नंबरों की चौबीसों घंटे निगरानी करता है. यदि कोई कॉल संदिग्ध पाई जाती है तो ऐप उसे यूजर के फोन की घंटी बजने से पहले ही काट देता है, जिससे पीड़ित को धमकी सुनने की नौबत ही नहीं आती.
अभेद्य का अपडेटेड वर्जन
वहीं, प्रेस वार्ता में इस ऐप के अपडेटेड वर्जन 'अभेद्य-2.0' की भी जानकारी दी गई है. ये उन्नत वर्जन न केवल इंटरनेट कॉल्स बल्कि सामान्य नेटवर्क कॉल्स पर भी नियंत्रण रखेगा. इसमें यूजर के पास ये विकल्प होगा कि वह केवल अपने फोन में सेव और सत्यापित नंबरों से ही कॉल प्राप्त करे. प्राइवेट या हिडन नंबरों के साथ-साथ संदिग्ध घरेलू नंबरों को भी इसके जरिए ब्लॉक किया जा सकेगा. ये सिस्टम अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गुमनाम संचार माध्यमों को पूरी तरह ध्वस्त करने की क्षमता रखती है.
डिजिटल अरेस्ट पर प्रहार
साइबर ठगी के नए तरीके 'डिजिटल अरेस्ट' से निपटने के लिए हरियाणा पुलिस जल्द ही 'ड्यूल ओटीपी सिस्टम' लागू करेगी.
डीजीपी ने बताया कि इसके लिए एचडीएफसी बैंक के साथ मिलकर योजना तैयार की गई है. शुरुआती चरण में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के खातों को सुरक्षित किया जाएगा. इस व्यवस्था में किसी भी ट्रांजेक्शन का ओटीपी खाताधारक के साथ-साथ उनके किसी विश्वसनीय परिजन (बेटा, बेटी आदि) के पास भी जाएगा. दोनों ओर से पुष्टि होने के बाद ही पैसा ट्रांसफर हो सकेगा. इससे बुजुर्गों को डरा-धमका कर पैसे ऐंठने वाली घटनाओं पर लगाम लगेगी.
हरियाणा पुलिस केवल तकनीकी समाधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वित्तीय सुरक्षा के लिए बैंकिंग संस्थानों के साथ भी काम कर रही है. डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड को न्यूनतम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य बैंकों के साथ मिलकर ट्रांजेक्शन लिमिट तय करने पर विचार किया जा रहा है.
एडीजीपी साइबर शिबास कबिराज और डीसीपी सृष्टि गुप्ता के साथ मिलकर पुलिस की टीम इस रूपरेखा को अंतिम रूप दे रही है. पुलिस का टारगेट एक ऐसा सुरक्षा तंत्र बनाना है, जहां अपराधी को ट्रेस करना और उसे कानून के दायरे में लाना और भी आसान हो जाए.
जनता से अपील
वहीं, अंत में, डीजीपी सिंघल ने हरियाणा पुलिस के मूल मंत्र "सेवा, सुरक्षा, सहयोग" को दोहराते हुए नागरिकों से इस ऐप का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की.
उन्होंने कहा कि पुलिस प्रत्येक अपराधी को कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए प्रतिबद्ध है. 'अभेद्य' ऐप के 25 चयनित उपयोगकर्ताओं पर किए गए ट्रायल पूरी तरह सफल रहे हैं और अब इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है.
पुलिस का मानना है कि नागरिकों के सहयोग और इस तकनीक के मेल से हरियाणा में अपराध की दर में और भी बड़ी गिरावट आएगी.