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QR कोड से वसूली, गेमिंग आईडी में कॉइन और करोड़ों का साइबर जाल, गुरुग्राम पुलिस ने दबोचे 6 आरोपी

ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ठगने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का गुरुग्राम पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. दिल्ली के जनकपुरी स्थित एक फ्लैट पर छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने मौके से मोबाइल, लैपटॉप, ATM कार्ड, SIM कार्ड और बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं.

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दिल्ली के जनकपुरी में पुलिस की रेड.(Photo: Representational)
दिल्ली के जनकपुरी में पुलिस की रेड.(Photo: Representational)

गुरुग्राम पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने दिल्ली के जनकपुरी इलाके में छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद हुई है.

पुलिस के मुताबिक, तकनीकी निगरानी और साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर शुक्रवार को पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र में एक फ्लैट पर छापा मारा गया. कार्रवाई के दौरान छह लोगों को पकड़ा गया, जो कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क और गेमिंग पैनल संचालित कर रहे थे.

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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान निशांत, अर्जुन कुमार, हर्ष, तनुज उर्फ नोनू, शोएब और समरजीत के रूप में हुई है. सभी आरोपी दिल्ली के रहने वाले बताए गए हैं.

फ्लैट से बरामद हुआ साइबर फ्रॉड का पूरा सेटअप

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 31 मोबाइल फोन, 9 लैपटॉप, 9 ATM कार्ड, 43 SIM कार्ड, तीन बैंक खातों से जुड़े चेकबुक और पासबुक के अलावा तीन कार्ड स्वाइप मशीनें बरामद कीं. पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग और वित्तीय लेनदेन के जरिए साइबर ठगी को अंजाम देने में किया जा रहा था.

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QR कोड से लेते थे पैसे, गेमिंग आईडी में जोड़ते थे कॉइन

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निशांत और उसके साथी किसी अन्य व्यक्ति के निर्देश पर ऑनलाइन गेमिंग अकाउंट संचालित कर रहे थे. आरोपी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से गेमिंग प्लेटफॉर्म का प्रचार करते थे और नए ग्राहकों को जोड़ते थे.

पुलिस के अनुसार, इच्छुक ग्राहक वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाते थे और वहां दिए गए QR कोड के जरिए भुगतान करते थे. भुगतान मिलने के बाद आरोपी ग्राहकों की गेमिंग आईडी में पॉइंट्स या कॉइन जोड़ते थे. इसके बदले उन्हें वेतन और कमीशन मिलता था.

WhatsApp से मिलते थे बैंक खाते, SIM कार्ड और QR कोड

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें बैंक अकाउंट किट, SIM कार्ड और QR कोड WhatsApp के जरिए एक अन्य व्यक्ति उपलब्ध कराता था. इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग ऑपरेशन चलाने, पैसों के लेनदेन और साइबर फ्रॉड के लिए किया जाता था.

जांच एजेंसियां अब उस मास्टरमाइंड की तलाश कर रही हैं, जो इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था और आरोपियों को जरूरी संसाधन उपलब्ध करा रहा था.

दो मुख्य आरोपी रिमांड पर

मानेसर साइबर थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है. गुरुग्राम के साइबर ACP गौरव फोगाट ने बताया कि दो मुख्य आरोपियों निशांत और शोएब को अदालत में पेश कर तीन दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है.

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पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और ठगी की रकम कितनी है.

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