गुजरात में 26 अप्रैल को स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदान होना है, लेकिन उससे पहले ही राजनीति गरमाई हुई है. 15 अप्रैल को नामांकन वापिस लेने का आखिरी दिन है, उससे पहले ही कांग्रेस ने ज्यादातर जगहों पर अपने उम्मीदवारों को एक साथ अज्ञात जगहों पर भेजा है.
आम तौर विधानसभा या राज्यसभा के चुनावों के दौरान रिसॉर्ट पॉलिटिक्स देखने को मिलती है पर अब गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव में भी रिसॉर्ट पॉलिटिक्स दिख रही है, क्योंकि कांग्रेस को अपने उम्मीदवारों को नामांकन वापसी के दिन तक सुरक्षित जगह पर भेजना पड़ रहा है.
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि प्रशासन-पुलिस भाजपा के इशारे पर काम कर रही है और हमारे उम्मीदवारों और उनके परिवारों को डरा-धमका कर, लालच देकर दबाव बनाया जा रहा है. जिस वजह से हमने सभी उम्मीदवारों के अलग अलग सुरक्षित जगह पर रखा है, किसी को रिसॉर्ट नहीं भेजा गया. सभी एक साथ रहें और नामांकन वापसी ़का दिन खत्म हो जाए, तब तक भाजपा और उनके अधिकारी पहुंच न पाए इसलिए ऐसा किया गया है.
कांग्रेस ने उम्मीदवार भेजे सुरक्षित जगह
जानकारी के मुताबिक कांग्रस ने राजकोट, सुरत, मेहसाणा, वडोदरा, सुरेंद्रनगर जिलों में अपने उम्मीदवारों को सुरक्षित रखने के लिए एक साथ हर जिले में एक जगह भेज दिया है, ताकि उनसे कोई संपर्क न कर पाए.
कांग्रेस ने इस बारे में राज्य चुनाव आयोग को भी शिकायत की है, पुलिस-प्रशासन पर भाजपा का दबाव है और उसके सबूत भी दिए है पर कोई कारवाई नहीं की गई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया की वापी में एक चुनाव अधिकारी ने भाजपा के ज्यादा दबाव की वजह से आत्महत्या कर ली.
वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को नकारते हुए कहा है कि कांग्रेस के पास उम्मीदवार ही नहीं है, इसलिए इस प्रकार के आरोप लगा रही है. कांग्रेस पहले प्रत्याशी खोजो अभियान चला रही थी, अभी तक कांग्रेस को 60 प्रतिशत ही प्रत्याशी मिले है.
अभी कांग्रेस का प्रत्याशी छिपाओ अभियान चल रहा है और नतीजों के बाद कांग्रेस मुंह छिपाने के भी लायक नहीं रहेगी.
कांग्रेस जब तक जनता के बीच नहीं जाएगी उसकी यही हालत होनी है. कांग्रेस को अपने प्रत्याशी, कार्यकर्ताओ पर विश्वास नहीं है इसलिए यह सब करना पड़ रहा है. ऐसी हालत में जनता कैसे उन पर विश्वास करेगी, जनता को कांग्रेस पर भरोसा नहीं है.
नामांकन फॉर्म की जांच के अंतिम दिन कुल 9,819 फॉर्म रद्द किए गए हैं. इनमें से 1,934 फॉर्म नगर निगमों में, 1,164 फॉर्म नगर पालिकाओ में, जिला एवं तालुका पंचायत में पर 6,721 फॉर्म रद्द किए गए है.
उम्मीदवारों की संख्या का विश्लेषण करने पर पता चला कि सबसे अधिक फॉर्म जिला तालुका पंचायत स्तर पर रद्द हुए है. यहां कुल 20,000 से अधिक नामांकन पत्र दाखिल किए गए, जिनमें से 6,721 प्रपत्र दस्तावेजी या तकनीकी खामियों के कारण रद्द कर दिए गए हैं.
कई नगर निगम और नगर पालिकाओं में भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीत चूके हैं, क्योंकि सामने वाले उम्मीदवारों के फॉर्म रद्द हो चूके है . जिससे अब कांग्रेस को डर है कि अब उनके उम्मीदवार नामांकन ही वापिस ले लेंगे तो वो कई जगह पर चुनाव कैसे लड़ेगी.
ऐसे में कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों को सुरक्षित जगह एक साथ रखा है. कल स्थिति साफ होगी की कांग्रेस के सही में कितने उम्मीदवार मैदान में रहते है और कांग्रेस का यह तरीका कितना सफल हो पाता है.