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गुजरात में नया कानून! महिलाओं को नाइट शिफ्ट की छूट, Working Hours भी बढ़े

गुजरात विधानसभा ने दुकान और स्थापना (संशोधन) विधेयक 2026 को सर्वसम्मति से पारित किया है. इसके तहत महिलाओं को रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक काम करने की अनुमति दी गई है, लेकिन सुरक्षा और सुविधा के कड़े नियम लागू किए गए हैं. काम के घंटे 9 से बढ़ाकर 10 घंटे किए गए हैं और ओवरटाइम की सीमा भी बढ़ाई गई है.

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नए बिल के तहत ओवरटाइम की लिमिट भी बढ़ी है. (Photo: ITG)
नए बिल के तहत ओवरटाइम की लिमिट भी बढ़ी है. (Photo: ITG)

गुजरात में व्यापार को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. मंगलवार को गुजरात विधानसभा में 'दुकान और स्थापना (संशोधन) विधेयक, 2026' को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. इस नए कानून के तहत अब राज्य में दुकानों और कमर्शियल संस्थानों में काम करने के नियमों में अहम बदलाव किए गए हैं.

इस विधेयक की सबसे बड़ी बात महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति देना है. अब महिलाएं अपनी मर्जी से रात 9 बजे से सुबह 6 बजे के बीच काम कर सकेंगी. हालांकि, सरकार ने इसके लिए कंपनियों पर कड़ी शर्तें भी रखी हैं.

संस्थानों को महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और यौन उत्पीड़न से बचाव के पुख्ता इंतजाम करने होंगे. इसके अलावा, नाइट क्रेच, अलग शौचालय और आराम करने के लिए रेस्ट रूम जैसी सुविधाएं देना जरूरी होगा.

रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट शिफ्ट को मंजूरी

मंत्री कुंवरजी बावलिया ने सुरक्षा पर जोर देते हुए सदन में कहा, 'एक प्रावधान राज्य सरकार को ये पावर देता है कि अगर जरूरी समझा जाए, तो वो आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना के जरिए कुछ क्षेत्रों की विशिष्ट दुकानों या प्रतिष्ठानों में रात 9 बजे से सुबह 6 बजे के बीच महिला श्रमिकों के नियोजन को बैन कर सकती है.' 

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साथ ही, रात में काम करने वाली महिलाओं को घर तक आने-जाने के लिए ट्रांसपोर्ट की सुविधा भी कंपनी को ही देनी होगी.

काम के घंटे और ओवरटाइम के नए नियम

नए कानून के तहत अब कर्मचारियों के दैनिक काम के घंटों को 9 से बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया है (इसमें ब्रेक का समय भी शामिल है). इसके अलावा, ओवरटाइम करने वाले श्रमिकों को भी राहत दी गई है. अब एक तिमाही (3 महीने) में अधिकतम ओवरटाइम की सीमा 125 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई है.

सरकार के फैसले को विपक्ष का समर्थन 

शुरुआत में विपक्ष ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन सरकार के भरोसे के बाद कांग्रेस ने भी इस बिल का समर्थन किया. सरकार ने साफ किया है कि इन नियमों का मकसद 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और श्रमिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना है. 

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बावलिया ने सदन को भरोसा दिलाया है कि सरकार इन प्रावधानों को सख्ती से लागू करेगी और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. विपक्ष के नेता शैलेश परमार ने समर्थन देते हुए कहा कि वो औद्योगिक विकास के पक्ष में हैं, लेकिन कर्मचारियों के शोषण को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी बहुत जरूरी है.

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