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हजार गांवों में बत्ती गुल, 5 हजार पोल टूटे, सैकड़ों पेड़ उखड़े... गुजरात में बिपरजॉय छोड़ गया तबाही के निशान

भीषण तबाही मचाने के बाद बिपरजॉय तूफान गुजरात की सीमा को पार कर चुका है. अब वह पाकिस्तान को पार करता हुआ तेजी से राजस्थान के बाड़मेर शहर की ओर बढ़ रहा है. गुजरात में लैंडफॉल के बाद चक्रवात कमजोर पड़ गया है. इस वक्त हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा है. लेकिन अब भी अपने साथ इतनी बारिश लेकर चल रहा है कि राजस्थान के 5 शहर रेड अलर्ट पर हैं.

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बिपरजॉय तूफान गुजरात में छोड़ गया तबाही के निशान
बिपरजॉय तूफान गुजरात में छोड़ गया तबाही के निशान

चक्रवाती तूफान बिपरजॉय गुजरात से तो गुजर गया, लेकिन पीछे छोड़ गया मुसीबत की मूसलाधार बारिश और आफत का सैलाब. सबसे भयानक असर कच्छ और सौराष्ट्र के 8 जिलों में रहा. यहां तूफान अपने पीछे भारी तबाही छोड़ हो गया है. जगह-जगह पेड़ और खंभे गिर गए. 22 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. जब तूफान आया तो सैकड़ों पेड़ उखड़ गए, गाड़ियां खिलौनों की तरह पलट गईं. आलम ये था कि हवाएं सबकुछ उखाड़ फेंकने पर तुल गई थीं.

दरअसल, भीषण तबाही मचाने के बाद बिपरजॉय तूफान गुजरात की सीमा को पार कर चुका है. अब वह पाकिस्तान को पार करता हुआ तेजी से राजस्थान के बाड़मेर शहर की ओर बढ़ रहा है. गुजरात में लैंडफॉल के बाद चक्रवात कमजोर पड़ गया है. इस वक्त हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा है. लेकिन अब भी अपने साथ इतनी बारिश लेकर चल रहा है कि राजस्थान के 5 शहर रेड अलर्ट पर हैं.  

74 हजार लोग शिफ्ट, 442 गांवों में अलर्ट, गुजरात के तट से आज टकराएगा  चक्रवाती Cyclone Biparjoy - Biparjoy Cyclone Gujarat on alert India and  Pakistan Landfall coastal ntc - AajTak

1 हजार से अधिक गावों में अब भी बत्ती गुल 

न्यूज एजेंसी के मुताबिक गुजरात के कच्छ और सौराष्ट्र में चक्रवात से 5,120 बिजली के खंभे टूटे हैं, जिसके चलते 4,600 गांवों की बत्ती गुल हो गई. हालांकि यहां किसी भी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है. वहीं अधिकारियों ने बताया कि 3,580 गांवों में बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी गई है, जबकि 1,000 से अधिक गांवों में अभी भी बिजली नहीं है. इसके अलावा करीब 600 पेड़ इस तूफान में उखड़े हैं. इसके चलते तीन स्टेट हाइवे पर ट्रैफिक का संचालन ठप हो गया. वहीं सैकड़ों कच्चे मकान भी तूफान की भेंट चढ़ गए. दर्जनों वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं.

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अधिकारियों ने बताया कि बिपरजॉय 140 किमी प्रति घंटे की विनाशकारी रफ्तार से गुजरात में पहुंचा और जो कुछ भी उसके आगे आया, सब तबाह करता चला गया.  गुरुवार शाम साढ़े छह बजे चक्रवात के जखाऊ बंदरगाह के पास पहुंचने के बाद से पूरे कच्छ जिले में भारी बारिश हुई, जो कि तड़के ढाई बजे तक जारी रही.

तूफान

भावनगर में पिता-पुत्र की मौत

राज्य के राहत आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने बताया, "चक्रवात बिपरजॉय के कारण अब तक किसी भी व्यक्ति के मरने की सूचना नहीं है. यह राज्य के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है. यह हमारे सामूहिक प्रयासों के कारण संभव हुआ है. चक्रवात के आने से पहले एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था. भावनगर जिले में खड्डे में फंसी अपनी बकरियों को बचाने की कोशिश के दौरान गुरुवार को पिता और पुत्र की मौत के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि चूंकि जिला चक्रवात प्रभावित नहीं था, इसलिए उनकी मौतों को चक्रवात से संबंधित नहीं गिना गया है.

किस जिले से कितने लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया

गुजरात के आठ तटीय जिलों में कुल 1 लाख से ज्यादा लोगों को अस्थायी आश्रयों में ले जाया गया है. गृह मंत्रालय के मुताबिक अकेले कच्छ जिले में लगभग 34,300 लोगों को, जबकि जामनगर में 10,000, मोरबी में 9,243, राजकोट में 6,089, देवभूमि द्वारका में 5,035, जूनागढ़ में 4,604, पोरबंदर जिले में 3,469 और गिर सोमनाथ जिले में 1,605 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है. इसके साथ, एनडीआरएफ की 15, एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की 12, राज्य सड़क एवं भवन विभाग की 115  और राज्य बिजली विभाग की 397 टीम विभिन्न तटीय जिलों में तैनात की गई हैं.

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1152 गर्भवती महिलाओं को किया गया रेस्क्यू

गुजरात सरकार ने आठ चक्रवात प्रभावित जिलों से 1,171 गर्भवती महिलाओं में से लगभग 1,152 को पहले ही सुरक्षित जगह पहुंचा दिया था. इनमें से 707 गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा हुई और उन्होंने बच्चों को जन्म दिया. अधिकारियों के मुताबिक कच्छ जिले से 552, राजकोट से 176, देवभूमि द्वारका से 135, गिर सोमनाथ से 94, जामनगर से 62, जूनागढ़ से 58, पोरबंदर से 33, पोरबंदर से 26 राजकोट नगर पालिका, जूनागढ़ मनपा से 8, और मोरबी और जामनगर मनपा से 4-4 गर्भवती महिलाओं को रेस्क्यू किया गया था.

किस जिले में कितने बच्चों का हुआ जन्म

अधिकारियों ने बताया कि जिन गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया, उनमें जन्म देने वाली महिलाओं की संख्या इस प्रकार है: कच्छ जिले में 348, राजकोट में 100, देवभूमि द्वारका में 93, गिर सोमनाथ में 69, पोरबंदर में 30, जूनागढ़ में 25, 17 जामनगर में 12, राजकोट महानगर पालिका में 12, जूनागढ़ नगर निगम में 8, जामनगर नगर निगम में 4 और मोरबी जिले में 1. अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कुल मिलाकर 707 बच्चों की डिलीवरी सफलतापूर्वक हुई है. बयान में आगे कहा गया है कि इस पूरे अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए 302 सरकारी वाहन और 202 एंबुलेंस ने दिन रात काम किया है.

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