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गुजरात: अजब पुल की गजब कहानी! बनाने में लग गए 80 करोड़ रुपए, जहां खत्म हुआ ब्रिज वहां से आगे जाने का रास्ता ही नहीं

अहमदाबाद के घूमा और शिलज के बीच रेलवे लाइन के ऊपर 80 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल, जो डेढ़ साल पहले तैयार हुआ, अब तक उद्घाटन के लिए बंद है. शिलज छोर से आगे सड़क नहीं है, केवल दीवार और कृषि भूमि है. 2019 से 2024 में AUDA और भारतीय रेलवे द्वारा बनाया गया यह पुल शिलज की मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए 300 मीटर कृषि भूमि में बदलाव की मंजूरी का इंतजार कर रहा है. स्थानीय लोग जोखिम उठाकर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. आधिकारिक उद्घाटन अभी बाकी है.

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ब्रिज का उद्घाटन अब तक नहीं हो पाया है. (Photo: ITG)
ब्रिज का उद्घाटन अब तक नहीं हो पाया है. (Photo: ITG)

अहमदाबाद के बोपल में घूमा और शिलज के बीच रेलवे लाइन के ऊपर डेढ़ साल पहले बनकर तैयार हुए 80 करोड़ रुपये के ब्रिज का उद्घाटन अब तक नहीं हो पाया है. वजह है कि ब्रिज के शिलज की तरफ समाप्त होते ही सड़क पूरी तरह गायब हो जाती है और आगे केवल दीवार और कृषि भूमि है. इससे प्रशासन के लिए यह ब्रिज अब परेशानी का सबब बन गया है.

पांच साल में बनकर हुआ तैयार
ब्रिज का निर्माण 2019 में शुरू हुआ था और 2024 में यह तैयार हुआ. इसे अहमदाबाद अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (AUDA) और भारतीय रेलवे ने घूमा और शिलज को जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया था. हालांकि, डिजाइन के समय ही यह ज्ञात था कि ब्रिज के शिलज छोर पर सड़क नहीं है, लेकिन परियोजना को मंजूरी दे दी गई और 80 करोड़ की लागत से ब्रिज बनकर तैयार हो गया.

ब्रिज तैयार, पर सड़क नहीं
घूमा की तरफ से ब्रिज पर वाहन आसानी से चढ़ सकते हैं, लेकिन शिलज की ओर ब्रिज समाप्त होते ही सड़क नहीं दिखती. आगे दीवार और उसके पीछे कृषि भूमि है. स्थानीय लोग बताते हैं कि ब्रिज के शिलज छोर पर सड़क बनाने के लिए लगभग 300 मीटर कृषि भूमि में बदलाव करना आवश्यक है. बिना इस सड़क के ब्रिज को शिलज के मुख्य मार्ग से जोड़ना असंभव है.

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स्थानीय लोग हालांकि जोखिम उठाकर ब्रिज का इस्तेमाल कर रहे हैं. कुछ लोग घूमा से ब्रिज पर चढ़ते हैं और शिलज की तरफ ब्रिज समाप्त होने पर यूटर्न लेकर नीचे लौट जाते हैं. इस बीच ब्रिज और यूटर्न के बीच की ऊंचाई कई बार वाहन चालकों के लिए खतरा साबित हो रही है.

AUDA की क्या है चुनौती?
AUDA के सीईओ डीबी देसाई ने आजतक को बताया कि ब्रिज पूरी तरह तैयार है, लेकिन शिलज की तरफ आगे सड़क बनाने के लिए कृषि भूमि को शामिल करना जरूरी है. इसके लिए सरकार से टीपी (ट्रांसपोर्ट प्लान) स्कीम में बदलाव की मंजूरी मांगी गई है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में पास में एक अस्थायी कच्चा रास्ता है, जिस पर आवाजाही जारी है.

डीबी देसाई ने कहा, 'हमारी टीम पिछले चार महीने से ब्रिज के आगे सड़क बनाने की तैयारी में लगी है, लेकिन कृषि भूमि पर हमारा मालिकाना हक नहीं है. जैसे ही सरकार टीपी स्कीम में बदलाव की मंजूरी देगी, हम सड़क निर्माण का काम तुरंत शुरू कर देंगे. हमारी कोशिश रहेगी कि मौजूदा जमीन मालिकों के साथ एडवांस पोजिशनिंग कर, बदलाव होते ही सड़क निर्माण को आगे बढ़ाया जा सके.'

क्या होगा अगला कदम?
सीईओ डीबी देसाई ने कहा कि निश्चित समय बताना मुश्किल है, लेकिन सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है. उन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही जोन में बदलाव की मंजूरी मिल जाएगी. इसके बाद टीपी की प्रक्रिया 9 महीने में पूरी की जा सकेगी.

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डिजाइन और योजना पर सवाल
डिजाइन बनाते समय यह स्पष्ट था कि ब्रिज के शिलज छोर पर सड़क नहीं है, इसके बावजूद परियोजना को मंजूरी क्यों दी गई, इस पर डीबी देसाई ने कहा कि विकास योजनाएं अक्सर अगले 10–15 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं. उन्होंने कहा कि जैसे ही जोन बदलाव की मंजूरी मिलेगी, ब्रिज शिलज और आसपास के लोगों के लिए उपयोगी होगा और मुख्य सड़कों का ट्रैफिक भी कम होगा.

इस प्रकार डेढ़ साल से तैयार 80 करोड़ रुपये का ब्रिज अब भी उद्घाटन का इंतजार कर रहा है, और स्थानीय लोग आधिकारिक रूप से इसे इस्तेमाल करने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

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