राजकोट के एक अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद कम से कम सात लोगों के एक आंख की रोशनी चले जाने आशंका है जबकि चार अन्य में गंभीर जटिलताएं पैदा होने की बात सामने आयी है. हालांकि अस्पताल के एक अधिकारी का कहना है कि आंखों की रोशनी का जाना अस्थायी हो सकता है.
प्रशासन ने शुरू की मामले की जांच
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर रूपाली मेहता ने कहा, ‘हमें सूचना मिली है कि एक ट्रस्ट अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद कुछ लोगों की दृष्टि चली गयी है. जिला स्वास्थ्य विभाग ने सच का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है.’ अधिकारी ने कहा, 25 लोगों का ऑपरेशन हुआ था जिनमें से 11 को समस्या हो रही है. ज्यादातर मरीज प्रौढ़ या वरिष्ठ नागरिक हैं और सभी निम्न या निम्न मध्यवर्ग के हैं. सात लोगों ने एक आंख की रोशनी जाने की शिकायत की है जबकि चार अन्य ने आंखों में खुजली होने या दृष्टि धुंधली होने की शिकायत की है.
रोशनी का जाना अस्थाई हो सकता है
पीड़ितों में से एक भीखू पटान का कहना है कि ऑपरेशन के तीन-चार दिन बाद उसे आंख में खुजली होने लगी. जब वह अस्पताल दिखाने गया तो उसे पता चला कि आंख की रोशनी चली गयी है. संपर्क करने पर अस्पताल के न्यासी बीबी गोगिया ने कहा, ‘सात लोगों, जिन्होंने रोशनी जाने की शिकायत की है, उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. परेशानियों के कई कारण हो सकते हैं, जैसे उन्होंने आंखों के ड्रॉप की गुणवत्ता के बारे में डॉक्टर की सलाह ना मानी हो या अन्य शारीरिक कारण हों.’ उन्होंने कहा कि रोशनी का जाना अस्थायी भी हो सकता है. उन्होंने कहा कि अस्पताल में ऑपरेशन में प्रयुक्त लेजर मशीन को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है.
सात लोगों की गई रोशनी, चार अन्य को भी है दिक्कत
गोगिया ने कहा कि ऑपरेशन करने वाले नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हेतल बखाई योग्य डॉक्टर हैं. उन्होंने कहा, ‘वह (बखाई) एक योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं. अस्पताल पिछले एक दशक से ऐसे ऑपरेशन कर रहा है और यह पहली ऐसी घटना है.’ जिन सात लोगों ने आंख की रोशनी जाने की शिकायत की है उनकी पहचान नानीबेन छेनानी (63), सरोजबा जडेजा (60), प्रवीनसिंह चौहान (62), इब्राहीम जुनेजा (85) और रमणिक धमानी (56) के अलावा पठान (40) के रूप में हुई है.