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क्या बारिश का दिल्ली के पॉल्यूशन से है कनेक्शन? पिछले दो साल की तुलना में अक्टूबर में सिर्फ 4 फीसदी बारिश हुई

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इस साल अक्टूबर के महीने में बारिश नहीं हुई है. इससे तमाम परेशानियां बढ़ गई हैं. बारिश ना होने की वजह से वायु प्रदूषण भी बढ़ा है. पिछले दो साल की तुलना में दिल्ली-एनसीआर में अक्टूबर के महीने में सिर्फ 4 फीसदी बारिश हुई है. अगले कुछ दिन तक यहां धुंध और धुएं के बढ़ने का अलर्ट जारी किया गया है.

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दिल्ली में बारिश ना होने से वायु प्रदूषण बढ़ा है.
दिल्ली में बारिश ना होने से वायु प्रदूषण बढ़ा है.

दिल्ली-एनसीआर में एयर पॉल्यूशन से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है. लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है. बड़ी संख्या में लोग बीमार हो रहे हैं और अस्पताल में पहुंच रहे हैं. दिल्ली में हर साल प्रदूषण की समस्या बढ़ती है और लोगों को बचाने के उपाय खोजे जाते हैं. जागरूक करने की तमाम पहलें भी की जाती हैं. जानकार सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के कई फैक्टर भी बताते हैं. इस बीच, यह भी सामने आया है कि इस साल दिल्ली में अक्टूबर के महीने में सबसे कम 4 फीसदी बारिश हुई है, जिसकी वजह से तमाम मुश्किलें बढ़ी हैं.

हाल के दिनों में प्रदूषक तत्वों के जमा होने के पीछे एक प्रमुख वजह बारिश की कमी भी आई है. जानकारों का कहना है कि इस मानसून के बाद के मौसम के दौरान वर्षा की बेहद कमी रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2023 में दिल्ली की वायु गुणवत्ता 2020 के बाद से सबसे खराब थी. मौसम वैज्ञानिकों ने इसके लिए बारिश ना होने को जिम्मेदार ठहराया है. 

इस साल ना के बराबर बारिश हुई

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, राजधानी में अक्टूबर में एक्यूआई 210 दर्ज किया गया. जबकि पिछले साल अक्टूबर में 210 और अक्टूबर 2021 में 173 था. बारिश के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं. दिल्ली में अक्टूबर 2022 में 129 मिमी बारिश हुई थी. जबकि अक्टूबर 2021 में 123 मिमी बारिश हुई. लेकिन अक्टूबर 2023 में बारिश ना के बराबर हुई है. यहां इस साल सिर्फ एक दिन ही बारिश हुई और 5.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई. यह आंकड़ा पिछले सालों के मुकाबले बेहद कम है.

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हवा में 'जहर' घोलते हैं ये फैक्टर

बारिश ना होने से मौसम में भी बदलाव आया है. धूल और अन्य फैक्टर्स ने प्रदूषण बढ़ाने में मदद की. इसके अलावा, पटाखे जलाने, धान की पराली जलाने और स्थानीय प्रदूषण सोर्स भी एयर पॉल्यूशन में 'जहर' घोलते हैं. यही वजह है कि सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में खतरनाक वायु गुणवत्ता दमघोंटने वाली होती है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के एक एनालिसिस के अनुसार, राजधानी में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक प्रदूषण हाई लेवल पर होता है. चूंकि इसी समय पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामलों की संख्या बढ़ जाती है. सीएक्यूएम ने बताया कि 15 सितंबर के बाद से पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में क्रमश: करीब 56 प्रतिशत और 40 प्रतिशत की कमी आई है.

'तीन दिन में जबरदस्त उछाल आया'

हालांकि, इन राज्यों में पिछले तीन दिनों में खेतों में आग लगने की घटनाओं में जबरदस्त उछाल देखा गया है. पंजाब सरकार का लक्ष्य इस सर्दी के मौसम में खेत की आग को 50 प्रतिशत तक कम करना और छह जिलों में पराली जलाने को खत्म करना है. धान की पुआल जलाने पर रोक लगाने के लिए पंजाब की कार्य योजना के अनुसार, राज्य में करीब 31 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है, जिससे लगभग 16 मिलियन टन धान की पुआल (गैर-बासमती) उत्पन्न होने की उम्मीद है. हरियाणा का अनुमान है कि राज्य में लगभग 14.82 लाख हेक्टेयर भूमि धान की खेती के अंतर्गत है, जिससे 7.3 मिलियन टन से अधिक धान का भूसा (गैर-बासमती) उत्पन्न होने की उम्मीद है. राज्य इस वर्ष खेत की आग को लगभग खत्म करने का प्रयास कर रहा है.

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मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में अगले तीन दिनों में हल्का कोहरा छाया रहेगा. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने एक बुलेटिन में कहा, शाम 5.30 बजे आर्द्रता 70 प्रतिशत थी. 

'दिल्ली में 15 सूत्रीय एक्शन प्लान लागू'

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री राय ने बुधवार को बताया कि सरकार उन क्षेत्रों में निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाएगी, जहां लगातार पांच दिनों तक AQI 400 अंक से ऊपर रहेगा. दिल्ली सरकार ने सर्दियों के मौसम के दौरान वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पिछले महीने 15-सूत्रीय कार्य योजना शुरू की, जिसमें धूल प्रदूषण, वाहन उत्सर्जन और कचरा जलाने पर रोक लगाई गई है. पिछले तीन वर्षों से दिल्ली सरकार शहर में पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर बैन लगा रही है.

'एक हजार सीएनजी बसें किराए पर लेने की तैयारी'

इसके अलावा, वाहन प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए 'रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ' अभियान शुरू किया है. सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और वाहन प्रदूषण को कम करने के लिए 1,000 निजी सीएनजी बसें किराए पर लेने की योजना बनाई गई है. पुणे के आईआईटीएम ने एक दिल्ली में प्रदूषण की दो वजहें बताई हैं. मॉडल-आधारित प्रणाली के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब करने में वर्तमान में वाहन उत्सर्जन (11 प्रतिशत से 16 प्रतिशत) और पराली जलाना (सात प्रतिशत से 16 प्रतिशत) है.

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