देश की राजधानी में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ छात्रों के पेरेंट्स ही नहीं बल्कि अब टीचर्स भी सड़कों पर उतर आए हैं. एक तरफ पेरेंट्स बढ़ी हुई फीस का विरोध करते नजर आए तो टीचर्स स्कूल से निकाले जाने और सैलरी न बढ़ाए जाने से नाराज हैं. रविवार को दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के प्राचीन हनुमान मंदिर के नजदीक छात्रों के पेरेंट्स और टीचर एक साथ जुटे. यहां उन्होंने अधिकारियों की सद्बुद्धि के लिए हनुमान मंदिर के सामने प्रार्थना सभा का आयोजन किया.
छात्रों के पेरेंट्स और टीचर्स एक साथ मिलकर 14 फरवरी को शिक्षा विभाग को एक श्वेत पत्र सौंपने जा रहे हैं. पेरेंट्स का कहना है कि वेलेंटाइन डे के मौके पर छात्रों के पेरेंट्स और टीचर शिक्षा विभाग को प्यार से अपनी मांग को लागू करने की अपील करेंगे.
नजफगढ़ से आए पेरेंट्स अमित ने आरोप लगाया कि स्कूल को पिछले 3 साल में 80 से 100 करोड़ रुपए छात्रों के पेरेंट्स को वापस देना है, लेकिन शिक्षा विभाग फीस लौटाने के एक आदेश के बावजूद मदद नहीं कर रहा है.
द्वारका से आईं एक छात्र की पेरेंट्स रचना ने बताया कि स्कूल की फीस 2800 रुपए से बढ़कर 5500 रुपए तक पहुंच गई है. साथ ही कुछ अभिभावकों ने बताया कि पहली क्लास तक होमवर्क नहीं देने का नियम बनाया गया था, लेकिन स्कूलों मे होमवर्क दिया जा रहा है.
छात्रों के पेरेंट्स के मुताबिक, छात्रों पर पढ़ाई का बोझ इतना बढ़ा दिया गया है कि बच्चे घर पर कोई एक्टिविटी नहीं कर पाते हैं. स्कूलों में पढ़ाई नहीं करवाई जाती बल्कि बच्चों पर होमवर्क बोझ का बढ़ाया जा रहा है, इस वजह से स्कूल अपना सिलेबस वक्त पर पूरा नहीं कर पा रहे हैं.
एक पेरेंट्स प्रियंका ने आरोप लगाया कि वे महंगी फीस चुका रहे हैं. इसके बावजूद उनकी बेटी की क्लास में 54 बच्चे हैं. क्लास में ज्यादा बच्चों के होने के चलते टीचर्स बच्चों पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं. पेरेंट्स का आरोप है कि स्कूलों को एक्टिविटी फंड और आईटी फीस अलग से देने के बावजूद बच्चों को इसका फायदा नहीं दिया जा रहा है.
इसके अलावा प्रार्थना सभा में विरोध जताने आई स्कूल टीचर चंचल वशिष्ट ने आरोप लगाया कि बच्चों से फीस पूरी ली जा रही है, लेकिन स्टाफ टीचर को छठवे और सातवे वेतन आयोग के मुताबिक वेतन नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि वे 6 साल से एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही थी और वेतन बढ़ाने की मांग के बावजूद उनका वेतन नहीं बढ़ाया गया. इसके बाद विरोध करने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया.
विरोध प्रदर्शन के दौरान तिहाड़ गांव से आए कल्पवृक्ष संस्थान के छोटे बच्चों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए स्कूलों में पेरेंट्स का दुःख और दर्द बताने की कोशिश की. छात्रों के पेरेंट्स और टीचर्स का आरोप है कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के सामने शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.