हर साल सर्दियों की आहट के साथ दिल्ली में प्रदूषण का भी खतरा बढ़ जाता है. पॉल्यूशन के खिलाफ इस बार दिल्ली सरकार पहले से ही सक्रिय नजर आ रही है. इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने बिना पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट वाले वाहन चालकों को 25 अक्टूबर से पेट्रोल-डीजल नहीं दिए जाने का आदेश जारी किया था.
अभी तक नहीं आया कोई अधिकारिक ऑर्डर
बिना पीयूसी सर्टिफिकेट के पेट्रोल-डीजल नहीं दिए जाने की जानकारी दिल्ली के पर्यावरण गोपाल राय दे तो चुके हैं लेकिन इसपर अभी तक किसी भी तरह अधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है. इसके चलते पेट्रोल पंप के मालिक और कंफ्यूजन की स्थिति में हैं. इस आदेश को लेकर पेट्रोल पंपों पर फिलहाल गहमागहमी की स्थिति नजर आ रही है.
पेट्रोल पंप पर मार्शल या सिविल डिफेंस स्टॉफ तैनात करने की मांग
प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित एक पेट्रोल पंप के मालिक मनीष कुमार के मुताबिक, बिना पीयूसी के पेट्रोल-डीजल नहीं देने के फैसले के बाद हमारा अनुभव अभी तक बेहद खराब रहा है. यात्री पंप कर्मचारियों के साथ हिंसक भी हो जा रहे हैं. स्थिति ज्यादा अराजक नहीं हो इसके लिए सरकार पेट्रोल पंपों पर मार्शल या सिविल डिफेंस स्टॉफ तैनात करे.
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आता है पेट्रोल-डीजल
ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (AIPDA) के अध्यक्ष अजय बंसल कहते हैं कि पेट्रोल और डीजल आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत आते हैं. इस अधिनियम के तहत उन वस्तुओं और उत्पादों की डिलीवरी सुनिश्चित की जाती है, जिसकी आपूर्ति, जमाखोरी या कालाबाजारी लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित होता है.
कई बार हो चुकी है हाथापाई
अजय बंसल के मुताबिक, पेट्रोल पंप के कर्मचारी कम पढ़े-लिखे हैं. उन्हें बिना पीयूसी के पेट्रोल देने से मना करने की जिम्मेदारी पुलिस इंस्पेक्टर की तरह नहीं दी जानी चाहिए. दिल्ली में 412 फिलिंग स्टेशन फिलहाल इस संबंध में अधिकारिक ऑर्डर के इंतजार में हैं. मयूर विहार फिलिंग स्टेशन के एक पेट्रोल पंप कर्मचारी के मुताबिक, हाल के वर्षों में पेट्रोल पंप पर सिविल डिफेंस और अन्य अधिकारियों के मौजूद होने पर भी यहां के कर्मचारियों के साथ हाथापाई हो चुकी है.
बिना पीयूसी के चलने वाले वाहनों की संख्या 19 लाख
परिवहन विभाग के मुताबिक इस साल जून-जुलाई में पीयूसी के बिना चलने वाले वाहनों की संख्या करीब 13 लाख थी. अब इन वाहनों की संख्या बढ़कर करीब 19 लाख हो गई है. दिल्ली में करीब 950 पीयूसी केंद्र हैं. देश में पंजीकृत वाहनों की संख्या 79 लाख के करीब है. बड़ी संख्या में एनसीआर वाहन दिल्ली आते हैं. एनसीआर में पीयूसी केंद्रों की स्थिति बदतर है. पीयूसी को बीमा से जोड़ने की सिफारिश की गई है.
क्यों जरूरी है PUC?
दिल्ली में वाहनों का प्रदूषण एक बड़ा फैक्टर है. PUC चेकिंग के लिए बड़ी टीम तैनात की गई है, लेकिन एक रिपोर्ट में सामने आया है कि इस मामले में बड़ा तबका लापरवाही कर रहा है और प्रदूषण सर्टिफिकेट रिन्यूअल नहीं करवा रहा है. ऐसे में गाड़ियों से प्रदूषित धुआं दिल्ली की हवा ख़राब कर रहा है. जब प्रदूषण का स्तर Very Poor श्रेणी में पहुंचता है तो स्थिति खराब हो जाती है, इसलिए सरकार ने पिछले साल मार्च महीने में इस फैसले पर विचार करना शुरू किया था.