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अटल कैंटीन पर भी LPG संकट की मार... भीड़ तो बढ़ी लेकिन सिलेंडर ही नहीं

दिल्ली में इन दिनों एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत का असर सीधे लोगों की रसोई पर पड़ रहा है. कई घरों में गैस खत्म होने की वजह से लोग अब खाने के लिए अटल कैंटीनों का सहारा ले रहे हैं. अचानक बढ़ी भीड़ के कारण कैंटीनों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और कई बार खाना जल्दी खत्म होने से लोगों को बिना खाए ही लौटना पड़ रहा है.

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दिल्ली में LPG की कमी का असर (Photo: PTI)
दिल्ली में LPG की कमी का असर (Photo: PTI)

राजधानी दिल्ली में इन दिनों रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडरों की भारी किल्लत देखने को मिल रही है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में गैस का स्टॉक और कम हो सकता है. इस संकट का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ा है. आलम यह है कि घरों में गैस खत्म होने की वजह से लोग अब दो वक्त के खाने के लिए दिल्ली सरकार की अटल कैंटीनों का रुख कर रहे हैं. अचानक बढ़ी भीड़ की वजह से इन कैंटीनों पर दबाव काफी बढ़ गया है और कई बार तो खाना तक कम पड़ जा रहा है.

कैंटीन के बाहर लगीं लंबी कतारें

गैस सिलेंडर न मिल पाने के कारण दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बनी अटल कैंटीनों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें लग रही हैं. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आश्रम इलाके की रहने वाली आभा शेखर ने बताया कि उनका परिवार पिछले कई दिनों से गैस सिलेंडर के लिए भटक रहा है. आभा एक घरेलू सहायिका हैं और उनके पति मजदूर हैं. सिलेंडर न मिल पाने की वजह से अब उनका पूरा परिवार दोपहर और रात के खाने के लिए अटल कैंटीन पर ही निर्भर है. उनका कहना है कि अगर यहां खाना न मिले, तो उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा.

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बचत के लिए भी कैंटीन पहुंच रहे लोग

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हैरानी की बात यह है कि जिनके पास अभी थोड़ा-बहुत गैस का स्टॉक बचा है, वे भी उसे बचाने के लिए कैंटीन में खाना खाने आ रहे हैं. आश्रम में राशन की दुकान चलाने वाले हेमंत ने बताया कि उन्होंने 20 दिन पहले सिलेंडर भरवाया था, जो अब खत्म होने वाला है. नया सिलेंडर कब मिलेगा, इसका कुछ पता नहीं है. इसलिए वे अपने परिवार को कैंटीन ला रहे हैं ताकि घर की गैस कुछ दिन और चल सके. कैंटीन का खाना सस्ता और किफायती होने की वजह से मध्यम वर्ग के लोग भी अब यहां कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं.

अचानक आई इस भीड़ ने कैंटीन चलाने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जंगपुरा और आश्रम की कैंटीनों में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि पहले जहां रोजाना 200 से 250 लोग आते थे, अब यह संख्या 300 के पार पहुंच गई है. कई बार तो भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि खाना सड़क तक खड़ी कतारों को भी पूरा नहीं पड़ पाता और लोगों को भूखे हाथ वापस जाना पड़ता है. पहले जहां कुछ खाना बच जाता था, अब स्टॉक समय से पहले ही साफ हो रहा है.

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खुद कैंटीन चलाने वालों के पास भी गैस की कमी

सबसे बड़ी चुनौती उन संस्थाओं के सामने है जो इन कैंटीनों में खाना सप्लाई करती हैं. खाना बनाने के लिए उन्हें रोजाना कम से कम 10 कमर्शियल सिलेंडरों की जरूरत होती है, लेकिन उन्हें बमुश्किल एक ही मिल पा रहा है. इन संस्थाओं ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को पत्र लिखकर अपनी चिंता जताई है. उनका कहना है कि अगर उन्हें समय पर गैस नहीं मिली, तो कैंटीन में खाना बनाना भी मुश्किल हो जाएगा. हालांकि, विभाग के बड़े अधिकारियों का कहना है कि सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है और वे जल्द ही बैठक कर इस समस्या का समाधान निकालेंगे.
 

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