दिल्ली के हौज खास इलाके में 27 मई की रात एक घर में भीषण आग लग गई. इस आग में देश के पहले भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानि CCI के चेयरमैन और रिटायर्ड IAS अधिकारी धनेंद्र कुमार की मौत हो गई. वो 80 साल के थे. वो दिल्ली के AIIMS ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान दम तोड़ गए. आग AC के इनडोर यूनिट में ब्लास्ट की वजह से लगी थी. पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
बुधवार की रात करीब 11 बजकर 18 मिनट पर हौज खास थाने को एक PCR कॉल आई. कॉल में बताया गया कि हौज खास के मकान नंबर R-15 में आग लग गई है. पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत मौके पर पहुंची. दो फायर टेंडर्स यानी दमकल गाड़ियों की मदद से आग को बुझाया गया.
उस वक्त घर में पांच लोग मौजूद थे. इनमें परिवार के सदस्य और घर में काम करने वाले नौकर भी शामिल थे. दो लोगों को तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया. इनमें से एक थे 80 साल के धनेंद्र कुमार, जिन्होंने AIIMS ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान धुएं की वजह से दम तोड़ दिया. उनके बेटे को भी इलाज के लिए भर्ती किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत खतरे से बाहर है.
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि आग AC के इनडोर यूनिट में ब्लास्ट की वजह से लगी थी. क्राइम टीम मौके पर पहुंची और पूरे घर की जांच की. इलेक्ट्रिकल यानी बिजली से जुड़ी जांच अभी चल रही है. मौके पर मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं. पुलिस को अभी तक किसी गड़बड़ी या साजिश का कोई संकेत नहीं मिला है.
कौन थे धनेंद्र कुमार?
धनेंद्र कुमार का जन्म 1946 में हुआ था. उन्होंने 1968 बैच के IAS अधिकारी के तौर पर अपनी सरकारी नौकरी शुरू की थी. अपने लंबे करियर में उन्होंने केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार में कई बड़े पदों पर काम किया.
केंद्र सरकार में उन्होंने रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय में सचिव के तौर पर काम किया. इसके अलावा वो ग्रामीण विद्युतीकरण निगम के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे.
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हरियाणा में उन्होंने करनाल और जींद में डिप्टी कमिश्नर के तौर पर काम किया. वो हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भी रहे. हरियाणा में इंडस्ट्रियल पार्क्स के विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें नेशनल सिटिजन्स अवॉर्ड भी मिला था. सार्वजनिक मामलों में बेहतरीन काम के लिए उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी दी गई थी.
नवंबर 2005 से जनवरी 2009 तक वो वर्ल्ड बैंक में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे. इस दौरान उन्होंने इन देशों से जुड़े कई आर्थिक और विकास के प्रोजेक्ट्स पर काम किया.
फरवरी 2009 में उन्हें CCI का पहला चेयरमैन बनाया गया और वो जून 2011 तक इस पद पर रहे. CCI वो सरकारी संस्था है जो देखती है कि बाजार में बड़ी कंपनियां कहीं अपना एकाधिकार तो नहीं जमा रहीं और छोटी कंपनियों के साथ गलत नहीं हो रहा. उनके कार्यकाल में भारत में प्रतिस्पर्धा कानून को लागू करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए गए.
रिटायरमेंट के बाद भी वो सक्रिय रहे. वो COMPAD के संस्थापक चेयरमैन थे. साथ ही भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान में स्कूल ऑफ कंपटीशन लॉ के प्रिंसिपल एडवाइजर और चीफ मेंटर के तौर पर भी जुड़े हुए थे.