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स्टाफ की भारी कमी झेल रहा दिल्ली सरकार का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल

एक तरफ जहां दिल्ली सरकार राजधानी में बेहतर स्वास्थ्य सेवा का दावा करती है तो वहीं दूसरी ओर दिल्ली सरकार का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल स्टाफ की भारी कमी झेल रहा है. 2003 में शीला सरकार के कार्यकाल में तकरीबन 153 करोड़ की लागत से बने इस हॉस्पिटल में लगभग 88 फीसदी स्टाफ की कमी है. इसका खामियाजा यहां आने वाले तीमारदारों को उठाना पड़ता है.

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स्टाफ से कमी से जूझ रहा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल(फोटो- सुशांत मेहरा)
स्टाफ से कमी से जूझ रहा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल(फोटो- सुशांत मेहरा)

एक तरफ जहां दिल्ली सरकार राजधानी में बेहतर स्वास्थ्य सेवा का दावा करती है तो वहीं दूसरी ओर दिल्ली सरकार का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल स्टाफ की भारी कमी झेल रहा है. 2003 में शीला सरकार के कार्यकाल में तकरीबन 153 करोड़ की लागत से बने इस हॉस्पिटल में लगभग 88 फीसदी स्टाफ की कमी है. इसका खामियाजा यहां आने वाले तीमारदारों को उठाना पड़ता है.

हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट शिल्पा भारद्वाज के मुताबिक हॉस्पिटल के में ओपीडी में रोजाना 1400 से 1500 मरीज इलाज करने के लिए आते हैं. स्टाफ की कमी है जिसको भरने की कवायद जारी है. जल्द ही इस कमी को पूरा किया जाएगा. हॉस्पिटल में इलाज कराने आए मरीजों को परेशानी ना हो इसके लिए दिल्ली सरकार ऑथोराइज्ड एजंसियों के जरिये नर्स और टेक्नीशियन से रोजाना सहायता ले रही है.  

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हाल ही में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन द्वारा अस्पताल में 200 नए बेड का उद्घाटन किया गया था, लेकिन इन बिस्तरों का उद्घाटन से क्या फायदा जब अस्पताल में मरीजों का इलाज करने के लिए पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ ही ना हों. अस्पताल की स्थिति का खुलासा आरटीआई के जरिए हुआ है.

आरटीआई के जरिए जो जानकारी हासिल हुई उसमें ये साफ जाहिर होता है हॉस्पिटल में स्टाफ की भारी कमी है. हालांकि दूसरी ओर हॉस्पिटल की डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉक्टर छवि गुप्ता के मुताबिक स्टाफ के साथ-साथ सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों की भी कमी है.

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