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दिल्ली-NCR में सुधरी आबोहवा, GRAP-3 खत्म... कंस्ट्रक्शन समेत इन चीजों से हटा बैन

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

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दिल्ली-एनसीआर से ग्रैप- 3 की पाबंदियां हटाई गईं (Photo- PTI)
दिल्ली-एनसीआर से ग्रैप- 3 की पाबंदियां हटाई गईं (Photo- PTI)

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर कम होता दिख रहा है. ऐसे में कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर से GRAP-3 (Graded Respone Action Plan-3) की पाबंदियां हटा दी हैं. CAQM के आदेश के मुताबिक, अब दिल्ली का मौसम ठीक है और यहां के AQI में भी सुधार हो रहा है.

CAQM को AQI रीडिंग में सुधार दिखा और इसी वजह से कमीशन ने GRAP-3 की पाबंदियों को हटाने का फैसला लिया है. ऐसे में अब लोगों को आवाजाही, कंस्ट्रक्शन से जुड़ी एक्टिविटीज़ और दूसरे कंट्रोल वाले कामों के लिए अस्थायी तौर पर राहत मिली है.

CAQM ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान का हवाला देते हुए बताया है कि आने वाले दिनों में दिल्ली-NCR में AQI 'एवरेज' से 'खराब' कैटेगरी में रहने की संभावना है. कमीशन ने अपने आदेश में कहा, 'इसलिए सब-कमेटी ने GRAP (21.11.2025 को संशोधित) के शेड्यूल के स्टेज-III ('गंभीर' वायु गुणवत्ता) के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए 16.01.2026 के अपने आदेशों को तुरंत रद्द करने का फैसला किया है.'

GRAP-3 कब लगाया जाता है?

जब हवा की क्वालिटी बहुत खराब हो जाती है, तब प्रदूषण कम करने के लिए GRAP-3 की पाबंदियां लगाई जाती हैं. 

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GRAP-3 के तहत लगाई जाने वाली पाबंदियां
 

  • गैर-जरूरी कंस्ट्रक्शन पर पाबंदी- धूल प्रदूषण को कम करने के लिए सभी गैर-जरूरी बिल्डिंग, मिट्टी के काम, तोड़फोड़ या धूल पैदा करने वाली सभी गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी जाती है.
  • कुछ गाड़ियों पर पाबंदी- BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारें (4-व्हीलर) और गैर-जरूरी डीजल से चलने वाले मीडियम मालवाहक गाड़ियां के चलने पर दिल्ली-एनसीआर में रोक लगाई दी जाती है. सिर्फ़ जरूरी सेवाओं और इमरजेंसी गाड़ियों को ही इजाजत दी जाती है.
  • स्कूल हाइब्रिड/ऑनलाइन मोड में शिफ्ट- स्कूलों में नर्सरी से 5वीं क्लास तक के बच्चों को हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और इन-पर्सन का मिक्स) में क्लास दी जाती है ताकि उन्हें खराब हवा से बचाया जा सके.

GRAP-2 कब लगाया जाता है?

जब हवा की क्वालिटी "बहुत खराब" कैटेगरी (AQI 301–400) में पहुंच जाती है, तब प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए GRAP-2 लागू किया जाता है.

GRAP-2 के तहत लगाई जाने वाली पाबंदियां

  • डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर बैन- बैकअप पावर सोर्स से होने वाले एमिशन को कम करने के लिए रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल इलाकों में डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाती है.
  • धूल कम करने और सड़कों की सफाई तेज- बड़ी सड़कों और हॉटस्पॉट पर मैकेनिकल या वैक्यूम स्वीपिंग और पानी का छिड़काव किया जाता है, ताकि धूल कम की जा सके.  धूल कंट्रोल करने के लिए अधिकारी कंस्ट्रक्शन/तोड़फोड़ वाली जगहों का इंस्पेक्शन भी करते हैं.
  • ट्रैफिक मैनेजमेंट-  पार्किंग फीस बढ़ा दी जाती है, भीड़भाड़ वाले चौराहों पर ज्यादा ट्रैफिक पुलिस तैनात की जातीऔर प्राइवेट गाड़ियों से होने वाले एमिशन को कम करने के लिए बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवाओं को बढ़ावा दिया जाता है.

GRAP 1 के तहत लगाई जाने वाली पाबंदियां

GRAP-1 तब लागू किया जाता है जब हवा की क्वालिटी खराब कैटेगरी (AQI 201–300) में चली जाती है. GRAP-1 की पाबंदियां GRAP-1 से मिलती-जुलती ही होती हैं. इसके तहत खाने-पीने की जगहों पर लकड़ी या कोयला जलाने से बचने का निर्देश भी दिया जाता है ताकि प्रदूषण ना फैले.

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