दिल्ली नगर निगम का बजट सदन से अभी पारित नही हुआ है. मेयर शैली ओबेरॉय ने विशेष बजट सभा 28 मार्च को बुलाई है. लेकिन इस बैठक के हंगामेदार होने के सारे आसार देखने को मिल रहे हैं. बजट के नियम और बजट में होने जा रहे कुछ बदलावों को लेकर अभी से विवाद होता दिख रहा है. दोनों आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है.
झगड़े की जड़ में अधिकारियों का बजट
दिल्ली म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट (DMC Act) 1957 के मुताबिक निगम के बजट की प्रक्रिया नवंबर महीने से ही शुरू हो जाती है. स्थायी समिति और क्षेत्रीय (वार्ड) समितियों की चर्चा के बाद बजट प्रस्तावों को निगम के सदन में चर्चा के लिए लाया जाता है. चूंकि नवंबर में निगम में चुनी हुई सरकार नहीं थी लिहाजा अधिकारियों ने अपने हिसाब से बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप भी दे दिया है. अब उसी कड़ी में बजट प्रस्तावों को मंगलवार 28 मार्च को चर्चा के लिए सदन में लाया जा रहा है.
आप-कांग्रेस का बजट पर एक सुर
सदन में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के पार्षद संदीप कपूर का दावा है कि बजट की बुकलेट में 1 प्रतिशत एजुकेशन सेस लगाया है. अप्रैल, मई जून में हाउस टैक्स समय से जमा करवाने पर 15 प्रतिशत की छूट को घटाकर 10 प्रतिशत किया गया है. वहीं साल 2021-2022 का खर्च 10190 करोड़ रुपए है, साल 2022-2023 में वो खर्च 15275 करोड़ प्रस्तावित है, लेकिन 5 हजार करोड़ की इनकम कहां से आएगी, इसका जिक्र नही है. और कांग्रेस का आरोप है कि अधिकारियों ने जो बजट तैयार किया है, उसमें निगम की आमदनी बढ़ाने के लिए करों का भार बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है. ऐसे में विपक्ष ने आम आदमी पार्टी को घेरने की तैयारी कर ली है.
निगम के बजट इतिहास में ये हो रहा है पहली बार
वैसे इस समय बजट को लेकर एक विवाद और चल रहा है. आरोप है कि 72 घंटे के नोटिस पर बजट निर्धारित-स्वीकृत करने की बैठक बुला ली गई. इस बारे में बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर का आरोप है कि नगर निगम के पार्षदों को मात्र 72 घंटे के नोटिस पर बजट निर्धारित-स्वीकृत करने की बैठक बुला ली. सत्ताधारी आम आदमी पार्टी विपक्ष को लिखित बजट संशोधन लाने का मौका ही नहीं देना चाहती.
इस आरोप पर आप के प्रवक्ता प्रेम चौहान का कहना है कि बीजेपी को ये नहीं पता है कि बजट अधिकारियों ने तैयार किया है. बीजेपी ने स्टैंडिग कमेटी बनने नहीं दी लेकिन नगर निगम एक्ट के तहत ही बजट प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सदन बुलाया गया है.
बदल दिया गया बजट का समय
आपको ये भी बताते चलें कि निगम के इतिहास में सदन बैठकें सुबह 10 बजे या फिर दोपहर 12 बजे से बुलाई जाती रही हैं. इन बैठकों के लिए कई दिन का शैड्यूल भी जारी किया जाता था. लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि बजट पर चर्चा के लिए केवल एक दिन की बैठक बुलाई गई है और वो भी दोपहर 2 बजे से.
वैसे दिल्ली नगर निगम की सबसे पावरफुल कमिटी स्टैंडिग कमेटी का गठन अभी तक नहीं हो पाया है, वहीं मौजूदा मेयर का कार्यकाल 31 मार्च 2023 को खत्म हो रहा है. एक्ट के मुताबिक निगम में पहले साल महिला मेयर, अगले साल जनरल कैंडीडेट निगम का मेयर बनता है.