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दिल्लीः बढ़ते प्रदूषण पर CPCB का एक्शन, हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर 2 जनवरी तक बंद

दिल्ली में प्रदूषण के मामले पर सीपीसीबी (CPCB) ने सख्त कदम उठाते हुए हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर पर प्रतिबंध (बैन) लगा दिया है. ये बैन दिल्ली समेत एनसीआर एरिया में 2 जनवरी तक प्रभावी रहेगा. 

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दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण (प्रतीकात्मक चित्र)
दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण (प्रतीकात्मक चित्र)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • CPCB ने हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर पर लगाया बैन
  • 2 जनवरी तक प्रभावी रहेगा बैन
  • दिल्ली में प्रदूषण से बिगड़ते हालातों के बीच CPCB का एक्शन

Delhi Pollution: देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के चलते लोगों का हवा में सांस लेना मुश्किल है. बीते दिन सीपीसीबी के एयर बुलेटिन के मुताबिक, दिल्ली का एक्यूआई (AQI) लेवल 418 तक पहुंच गया था. सुबह होते ही स्मॉग की चादर दिल्ली-एनसीआर को अपने आगोश में ले लेती है. ऐसे हालातों में दिल्ली में प्रदूषण के मामले पर सीपीसीबी (CPCB) ने सख्त कदम उठाते हुए हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर पर प्रतिबंध (बैन) लगा दिया है. ये बैन दिल्ली समेत एनसीआर एरिया में भी लगाया गया है, जो कि 2 जनवरी तक प्रभावी रहेगा. 

बता दें कि दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के मसले पर केंद्र और राज्य सरकारें लगातार बैठकें करती रही हैं, लेकिन प्रदूषण के स्तर में कोई खास कमी नहीं आई है. इस मुद्दे पर सियासत भी खूब देखने को मिली. इस बीच लांसेट प्लैनेटरी हेल्थ पत्रिका की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसके मुताबिक वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर दिल्ली पर ही पड़ा है. इसके बाद नंबर आता है हरियाणा का. प्रदूषण के चलते साल 2019 में दिल्ली में प्रति व्यक्ति आय में करीब 4,578 रुपये की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, हरियाणा को प्रति व्यक्ति आय के रूप में करीब 3,973 रुपये का नुकसान हुआ.

ऐसे में प्रदूषण की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाए जाने कि जरूरत बताई गई, जिसके बाद आज CPCB ने दिल्ली-एनसीआर में हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर पर 2 जनवरी 2021 तक के लिए बैन लगा दिया है. हालांकि, इससे कितना प्रदूषण कम होगा, ये आने वाला वक्त ही बताएगा.  

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मालूम हो कि स्विस एयर क्वालिटी टेक्नोलॉजी कंपनी के मुताबिक भारत के तीन बड़े शहर, दिल्ली, कोलकाता और मुंबई, दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हैं. जो कि एक चिंताजनक बात है. उधर, सरकार का कहना है कि भारत को 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रमों में और अधिक निवेश करने की आवश्यकता होगी.

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