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Exclusive: दिल्ली के लिए सबसे साफ रहा साल 2025? RTI डेटा से सरकार के दावों पर उठे सवाल

दिल्ली में 2025 का प्रदूषण स्तर अभी भी सुरक्षित सीमा से ऊपर है. हालांकि सरकार ने इसे आठ सालों में सबसे स्वच्छ साल बताया था. RTI के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले सालों में भी ऐसे सुधार दर्ज हुए हैं और सरकार ने बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए हैं.

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दिल्ली के लिए 2025 सबसे साफ साल नहीं था. (File Photo: PTI)
दिल्ली के लिए 2025 सबसे साफ साल नहीं था. (File Photo: PTI)

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अभी भी सुरक्षित सीमा से ऊपर है. राजधानी को लेकर सरकार के दावे और RTI के आंकड़े मेल नहीं खाते.  सरकार का दावा था कि साल 2025 दिल्ली के लिए 'सबसे स्वच्छ साल' रहा है, लेकिन इसका कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है.

दिल्ली सरकार ने दावा किया था कि राजधानी में 2025 में आठ सालों में सबसे स्वच्छ हवा दर्ज की गई. लेकिन दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) से इंडिया टुडे के एक आरटीआई के जवाब ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

1 जनवरी, 2026 को पीटीआई ने रिपोर्ट दी कि दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि राजधानी में आठ सालों में सबसे अच्छी वायु गुणवत्ता देखी गई. उन्होंने लगभग 200 दिनों तक एक्यूआई (AQI) 200 से नीचे रहने का हवाला दिया और इसे हाल के सालों की तुलना में 15 प्रतिशत का सुधार बताया.

सरकार का दावा क्या था?

सरकार ने गंभीर प्रदूषण वाले दिनों में कमी की ओर भी इशारा किया और PM2.5 और PM10 के स्तर में गिरावट का दावा किया. दिल्ली सरकार के बयान के मुताबिक, 2025 के इन 200 दिनों में से 79 दिन 'अच्छी' (Good) और 'संतोषजनक' (Satisfactory) श्रेणी में थे. इसमें कहा गया कि जनवरी से नवंबर तक का औसत एक्यूआई 187 रहा, जो कोविड प्रभावित वर्ष 2020 को छोड़कर, आठ सालों में सबसे बेहतर है.

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 0 से 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 से 100 को 'संतोषजनक', 101 से 200 को 'मध्यम', 201 से 300 को 'खराब', 301 से 400 को 'बहुत खराब' और 401 से 500 को 'गंभीर' श्रेणी में वर्गीकृत करता है. हालांकि, इंडिया टुडे का आरटीआई डेटा इस मामले की बहुत बारीक तस्वीर पेश करता है.

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RTI डेटा में खुलासा 

दिल्ली ने 2025 में 200 से नीचे एक्यूआई वाले 200 दिन जरूर दर्ज किए, लेकिन ये पहली बार नहीं है. 2020, 2023 और 2024 जैसे पिछले सालों में ऐसे दिनों की संख्या और भी ज्यादा दर्ज की गई थी, जो ये दिखाता है कि 2025 सबसे स्वच्छ साल के रूप में अलग नहीं दिखता है. आरटीआई डेटा में 2025 के लिए अच्छी, संतोषजनक, मध्यम, खराब, बहुत खराब और गंभीर जैसी श्रेणियों का जिक्र भी नहीं है.

कण प्रदूषण पर, आरटीआई प्रतिक्रिया 2025 के लिए PM2.5 के स्तर को 104 बताती है, जो सिर्फ मामूली सुधार का संकेत देता है और अभी भी सुरक्षित सीमा से बहुत ऊपर है. ये सरकार के सार्वजनिक दावे कि स्तर घटकर 96 हो गया है, उसके उलट है.

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PM10 के स्तर में भी इसी तरह का पैटर्न सामने आता है. आरटीआई डेटा 2025 में PM10 को 213 पर दर्ज करता है, जो सीमित सुधार दिखाता है और फिर से सरकार के कम आंकड़े वाले दावे से अलग है. ये अंतर सवाल उठाते हैं कि वायु गुणवत्ता में सुधार की गणना कैसे की जा रही है और उन्हें कैसे पेश किया जा रहा है.

सरकार ने इन सुधारों का क्रेडिट कई चीजों को दिया है, जिनमें धूल नियंत्रण के कड़े उपाय- मशीनीकृत सफाई और एंटी-स्मॉग गन, निर्माण स्थलों पर कंट्रोल और औद्योगिक प्रदूषण को रोकने जैसे सुधार के कदम शामिल हैं.

फिर भी, जब 2025 को आठ सालों में सबसे स्वच्छ हवा वाला साल बताने वाले दावे के समर्थन में दस्तावेज मांगे गए, तो DPCC ने कहा कि ये सवाल उसकी 'एयर लैब' से जुड़ा नहीं है और इस दावे की पुष्टि के लिए कोई आधिकारिक दस्तावेज मुहैया नहीं कराया.

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2025 को 'सबसे स्वच्छ साल' कहना पूरी तरह सही नहीं

कुल मिलाकर, आरटीआई से मिले आंकड़े किसी बड़े रिकॉर्ड की ओर इशारा नहीं करते. इनसे बस ये पता चलता है कि प्रदूषण कम करने की दिशा में धीरे-धीरे और रुक-रुक कर थोड़ा सुधार हो रहा है. भले ही कुछ जगहों पर स्थिति पहले से बेहतर हुई हो, लेकिन दिल्ली में प्रदूषण अब भी काफी ज्यादा है. इसलिए, साल 2025 को 'सबसे स्वच्छ साल' कहना पूरी तरह सही नहीं लगता और ये दावा बढ़ा-चढ़ाकर किया गया नजर आता है.

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