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'उनसे न्याय की उम्मीद नहीं...', जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में पेश नहीं होने के फैसले पर बोले केजरीवाल

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होने, सत्याग्रह का ऐलान किया है. उन्होंने अब अपने इस फैसले के पीछे की वजह भी बताई है.

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जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा और अरविंद केजरीवाल. (Photo: ITG)
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा और अरविंद केजरीवाल. (Photo: ITG)

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया है कि वह या उनके वकील जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होंगे. उन्होंने इसे लेकर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को चार पन्ने का पत्र भी लिखा है. अरविंद केजरीवाल सोमवार को इस मुद्दे पर सामने आए और सोशल मीडिया पर लाइव के जरिये अपनी बात विस्तार से रखी.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट का मुद्दा है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं. उन्होंने कहा है कि भारत सरकार के पैनल में 700 से ज्यादा वकील हैं, लेकिन सबसे ज्यादा केस जिन वकीलों को उनमें जस्टिस शर्मा के बच्चे शामिल हैं. केजरीवाल ने कहा कि तुषार मेहता सरकारी वकीलों को केस आवंटित करते हैं, देते हैं.

उन्होंने कहा है कि ऐसे में जब जस्टिस शर्मा के बच्चों को केस देने वाला व्यक्ति ही जब सरकार की ओर से उनके सामने खड़ा होगा, क्या वह मुझे न्याय दे पाएंगी. केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से मेरा कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है. उन्होंने कहा कि मेरे लिए आसान रास्ता था कि एक बड़ा वकील रखूं और अपना मुकदमा लड़ूं. लेकिन मैंने अंतरात्मा की आवाज सुनी.

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केजरीवाल ने महात्मा गांधी की राह पर चलकर सत्याग्रह का ऐलान करते हुए कहा कि जस्टिस शर्मा की कोर्ट के फैसले को लेकर सभी कानूनी रास्ते, सभी कानूनी अधिकार सुरक्षित रखता हूं. उन्होंने कहा कि मुझसे या आम आदमी पार्टी से जुड़ा कोई भी केस अगर भविष्य में जस्टिस शर्मा की कोर्ट में जाता है और उसमें तुषार मेहता, केंद्र सरकार और बीजेपी पार्टी नहीं रहे, तो हम उनकी कोर्ट में भी अपना केस मजबूती से लड़ेंगे.

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने साथ ही यह भी जोड़ा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा और भारतीय न्यायपालिका का पूरा सम्मान करता हूं. उन्होंने कहा कि मुझे जब झूठे केस में फंसाया गया, तब न्यायपालिका ने ही मुझे न्याय दिया. केजरीवाल ने कहा कि न्यायपालिका के प्रति आम जनता की धारणा और मजबूत हो, इसके लिए ही यह फैसला लिया है.

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