
देश की राजधानी नई दिल्ली के सबसे पॉश और सुरक्षित माने जाने वाले जयपुर पोलो ग्राउंड और रेस कोर्स इलाके के आस-पास स्थित 'बीआर कैंप' झुग्गियों में रहने वाले सैकड़ों लोग इन दिनों अपने आशियाने को खोने के गहरे डर में जी रहे हैं. प्रशासनिक अधिकारियों ने इस झुग्गी बस्ती के ढांचों को चिह्नित करने के बाद उन्हें गिराने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल है.
एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने कहा कि वे हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए यह कार्रवाई कर रहे हैं. 700 से ज्यादा परिवारों वाली इस झुग्गी बस्ती के लोगों ने 11 मई के सिंगल जज के आदेश के खिलाफ अपील की थी.
उन्होंने बताया कि उन्हें लगभग 45 किमी दूर सावदा घेवरा में बसाने से उनकी आजीविका छिन जाएगी, क्योंकि उनमें से ज्यादातर लोग अभी प्रधानमंत्री आवास के पास, यानी अपने मौजूदा कैंप के पास ही मजदूरी या छोटे-मोटे काम करते हैं.
गुरुवार को हुई तोड़-फोड़ की कार्रवाई से बस्ती में रह रहे परिवारों में चिंता फैल गई. इनमें से कई परिवारों ने घर तोड़े जाने की आशंका में अपने घरों से दरवाजे, खिड़कियां, टीन की चादरें और अन्य सामान हटाना शुरू कर दिया है.
निवासी शान खान ने कहा, "हम यहां अंग्रेजों के जमाने से रह रहे हैं, और अब अधिकारी हमसे जगह खाली करने के लिए कह रहे हैं. हमारे परिवार पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हैं. लोग यहीं पैदा हुए और यहीं मरे."
उन्होंने कहा, "कई परिवार पहले ही जा चुके हैं. यह देखने के लिए घरों के ताले तोड़े जा रहे हैं कि कहीं कोई अंदर तो नहीं है. घर खाली मिलने पर ढांचों को गिरा दिया जाता है."

खान ने दावा किया कि लगभग 300 परिवार पहले ही सावदा घेवरा जा चुके हैं, और केवल वे परिवार कैंप में रह रहे हैं जो कोर्ट में याचिका दायर करने में शामिल हैं.
निवासियों ने कहा कि बेदखली का यह अभियान उन्हें दूसरी जगह बसाने की प्रक्रिया का हिस्सा है; वे मार्च से ही कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं.