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एक नक्सल लीडर झारखंड में छिपा, दूसरा फरार, कई के सरेंडर... बस आखिरी चोट बाकी

सुरक्षा बलों के कड़े प्रहार से नक्सलियों की कमर टूट चुकी है. नक्सल आंदोलन का चेहरा माने जाने वाले गणपति के बारे में नेपाल में भागने  की खबर है. उसका करीबी सहयोगी मिशिर झारखंड में छिपा बताया जा रहा है. कई नक्सली लीडर एनकाउंटर में ढेर किए जा चुके हैं.

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छत्तीसगढ़ में लगातार चल रहा नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन. (Photo: Chandradeep Kumar/ITG)
छत्तीसगढ़ में लगातार चल रहा नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन. (Photo: Chandradeep Kumar/ITG)

छत्तीसगढ़ में बस्तर के घने जंगलों से इस समय जो खबरें सामने आ रही हैं, वे नक्सल आंदोलन के इतिहास में निर्णायक मोड़ का संकेत दे रही हैं. वर्षों तक सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने शीर्ष नक्सली नेताओं का नेटवर्क अब तेजी से कमजोर पड़ता दिख रहा है. ताजा घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगठन के भीतर दबाव बढ़ चुका है और नेतृत्व स्तर पर अस्थिरता साफ दिखाई दे रही है.

सूत्रों के अनुसार, नक्सल आंदोलन का बड़ा चेहरा माने जाने वाले गणपति के बारे में देश छोड़कर नेपाल में भागने  की ख़बर है, जबकि उसका करीबी सहयोगी मिशिर झारखंड में छिपा हुआ बताया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन दोनों तक पहुंच बनते ही नक्सल संगठन के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा झटका लगेगा. इसी दिशा में केंद्रीय और राज्य स्तर की एजेंसियां समन्वित रणनीति के साथ लगातार अभियान चला रही हैं.

इसी बीच बस्तर से एक और बड़ी खबर सामने आई है. लंबे समय से सक्रिय और प्रभावशाली नक्सली कमांडर पापा राव बुधवार को अपने 18 साथियों के साथ सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर रहा है. यह घटनाक्रम केवल औपचारिक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि नक्सल आंदोलन के कमजोर पड़ते मनोबल का स्पष्ट संकेत है. वर्षों तक संगठन में सक्रिय रहे पापा राव पर कई गंभीर मामलों में संलिप्तता रही और वह सुरक्षाबलों की वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था.

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सुरक्षा बलों की रणनीति में बदलाव
पिछले कुछ वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अब केवल मुठभेड़ों पर निर्भर रहने के बजाय खुफिया तंत्र को मजबूत किया गया. स्थानीय लोगों के साथ विश्वास का रिश्ता बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसका परिणाम यह हुआ कि संगठन के भीतर दरारें उभरने लगी हैं. कई नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हाल के समय में सैकड़ों नक्सली मारे गए हैं. हजारों ने आत्मसमर्पण किया और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां भी हुई हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि नक्सल संगठन की ताकत लगातार घट रही है. अब स्थिति यह है कि शीर्ष स्तर के नेता भी खुद को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं.

एक समय था जब दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिले नक्सल गतिविधियों के गढ़ माने जाते थे. अब इन क्षेत्रों में विकास कार्यों ने नई तस्वीर पेश की है. सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ने से स्थानीय युवाओं का रुझान हिंसा से हटकर मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है.

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट?
विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के पीछे दो मुख्य कारण हैं- सुरक्षाबलों की सटीक और निरंतर कार्रवाई, सरकार की पुनर्वास और विकास आधारित नीतियां. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को नई शुरुआत का अवसर देने की पहल ने भी इस दिशा में सकारात्मक प्रभाव डाला है.

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हालांकि, यह भी सच है कि नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. अभी भी कुछ दूरदराज के इलाकों में इसकी उपस्थिति बनी हुई है. लेकिन जिस तरह से शीर्ष नेतृत्व बिखर रहा है और कैडर टूट रहा है, उससे यह संकेत स्पष्ट है कि संगठन अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है.

सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इस मौके को निर्णायक सफलता में बदला जाए. इसके लिए खुफिया तंत्र को और मजबूत करना, स्थानीय जनता का विश्वास बनाए रखना और विकास कार्यों की गति को लगातार बनाए रखना आवश्यक होगा.

बस्तर से लेकर झारखंड तक के हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है. यदि इसी तरह प्रयास जारी रहे, तो निकट भविष्य में इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है.

फिलहाल, पापा राव का आज अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण और गणपति-मिशिर जैसे शीर्ष नेताओं की तलाश ने पूरे नक्सल नेटवर्क में हलचल मचा दी है. आने वाले दिन इस संघर्ष की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित होंगे.

नक्सल नेतृत्व तेजी से खत्म
देश में चल रहे नक्सल विरोधी ऑपरेशन के चलते अब नक्सली संगठन का टॉप नेतृत्व तेजी से खत्म हो रहा है. सुरक्षा एजेंसियों के ऑपरेशन में कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए हैं. कई बड़े नेता सरेंडर भी कर चुके हैं. स्थिति यह है कि अब कई इलाकों में नक्सलियों के बड़े नेता ही नहीं बचे हैं.

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सुरक्षा बलों की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के 11 सदस्य मारे गए, जो संगठन के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं. यह नक्सल संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है.

ये टॉप नक्सली कमांडर ढेर
सुरक्षा बलों की  रिपोर्ट के अनुसार जिन बड़े नक्सली नेताओं को ऑपरेशन में मारा गया, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
सुधाकर
हिडमा
दामोदर
विकास
सुदर्शन
अनिल
रवि
मोहन
रमेश
शंकर
अन्य सेंट्रल कमेटी सदस्य
(इनमें कई सेंट्रल कमेटी और स्टेट कमेटी स्तर के नेता शामिल थे)

गिरफ्तार और सरेंडर रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक 463 नक्सली मारे गए हैं. 1600 गिरफ्तार किए जा चुके हैं और करीब 2500 ने सरेंडर किया है. ये आंकड़े बताते हैं कि संगठन कमजोर हो रहा है.

बड़े नक्सलियों का सरेंडर
2025-26 में कई बड़े नक्सली नेताओं ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें प्रमुख हैं- पापा राव आज 18 नक्सलियों के साथ  सरेंडर कर रहा (बड़ा नक्सली कमांडर) है. इसके अलावा, कई स्टेट कमेटी, एरिया कमेटी और डिविजनल कमांडर स्तर के नक्सली सरेंडर कर चुके हैं. इनमें  टॉप 5 बड़े नक्सली नेता शामिल हैं.

सुरक्षा बलों की रिपोर्ट के अनुसार, दंतेवाड़ा और नारायणपुर में अब बड़े नक्सली लीडर नहीं बचे. कांकेर-बीजापुर में भी कई एरिया कमेटी खत्म किए जा चुके हैं. बड़े नेता नेपाल और झारखंड भाग रहे हैं. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जल्द ही नक्सल नेतृत्व पूरी तरह खत्म हो जाएगा. इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 31 मार्च 2026 तक की गई है, जिसका मात्र 6 दिन बचा हुआ है.

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