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बिहार: RCP सिंह का इस्तीफा और PM मोदी का ट्वीट, क्या है सियासी इशारा, जानिए

पूर्व इस्पात मंत्री एंव पूर्व राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है. आरसीपी ने अपना राजनीतिक सफर बिहार में जदयू से शुरू किया.

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आरसीपी सिंह फाइल फोटो आरसीपी सिंह फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आरसीपी की विदाई के बाद ललन की जगह पक्की!
  • आरसीपी सिंह का केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा 

क्या से क्या हो गये देखते-देखते. जी हां, ये फिल्मी गाना बिहार की राजनीति के कभी महारथी माने जाने वाले रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और पूर्व इस्पात मंत्री एंव पूर्व राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह पर बिल्कुल सटीक बैठता है. बिहार के सियासी पावर सेंटर के करीब रहकर नौकरी से निकलने के बाद सीधे कैबिनेट मंत्री के मुकाम पर पहुंचने वाले आरसीपी ने अपना राजनीतिक सफर बिहार में जदयू से शुरू किया.

नीतीश कुमार के काफी करीबी बने. एक वक्त ऐसा था कि नीतीश कुमार के हर फैसले में आरसीपी के सियासी सलाह की बू आती थी. करीबी ऐसे कि बिहार सरकार के हर फैसले में उनकी सलाह ली जाती थी. देखिए सियासत कैसे दिन दिखाता है, ठीक आरसीपी सिंह के जन्मदिन यानी 6 जुलाई को उनकी कैबिनेट से विदाई हो गई.

आरसीपी सिंह का केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा 
नियमानुसार उनका कार्यकाल 7 जुलाई को खत्म हो रहा है. इससे पूर्व उन्होंने केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. 6 जुलाई 1958 को जन्मे आरसीपी सिंह का आज जन्मदिन भी था. आरसीपी सिंह के जन्मदिन पर पीएम मोदी ने ट्वीटर पर एक पोस्ट लिखकर उनके स्वस्थ्य जीवन की शुभकामनाएं दीं.

जवाब में आरसीपी सिंह ने दोपहर 2.07 बजे पीएम मोदी का आभार जताते हुए लिखा कि 'श्रद्धेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का सहृदय धन्यवाद. आपकी शुभकामनाओं के साथ राष्ट्रधर्म का अनुपालन करते हुए राष्ट्र सेवा सतत जारी रहेगी. इस ट्वीट के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरसीपी की सियासी यात्रा को बीजेपी के रूप में नया पड़ाव मिलेगा.

नीतीश और आरसीपी के बीच सियासी शीतयुद्ध वाली लकीर
बिहार के सियासी गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव का टिकट कटने के बाद नीतीश और आरसीपी के बीच सियासी शीतयुद्ध वाली लकीर खींच चुकी है. जदयू के नेताओं से उनके संबंधों में तल्खी आ चुकी है. आरसीपी बिल्कुल अलग राह पर हैं, इसलिए उन्होंने कहा था कि वो किसी के हनुमान नहीं हैं. बल्कि खुद रामचंद्र हैं. यहां तक कि उन्होंने नीतीश कुमार का नाम लेने से भी गुरेज किया था. 

हालांकि आरसीपी समर्थक दबी जुबान में कहते हैं कि इस खटास की शुरुआत आरसीपी के केंद्रीय मंत्री बनने के साथ ही शुरू हो गई थी. उस वक्त मंत्री नहीं  बने ललन सिंह ने आरसीपी के राजनीतिक जड़ में सियासी मट्ठा डालना शुरू किया. और तबतक डाला जबतक वो पूरी तरह सूख नहीं गए.

आरसीपी की विदाई के बाद ललन की जगह पक्की!
इधर, ये भी चर्चा जोरों पर है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए कैंडिडेट द्रौपदी मुर्मू के नामांकन के दौरान पीएम नोदी ने नाम लेकर ललन सिंह को आगे बुलाया था और पहली लाइन में अपने पास खड़ा किया था. कहा जा रहा है कि आरसीपी की विदाई के बाद ललन की जगह पक्की है. ललन का  कैबिनेट मंत्री बनना तय है.

ललन बिहार पावर सेंटर को भी साध चुके हैं. आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू बगैर सरकार में शामिल हुए मोदी सरकार को बाहर से समर्थन देगी या फिर से सरकार में शामिल होकर मंत्री पद लेगी, अतीत की बात है.
 

 

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