बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शुक्रवार को पटना के होटल मौर्य में आयोजित नेशनल स्मार्ट सिटी कॉन्क्लेव-2018 का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी में बच्चों के खेलने के लिए खेल का मैदान, पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ, साइकिल ट्रैक, इलेक्ट्रॉनिक- बायो मेडिकल कचरा प्रबंधन और आईटी आधारित समन्वित यातायात का प्रबंधन होना चाहिए.
सुशील मोदी ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए चार शहरों पटना, मुज़फ़्फ़रपुर, भागलपुर और बिहार शरीफ में अगले 5 साल में 1-1 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसके अलावा विभिन्न विभागों की अनेक योजनाओं के जरिए भी काफी राशि खर्च की जाएगी. नमामि गंगे परियोजना के तहत पटना में सीवरेज लाइन और ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना पर केंद्र सरकार 3 हज़ार करोड़ रुपये खर्च कर रही है. उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी बनाने में राशि की कोई समस्या नहीं है. दुनिया की आधुनिक तकनीक को अपनाकर और देश के अन्य स्मार्ट सिटी घोषित शहरों में जो बेहतर हो रहा है, उसका अनुकरण कर योजनाएं बनाने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि विकास का पैमाना शहरीकरण भी है. देश के जो राज्य जितना विकसित हैं, वहां शहरीकरण की दर उतनी ही अधिक है. तमिलनाडु में शहरीकरण का प्रतिशत 48, केरल में 42 और बिहार में 11 है. 2011 में देश का शहरीकरण 31.06 , जबकि 1901 में मात्र 11 प्रतिशत था. उन्होंने कहा कि 2030 तक देश में 40.76 प्रतिशत का अनुमान है. स्मार्ट सिटी की अवधारणा के मूल में शहरों को रहने लायक कैसे बेहतर बनाया जाए.
उन्होंने कहा कि पीने के लिए शुद्ध जल, सीवरेज की व्यवस्था, सभी तरह के कचरों का प्रबंधन, आईटी आधारित यातायात व्यवस्था, शहरों में व्यापक पैमाने पर प्लांटेशन करके ही किसी शहर को बेहतर बनाया जा सकता है.