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अर्थात

अर्थात्

अर्थातः घुटती सांसों का ‘उत्सव’

17 अप्रैल 2021

दवा, ऑक्सीजन, बेड के लिए तड़पते लोगों को देखिए, दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता का यह बदनुमा चेहरा हमें बुरी तरह परेशान कर रहा है.

अर्थात‍्

अर्थातः भरम गति टारे नहीं टरी

12 अप्रैल 2021

सरकारों ने लॉकडाउन लगाने और उठाने को कोविड संक्रमण घटने-बढऩे से जोड़ दिया जबकि प्रत्यक्ष रूप से लॉकडाउन लगने से कोविड संक्रमण थमने का कोई ठोस रिश्ता आज तक तय नहीं हो पाया.

अर्थात्

अर्थातः लौट के फिर न आए ...

05 अप्रैल 2021

बेरोजगारी राष्ट्रीय शर्म है लेकिन भारत में यह शर्म केवल बेरोजगारों को आती है, सरकारों को नहीं.

अर्थात्

अर्थातः कानूनों की अराजकता !

27 मार्च 2021

भारत में कानून इस तरह गढ़े जाते हैं कि जैसे बनाने वालों ने भविष्य देख रखा है. नीति बनाने वाले कभी यह मानते नहीं कि भविष्य अनि‍श्चित है.

अर्थात्

अर्थातः सबसे बड़ा उलट-फेर

19 मार्च 2021

जीएसटी में नुक्सान की भरपाई पर केंद्र के इनकार के बाद अगले साल राज्यों को 2.2 लाख करोड़ रु. अति‍रिक्त कर्ज उठाने होंगे.

अर्थात‍्

अर्थातः बचाएंगे तो गंवाएंगे !

12 मार्च 2021

मंदी का दबाव है इसलिए बैंकों को सरकार के साथ और कंपनियों को भी सस्ता कर्ज देना है, नतीजतन बचत के ब्याज पर छुरी चल रही है.

अर्थात्

अर्थातः चमत्कारी राहत

08 मार्च 2021

भारत के जीडीपी में गिरावट की अनुपात में लोगों की खर्च योग्य आय में गिरावट कहीं ज्यादा रही है. अब इसके बाद कमाई खा जाने वाली महंगाई आ धमकी है.

अर्थात‍्

अर्थातः ... मगर हकीकत है

26 फरवरी 2021

मंदी से निकलने के जद्दोजहद के बीच जीडीपी को लेकर जब कई भ्रम टूट ही रहे हैं तो भारत में इसकी पैमाइश के तौर तरीकों पर भी नए सिरे से विचार करने की जरूरत है.

अर्थात्

अर्थातः महंगाई की कमाई

19 फरवरी 2021

सरकारों की प्रत्यक्ष नीतियों से निकलने वाली महंगाई, जो सिद्धांतों का हिस्सा थीं, वह भारत में हकीकत बन गई है.

अर्थात्

अर्थातः गुम राह की तलाश

13 फरवरी 2021

नवंबर 2018 में नीति आयोग ने न्यू इंडिया @75 नाम का दस्तावेज बनाया था, जिसकी भूमिका स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखी थी.

अर्थात‍्

अर्थातः आखिरी रास्ता

07 फरवरी 2021

गौर करिए कि इतने भारी संसाधन पचाने के बावजूद बजट हमारी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं लाता. अर्थव्यवस्था में कुल पूंजी निवेश की पांच फीसद जरूरत भी सरकार पूरी नहीं कर पाती.