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अर्थात

अर्थातः बूझो तो जाने

अर्थात‍ः बूझो तो जानें !

17 अक्टूबर 2020

दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में पैकेज का असर दिख रहा है लेकिन भारत में ऐसा क्यों नहीं हो रहा है?

अर्थातः डूबने से पहले

अर्थातः डूबने से पहले

10 अक्टूबर 2020

जीएसटी आपदा में अवसर है. इसका चोला बदलकर ही इसे डूबने से बचाया जा सकता है

अर्थातः राहत ऐसी होती है

अर्थात‍ः राहत ऐसी होती है !

03 अक्टूबर 2020

वास्तवि‍कता से कोसों दूर खड़ी सरकार बेकारी और महामंदी से परेशान लोगों को कर्ज लेने की राह दिखा रही है या कि भूखों को विटामिन खाने की सलाह दी जा रही है. सबको मालूम है, मांग केवल खपत से आएगी और हर महीने जब बेकारों की तादाद बढ़ रही हो तो कारोबार में नया निवेश कौन करेगा.

अर्थातः आबादी का अर्ध सत्य

अर्थातः आबादी का अर्ध सत्य

26 सितंबर 2020

आबादी बढ़ने का स्यापा कहीं वही लोग तो नहीं कर रहे जो इसे सबसे बड़ी ताकत या संभावनाओं का खजाना बता रहे थे

अर्थातः मगर हकीकत है

अर्थातः ...न मानो मगर हकीकत है

19 सितंबर 2020

90 फीसद किसान खेती के बाहर अतिरिक्त दैनिक कमाई पर निर्भर हैं. ग्रामीण आय में खेती का हिस्सा केवल 39 फीसद है जबकि 60 फीसद आय गैर कृषि कामों से आती है.

अर्थात

अर्थातः ईमानदार टैक्सपेयर की डायरी

12 सितंबर 2020

टैक्स के बोझ से लदा आम करदाता भारत का नया निम्न वर्ग है

जीडीपी की इस गिरावट के भीतर क्या छिपा है और इससे उबरने की संभावना कब तक है

अर्थातः पैरों तले ज़मीन है या आसमान है

05 सितंबर 2020

जीडीपी की इस गिरावट के भीतर क्या छिपा है और इससे उबरने की संभावना कब तक है

अर्थात्

अर्थातः ये रिश्ता क्या कहलाता है

01 सितंबर 2020

फेसबुक ने व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम को निगल कर कैसे कंपी‌टिशन खत्म किया, इसका खुलासा अब हो रहा है.

अर्थात‍्

जिया पढ़ने को चाहे

27 अगस्त 2020

भारत में टैक्स भरपूर हैं लेकिन बड़े देशों की पांत में हम अकेले होंगे, जहां शिक्षा के नाम पर अलग से टैक्स (सेस) वसूला जाता है जो इनकम और खपत पर लगने टैक्स के ऊपर लगता है यानी टैक्स पर टैक्स.

असली सवाल तो शिक्षा की लागत, टैक्स और कीमत के हैं जिन पर उसकी गुणवत्ता टिकी है.

अर्थात्: जिया पढ़ने को चाहे

24 अगस्त 2020

विडंबना देखिए कि पढ़ाई बेहतर करने के लिए लोग सरकार को टैक्स देते हैं और बच्चों को महंगी फीस पर निजी स्कूल में पढ़ाते हैं.

बैंकों की कमजोर काया बुरी तरह कांप रही है

अर्थात्ः आने वाला कोई तूफान है !

15 अगस्त 2020

नियामक, बैंकर और सुर्खियों के सरकारी महारथियों ने भारतीय बैंकों को अंधी सुरंग में फंसा दिया है.