पोस्टपार्टम डिप्रेशन महिलाओं में बच्चे के जन्म के बाद होने वाली एक मेंटल हेल्थ प्रोब्लम है. दरअसल बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में कई तरह के बदलाव आते हैं, जिससे उनके अंदर डिप्रेशन या गंभीर उदासी पैदा होने लगती है. आज के समय में पोस्टपार्टम डिप्रेशन के केस तेजी से बढ़ रहे हैं.
इस मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या में महिला की सोचने, महसूस करने और कार्य करने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. गर्भावस्था के बाद महिलाओं के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिसकी वजह से वे पोस्टपार्टम डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं. अपर्याप्त आहार, नींद में कमी और थायरॉइड हार्मोन का लेवल कम होने के कारण भी महिलाओं में पोस्टपार्टम डिप्रेशन होता है.
पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण
1. चिड़चिड़ापन और ज्यादा गुस्सा करना या फिर जरूरत से ज्यादा मूडी होना.
2. किसी भी काम पर फोकस ना कर पाना और उसमें मन ना लगना.
3. शरीर में लगातार दर्द होना और आराम करने के बाद भी थकान महसूस करना.
4. जरूरत से ज्यादा भूख लगना या फिर बहुत कम भूख लगना.
5. गर्भावस्था के बाद लगातार वजन बढ़ना और अपने शरीर को कंट्रोल में ना रख पाना.
6. बेवजह रोने का मन करना और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से दूरियां बना लेना.
7. अपने बच्चे की जरूरत से ज्यादा चिंता करना या फिर उस पर बिल्कुल भी ध्यान ना देना.
पोस्टपार्टम डिप्रेशन से ऐसे करें बचाव
1. पोस्टपार्टम डिप्रेशन होने पर रोजाना 10 मिनट एक्सरसाइज करें, लेकिन भारी व्यायाम ना करें. वर्कआउट के तौर पर आप पैदल भी चल सकती हैं.
2. प्रसव के बाद पोषण युक्त खाना खाएं क्योंकि हेल्दी खाना पोस्टपार्टम डिप्रेशन को दूर करने में मदद करता है.
3. बच्चे की देखभाल के साथ खुद के लिए भी थोड़ा समय निकालें. आप मेडिटेशन कर सकती हैं या फिर अपनी पसंद की कोई फिल्म देखें. ऐसा करने से आपको अच्छा महसूस होगा.
4. डिलीवरी के बाद अक्सर महिलाएं पूरी नींद नहीं लेती, जो पोस्टपार्टम डिप्रेशन का प्रमुख कारण है. इसलिए जब बच्चा सो जाए तो आप भी सोने की कोशिश करें.
5. अकेलापन भी पोस्टपार्टम डिप्रेशन का एक मुख्य कारण होता है. इसलिए प्रसव के बाद अपने परिवार के साथ रहने का प्रयास करें.