scorecardresearch
 

2050 तक 'आलसी' हो जाएंगे भारतीय! गर्मी से बढ़ेगा हार्ट अटैक-डायबिटीज का जोखिम

लैंसेट की नई स्टडी चेतावनी दे रही है कि बढ़ती गर्मी भारतीयों को घरों में कैद कर देगी, जिससे 2050 तक बीमारियों और मौतों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा. ये पूरी स्टडी क्या कहती है, इस बारे में जानेंगे.

Advertisement
X
क्लाइमेट चैंज का सीधा असर इंसानों की सेहत पर पड़ेगा. (Photo: ITG)
क्लाइमेट चैंज का सीधा असर इंसानों की सेहत पर पड़ेगा. (Photo: ITG)

आपने नोटिस किया होगा जब हम छोटे हुआ करते थे, तब इतनी गर्मी नहीं पड़ती थी जितनी आज पड़ती है. पहले के समय में हर मौसम लगभग 4 महीने का होता था. लेकिन आज के समय में 12 महीने में अधिकतर महीने में गर्मी महसूस की जाती है. ऐसे में दुनियाभर में पैर पसारता जलवायु परिवर्तन अब सीधे आपकी सेहत और रोजमर्रा की फिजिकल एक्टिविटी पर असर डाल रहा है. 

हाल ही में 'द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ' जर्नल में पब्लिश हुई स्टडी में बताया गया है कि 2050 तक लगातार तापमान बढ़ने से करोड़ों लोग फिजिकली रूप से एक्टिव नहीं रहेंगे. वहीं ये स्थिति भारत जैसे गर्म देशों के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकती है क्योंकि यहां गर्मी का असर ग्लोबल एवरेज से कहीं अधिक होने का अनुमान है.

क्या कहती है लैंसेट की रिपोर्ट?

लैंसेट रिपोर्ट में 156 देशों के डेटा का एनालेसिस किया गया जिसमें बताया गया है कि यदि किसी महीने का औसत तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है तो लोगों की फिजिकल एक्टिविटी में गिरावट आने लगती है.

भारत में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है. अनुमान है कि 2050 तक भारत में फिजिकल एनेक्टिविटी में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी. इसका मतलब है कि लोग गर्मी के डर से बाहर निकलना, टहलना या एक्सरसाइज करना कम कर देंगे जो सीधे तौर पर लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ा देगा.

भारत में अधिक जोखिम क्यों?

भारत जैसे विकासशील और गर्म देशों में संसाधन सीमित हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ती गर्मी और ह्यूमिडिटी (उमस) के कारण दिन के समय बाहर निकलना लगभग असंभव होता जा रहा है.

ऐसे में जो लोग सुबह या शाम को पार्क में टहलते थे, रनिंग करते थे, साइकिल चलाते थे या कोई भी फिजिकल एक्टिविटी के लिए घर से निकलते थे, उनके लिए ऑपशंस कम होते जा रहे हैं. वहीं शहरों में बढ़ते कंक्रीट के इस्तेमाल और कम होते जंगल-पेड़ों ने इस स्थिति को और अधिक बिगाड़ दिया है.

Advertisement

बीमारियों का बढ़ेगा जोखिम

फिजिकली रूप से जो लोग एक्टिव नहीं होते उन्हें गैर-संचारी रोगों (NCDs) का जोखिम अधिक होता है. स्टडी में चेतावनी दी गई है कि एक्सरसाइज की कमी से हार्ट डिजीज, टाइप-2 डायबिटीज, कैंसर और मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ेंगी. 

यदि आंकड़ों की बात करें तो भारत में फिजिकल इनएक्टिविटी के कारण हर 1 लाख की आबादी पर 10.62 मौतें होने की आशंका जताई गई है. यह सिर्फ स्वास्थ्य का मामला नहीं है बल्कि इससे देश की प्रोडक्टिविटी में भी भारी कमी आएगी जिससे आर्थिक रूप से भी बड़ा नुकसान होगा.

बचाव का रास्ता क्या है?

स्टडी के राइटर्स का कहना है कि फिजिकल एक्टिविटी को सिर्फ 'लाइफस्टाइल चॉइस' नहीं, बल्कि 'क्लाइमेट-सेंसिटिव' जरूरत समझना होगा. यानी कि आपको एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करना ही होगा.

शहरों को ठंडा बनाने के लिए छायादार रास्ते, अर्बन फॉरेस्ट और सार्वजनिक स्थानों पर कूलिंग सेंटर्स की जरूरत है. साथ ही, जिम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को किफायती बनाना होगा ताकि आम आदमी गर्मी से बचते हुए खुद को फिट रख सके.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement