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व्हेल का ये प्रोटीन बदल सकता है इंसानी उम्र का खेल, क्या 200 साल जी पाएंगे लोग?

व्हेल में पाए गए खास सीआईआरबीपी प्रोटीन पर नई रिसर्च से पता चला है कि ये इंसानी डीएनए को बेहतर तरीके से ठीक कर सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भविष्य में इंसानों की उम्र बढ़ाने और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव के नए रास्ते खुल सकते हैं.

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लंबे समय तक जीने वाले जानवरों में कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है. (Photo: ITG)
लंबे समय तक जीने वाले जानवरों में कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है. (Photo: ITG)

लंबी और हेल्दी जिंदगी जीना आखिर कौन नहीं चाहता? हर इंसान की ख्वाहिश होती है कि वो ज्यादा से ज्यादा साल तक हेल्दी और खुशहाल जीवन जिए. लेकिन आज के दौर में ये सपना धीरे-धीरे मुश्किल होता जा रहा है. बढ़ता प्रदूषण, बिगड़ता खानपान, तनाव भरी लाइफस्टाइल के कारण बीमारियों का खतरा हरदम बना रहता है. ये सभी वजहें इंसानों की उम्र और सेहत पर असर डाल रही हैं और ज्यादातर लोग हद से हद तक 70 साल की उम्र तक ही जी पाते हैं.

ऐसे समय में वैज्ञानिकों की एक नई खोज उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है. बोहेड व्हेल में एक खास प्रोटीन पाया गया है, जो इंसानी DNA को बेहतर तरीके से ठीक करने में मदद कर सकता है. ये खोज न सिर्फ उम्र बढ़ाने के रूप में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, बल्कि ये सवाल भी खड़ा करती है क्या भविष्य में इंसान भी 200 साल तक जी सकते हैं?

लंबी उम्र का अनोखा राज
दुनिया में जानवरों की ऐसी कई प्रजाति हैं, जो बहुत लंबे समय तक जीवित रही हैं. इन्हीं में बोहेड व्हेल का नाम भी शामिल है. ये व्हेल पृथ्वी के सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले जानवरों में शामिल हैं, जिनकी उम्र 200 साल से भी ज्यादा पाई गई है. हैरानी करने वाली बात ये है कि इतनी लंबी उम्र जीने के बावजूद भी इनमें कैंसर या अन्य किसी भी गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं. मतलब साफ है ये काफी हद तक ऐसी बीमारियों से सुरक्षित रहती हैं, जिसने वैज्ञानिकों को लंबे समय से सोचने पर मजबूर किया है.

यूनिवर्सिटी ऑफ रॉचेस्टर में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि इसका एक बड़ा कारण इनके शरीर में मिलने वाला CIRBP यानी कोल्ड-इंड्यूसिबल आरएनए-बाइंडिंग प्रोटीन (Cold-inducible RNA-binding protein) हो सकता है. ये खास प्रोटीन बाओडेड व्हेल में इंसानों के मुकाबले लगभग 100 गुना ज्यादा होती है. ये प्रोटीन डीएनए में होने वाले डबल-स्ट्रैंड ब्रेक्स को ठीक करने में बहुत मददगार होता है. यही डैमेज उम्र बढ़ने, कैंसर और कई अन्य बीमारियों से जुड़ा होता है.

इंसान और मक्खियों पर दिखा
रॉचेस्टर यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम ने बोहेड व्हेल के सीआईबीपी प्रोटीन को इंसानी सेल्स और मक्खियों (fruit flies) पर टेस्ट किया. इसके नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे. इसमें पाया गया कि इंसानी सेल्स में डीएनए ब्रेक्स को ठीक करने की क्षमता लगभग दोगुनी हो गई. इतना ही नहीं, अब इंसानी सेल्स में रिपेयर भी पहले से ज्यादा अच्छी तरह से हो पा रहा था.

वहीं, मक्खियों पर की गई टेस्टिंग में उनकी उम्र बढ़ती हुई देखी गई और वे रेडिएशन के प्रभाव से भी ज्यादा सेफ पाई गईं. इन पॉजिटिव नतीजों के बाद अब वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन का परीक्षण चूहों पर भी शुरू कर दिया है, जिससे भविष्य में इसके और बड़े असर सामने आ सकते हैं.

व्हेल की लंबी उम्र का क्या है राज?
पेटो पैराडॉक्स के अनुसार, बड़े और लंबे समय तक जीने वाले जानवरों में कैंसर कम क्यों होता है, ये सवाल वैज्ञानिकों को लंबे समय से परेशान कर रहा है. रॉचेस्टर यूनिवर्सिटी की टीम ने पाया कि बोहेड व्हेल खराब और डैमेज्ड सेल्स को मारने के बजाय डीएनए को ठीक करके खुद को ऐसी बीमारियों से सुरक्षित रखती हैं.

हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इसे लेकर ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि व्हेल की लंबी उम्र सिर्फ एक प्रोटीन नहीं, बल्कि कई बायोलॉजिकल प्रोसेस का नतीजा हो सकती है.

इस रिसर्च से एक उम्मीद बंधती है कि डीएनए सुधारने वाले प्रोटीन पर काम करके इंसानी उम्र बढ़ाई जा सकती है. लेकिन अभी ये असर सिर्फ प्रयोगशाला में ही दिखा. ऐसे में इसे लेकर अभी कुछ ठोस तरह से नहीं कहा जा सकता है.

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