
क्या यूपी के प्रयागराज में एक युवती ने आत्मरक्षा के लिए दो लोगों की हत्या कर दी? सोशल मीडिया पर भगवा कपड़े पहने तलवार को नमन करती एक महिला की तस्वीर वायरल हो रही है. इसके साथ दावा किया जा रहा है कि ये महिला इलाहाबाद की रहने वाली 16 वर्षीय शीषा साहू है. इसके साथ दो मुस्लिम युवकों ने बलात्कार करने की कोशिश की, जिसके बाद महिला ने आत्मरक्षा में दोनों युवकों की हत्या कर दी.
एक फेसबुक यूजर ने तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, "इस बहन को दो मुल्ला मिलकर गलत करने की हिम्मत किया, *** को काट दिया".

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा बेबुनियाद है. तस्वीर मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा की रहने वाली साध्वी सरस्वती की है. साथ ही इलाहाबाद (प्रयागराज) में इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है.
क्या है सच्चाई
वायरल तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये तस्वीर किसी साध्वी सरस्वती के वेरिफाइड फेसबुक पेज पर मिली, जिसे 9 जनवरी 2019 में पोस्ट किया गया था. फेसबुक पेज पर दी गई जानकारी के अनुसार साध्वी सरस्वती एक भागवत कथा वाचक और मोटिवेशनल स्पीकर हैं.
अधिक जानकारी जुटाने के लिए हमने साध्वी सरस्वती फाउंडेशन से संपर्क किया. फाउंडेशन में कार्यरत नमन परमार ने बताया कि वायरल हो रही तस्वीर साध्वी सरस्वती की ही है लेकिन जो दावा तस्वीर के साथ किया जा रहा है वो बिल्कुल गलत है. नमन ने हमें ये भी बताया कि ये तस्वीर साध्वी के एक फोटोशूट के दौरान की है जिसे गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है. नमन ने कहा कि इस मामले से साध्वी का कोई लेना-देना नहीं है.
साध्वी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. उनका इंस्टाग्राम अकाउंट खंगालने पर हमें वायरल तस्वीर के साथ उसी फोटोशूट की और भी तस्वीरें मिलीं.
हमें ये तो पता चल गया कि ये तस्वीर किसी शीषा साहू की नहीं बल्कि छिंदवाड़ा की कथा वाचक साध्वी सरस्वती की है, लेकिन क्या इलाहाबाद में इस तरह की कोई घटना हुई है?
हमने जांच को आगे बढ़ाते हुए प्रयागराज (इलाहाबाद) पुलिस के सोशल मीडिया सेल से संपर्क किया. सोशल मीडिया सेल के एक अधिकारी ने तस्वीर के साथ किए दावे का खंडन करते हुए कहा कि इस तरह की कोई घटना प्रयागराज में नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि ये दावा साल 2020 से वायरल किया जा रहा है. उस समय प्रयागराज पुलिस ने भी इस दावे का खंडन किया था.
हमें प्रयागराज पुलिस का 18 अगस्त, 2020 का एक ट्वीट मिला जिसमें शीषा साहू द्वारा बलात्कारियों को मौत के घाट उतार देने वाली बात का खंडन किया है.

दरअसल, 7 अगस्त 2020 को उत्तर प्रदेश के करछना में मामूली विवाद में दो पक्षों में मारपीट हुई थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें से शिखा गुप्ता नाम की महिला भी शामिल थी. इसी महिला आरोपी से जोड़कर यह कहानी गढ़ दी गई कि हिंदू युवती ने आत्मरक्षा के लिए दो मुस्लिमों की हत्या कर दी. इस विवाद में दोनों पक्ष हिंदू थे.
इसी मामले के जांच अधिकारी करछना थाने में पदस्थ SHO राकेश सिंह से भी हमारी बात हुई है. राकेश ने भी बलात्कार से जुड़ी सभी बातों का खंडन करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाई जा रही हैं. मामला दो पक्षों में विवाद का था. फिलहाल, केस की जांच जारी है.
इस घटना के बारे में दैनिक जागरण ने भी अपनी एक रिपोर्ट में बताया है.
हमें ऐसी कोई न्यूज़ रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें किसी शीषा साहू द्वारा आत्मरक्षा के लिए दो मुस्लिम लोगों को मौत के घाट उतारने का बात कही गई हो. अगर इस प्रकार की कोई घटना इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुई होती तो ये एक बड़ी खबर होती जिसे मीडिया जरूर कवर करता.
पड़ताल में साफ हो जाता है कि जो तस्वीर वायरल हो रही है वो इलाहाबाद की किसी शीषा साहू की नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा की रहने वाली साध्वी सरस्वती की है. साथ ही तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा भी गलत है कि इलाहाबाद में एक युवती ने आत्मरक्षा में दो मुस्लिम युवकों को जान से मार दिया.
(सौरभ भटनागर के इनपुट के साथ)