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फैक्ट चेक: ईरान के लोगों की मदद के नाम पर हो रही ठगी, ये क्यूआर कोड ईरान एम्बेसी का नहीं है

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें एक व्यक्ति भारत के मुसलमानों से ईरान के लोगों की मदद के लिए अपील करता दिखता है. इस वीडियो पर एक क्यूआर कोड भी लगा है. सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो का आजतक की टीम ने फैक्ट चेक किया है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
ये ईरान एम्बेसी का क्यूआर कोड है जिसके जरिये युद्ध में हताहत ईरानियों की मदद की जा सकती है.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
ये क्यूआर कोड, ईरान की एम्बेसी का नहीं है. ये वीडियो जमीर अब्बास जाफरी नाम के इस्लामिक स्कॉलर के वीडियो में छेड़छाड़ करके बनाया गया है.

हाल ही में भारत में स्थित  ने युद्ध पीड़ित लोगों की मदद के लिए बैंक डिटेल्स जारी कीं. इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें एक व्यक्ति भारत के मुसलमानों से ईरान के लोगों की मदद के लिए अपील करता दिखता है. Charity Helping नाम के फेसबुक अकाउंट से जारी इस वीडियो पर एक क्यूआर कोड भी लगा है.

वो कहता है, "इस वीडियो को हर मुसलमान को शेयर करना है. हर इंडियन मुसलमान इसे शेयर करें. क्योंकि अगर आप कह रहे थे कि मैं अयातुल्लाह खामेनेई से बहुत मोहब्बत करता हूं, ईरान से बहुत मोहब्बत करता हूं, तो ये वक्त है दिखाने का, कि आप मोहब्बत करते हो. ये ईरानियन एम्बेसी की डिटेल्स हैं. हर मुसलमान अगर 100 रुपया दे हिन्दुस्तान में, 20 करोड़ मुसलमान हैं, कितना पैसा दे सकते हैं."

खबर लिखे जाने तक इस वीडियो को तकरीबन 18 हजार लोग शेयर कर चुके थे.

लेकिन आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि इस वीडियो में दिया गया क्यूआर कोड ईरानी दूतावास का नहीं है. ये वीडियो, जमीर अब्बास जाफरी नाम के इस्लामिक स्कॉलर के एक वीडियो को एडिट करके बनाया गया है.

कैसे पता लगाई सच्चाई?  

वायरल वीडियो को रिवर्स सर्च करने से हमें जमीर अब्बास जाफरी नाम के एक इस्लामिक स्कॉलर का  मिला.

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जमीर ने 14 मार्च को एक पोस्ट किया था. इसी से छेड़छाड़ करके वायरल वीडियो बनाया गया है. इस पोस्ट में ईरान एम्बेसी के 14 मार्च के एक्स पोस्ट का स्क्रीनशॉट है.

वहीं, वीडियो के ऊपर की तरफ ईरान एम्बेसी का वॉट्सऐप नंबर "+91-9899812318" लिखा है. ये नंबर एम्बेसी ने पेमेंट की रसीद का स्क्रीनशॉट भेजने के लिए जारी किया था.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

इसे देखकर साफ पता लगता है कि ईरान एम्बेसी वाले एक्स पोस्ट के ऊपर किसी ने अपना खुद का क्यूआर कोड लगा दिया है और वॉट्सऐप नंबर को “MBC” के एक लोगो से छुपा दिया है. MBC, स्विट्जरलैंड की एक  कंपनी है.

जमीर ने इस पर क्या कहा?

जमीर ने 18 मार्च को इस वीडियो के बारे में स्पष्टीकरण जारी किया. उन्होंने लोगों को आगाह करते हुए लिखा कि अगर वो ईरान के लोगों की आर्थिक मदद करना चाहते हैं तो एम्बेसी के असली में दिए गए बैंक अकाउंट नंबर के जरिये ही करें.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

ईरान एम्बेसी ने भी किया था आगाह

भारत में स्थित ईरान की एम्बेसी ने 14 मार्च को एक्स पर लिखा कि भारत के बहुत सारे लोग और चैरिटेबल संस्थाएं लगातार उनसे, युद्ध प्रभावित ईरान के लोगों की आर्थिक मदद करने के लिए संपर्क कर रहे थे. इसी वजह से उन्होंने डोनेशन के लिए एक बैंक अकाउंट नंबर जारी किया है.

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17 मार्च को एम्बेसी ने आ​र्थिक मदद करने के लिए भारत के लोगों को शुक्रिया कहा. साथ ही, उन्होंने ये चेतावनी भी दी कि किसी भी अनाधिकृत अकाउंट द्वारा जारी किए गए क्यूआर कोड या यूपीआई से उनका कोई लेना-देना नहीं है.

नया अकाउंट, चुराई हुई तस्वीरें

Charity Helping नाम का ये फेसबुक अकाउंट 17 मार्च, 2026 को ही बनाया गया है. फर्जीवाड़ा करने वाले अक्सर युद्ध या कहीं कोई आपदा आने पर नए अकाउंट बना लेते हैं. ऐसे हालात को वो पैसा कमाने के मौके की तरह भुनाते हैं.

इस फेसबुक अकाउंट के कवर फोटो में स्विट्जरलैंड की एक पब्लिक ट्रास्पोर्ट कंपनी  का वही लोगो लगा है, जिससे वायरल वीडियो में ईरान एम्बेसी के वॉट्सऐप नंबर को छुपाया गया है. वहीं, इसकी डीपी में MBC का एक दूसरा लोगो लगा है, जो स्टॉक फुटेज  से लिया गया है.

कमेंट में छुपी जालसाजी  

वायरल पोस्ट पर कुछ लोग पेमेंट के स्क्रीनशॉट डाल रहे हैं. इनमें से दो स्क्रीनशॉट्स की जांच करने पर हमने पाया कि इनमें किसी और अकाउंट में पैसा डाला गया है, न कि वायरल वीडियो वाले क्यूआर कोड पर. वायरल वीडियो वाले क्यूआर कोड को स्कैन करने से "gpay-12197930627@okbizaxis" यूपीआई आईडी दिखती है, जबकि कमेंट वाले स्क्रीनशॉट में जिस यूपीआई आईडी पर पैसा डाला गया है, वो है- "gpay-12190284425@okbizaxis".

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वायरल वीडियो में पैसे रिसीव करने वाले का नाम अलहिंद चैरिटी फाउंडेशन लिखा है. इसमें चैरिटी की स्पेलिंग भी गलत लिखी है.

मेटा ऐड्स लाइब्रेरी के अनुसार, ये पेज 16 मार्च से ही इस वीडियो को विज्ञापन के तौर पर दिखा रहा है.

कोम, ईरान स्थित अल मुस्तफा यूनिवर्सिटी में इस्लाम एंड मीडिया स्टडीज के प्रोफेसर जमीर ने आजतक को बताया, "ये वीडियो एडिटेड है. मैं वैसे तो मूल रूप से मुंबई का रहने वाला हूं, लेकिन वर्तमान में भारत में नहीं हूं. इसलिए फिलहाल कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर रहा हूं, पर मैंने इसके बारे में सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण दिया है."

साफ है, Charity Helping नाम का फेसबुक पेज, ईरान के लोगों की आर्थिक मदद के नाम पर लोगों से ठगी कर रहा है.

अपडेट: हमने ये स्टोरी करते वक्त जमीर अब्बास जाफरी से संपर्क किया था. खबर छपने के बाद उन्होंने अपना जवाब भेजा. उनके जवाब को इस स्टोरी में जोड़ा गया है.

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