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फैक्ट चेक: बालेन शाह ने नेपाल में मस्जिदें और मजार गिराने का कोई आदेश नहीं दिया, ये पोस्टकार्ड फर्जी है

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के नाम पर मस्जिदों को गिराने और भारत को लेकर शर्त रखने का दावा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लेकिन जांच में यह पूरी तरह फर्जी पाया गया.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देश के सारे ईदगाह, मस्जिद और मजारों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
बालेन शाह ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है. उनके नाम पर वायरल ये बयान पूरी तरह फर्जी है.

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के हवाले से एक बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसके मुताबिक उन्होंने सत्ता संभालते ही सभी मस्जिदों, ईदगाहों और दरगाहों को नष्ट करने का आदेश दे दिया है.

गौरतलब है कि बालेन जबसे नेपाल के प्रधानमंत्री बने हैं, अपने फैसलों के कारण लगातार सुर्खियों में हैं. कुछ दिनों पहले उनका एक रैप सॉन्ग जय महाकाली रिलीज हुआ था, जिसे 72 घंटों में ही 50 लाख से ज्यादा व्यूज मिल गए थे.

इसी संदर्भ में अब वायरल हो रहे एक पोस्टकार्ड के ऊपर लिखा है, "जय महाकाली से गूंजा नेपाल." आगे लिखा है, "बालेन शाह ने कहा, मैं भारत सरकार से इसी शर्त पर हाथ मिलाऊंगा कि वह भारत को भी रामराज घोषित करें हमने प्रधानमंत्री की शपथ लेते ही नेपाल में जितने भी ईदगाह मस्जिद दरगाह है, इन्हें ध्वस्त करने का आदेश दे दिया है और जल्द नेपाल जिहादी मानसिकता वालों से मुक्त होगा नेपाल सदा हिंदू राष्ट्र था है और है और आगे भी रहेगा."

एक थ्रेड्स यूजर ने इस पोस्टकार्ड को शेयर करते हुए लिखा, "क्या भारत भी मे भी ऐसा होगा".

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पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि बालेन शाह के नाम पर वायरल हो रहा ये बयान पूरी तरह फर्जी है. उन्होंने नेपाल के मुस्लिम धार्मिक स्थलों को ध्वस्त करने का कोई आदेश नहीं दिया है. न ही भारत को रामराज्य बनाने जैसी कोई बात कही है.  

कैसे पता लगाई सच्चाई?  

हमने नेपाली कीवर्ड्स की मदद से ये पता लगाने की कोशिश की कि क्या बालेन शाह ने मस्जिदों को ध्वस्त करने जैसा कोई आदेश दिया है. लेकिन हमें ऐसी कोई न्यूज रिपोर्ट नहीं मिली. जाहिर है, अगर बालेन ने वाकई ऐसा कोई आदेश दिया होता, तो इसके बारे में सभी जगह खबर छपी होती.

हमें नेपाल की न्यूज वेबसाइट्स में अतिक्रमण हटाए जाने से संबंधित दो घटनाओं से जुड़ी हालिया खबरें मिलीं.

"nepalnews.com" की 6 अप्रैल की एक खबर में नेपाल के पोखरा शहर में फेवा झील के पास हाल ही में चले एक अतिक्रमण अभियान के बारे में बताया गया है. खबर के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में होटलों, रिजॉर्ट्स आदि के अवैध निर्माण की वजह से इस झील का दायरा सिमटता जा रहा था. इसके चलते वहां के सुप्रीम कोर्ट ने 2018 और 2023 में, संरक्षित क्षेत्र में स्थित ऐसी सभी इमारतों को हटाने का आदेश दे दिया था. बालेन शाह की सरकार ने इसी आदेश को लागू करवाया है.

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हमने फेवा झील के पास चले अतिक्रमण अभियान की और भी कई खबरें देखीं लेकिन किसी में भी हमें इस्लामिक ढांचे तोड़े जाने का जिक्र नहीं मिला.

इसके अलावा हमें "nepalaaja.com" की 25 मार्च की एक अन्य खबर मिली, जिसमें बेघरों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था "All Nepal Squatter Association" ने प्रशासन पर सालों पुराने जमीनी विवाद को सुलझाने के बजाए बुलडोजर चलवाने का आरोप लगाया था. ये आरोप मुख्य रूप से 9 मार्च को काठमांडू के धापसी में 18 घरों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के बारे में था.    

बतौर मेयर चलाया था 'डोजर अभियान'  

2022 में काठमांडू का मेयर बनने के बाद बालेन शाह ने अतिक्रमण हटाने को लेकर एक बड़ा अभियान चलाया था. नेपाल के स्थानीय मीडिया ने इसे 'डोजर अभियान' का नाम दिया था. इसका उद्देश्य सड़कों, फुटपाथों और नदियों के किनारों को अतिक्रमण मुक्त बनाना था. इस अभियान ने बालेन की साहसी छवि बनाई थी लेकिन इसकी आलोचना भी हुई थी. ह्यूमन राइट्स वॉच ने स्ट्रीट वेंडर्स के खिलाफ बल प्रयोग किए जाने की निंदा की थी.  

काठमांडू पोस्ट के अनुसार, बालेन शाह सरकार के 100 पॉइंट एजेंडा में अतिक्रमण हटाना भी शामिल है.

बालेन ने भारत को लेकर क्या कहा?  

पीएम बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुभकामना संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए बालेन शाह ने लिखा था कि वो भारत के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं. हमें बालेन का ऐसा कोई बयान नहीं मिला कि वो भारत सरकार से इसी शर्त पर हाथ मिलाएंगे कि वो रामराज्य लेकर आएं.  

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साफ है, बालेन शाह के नाम पर वायरल हो रहा बयान पूरी तरह फर्जी है.  

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