
महाराष्ट्र के घाटकोपर में सेक्स वर्कर्स आगे आईं और निधि समर्पण दिया. भिखारियों ने अपनी एक दिन की कमाई दे दी. बुजुर्ग लोग, जिनमें से ज्यादातर की उम्र 90 साल से ज्यादा थी, उन्होंने अपनी पेंशन का एक हिस्सा दान में दे दिया. किन्नर समाज ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. एक आदिवासी महिला ने पड़ोस से 11 रुपये उधार लिए और उसे दान में दे दिए.
ये सब कुछ राम मंदिर के लिए. जब बॉलीवुड के संगीतकार और गीतकार रविंद्र जैन ने 1980 के दशक में 'सवा रुपैया दे दे भैया राम शिला के नाम का, राम के घर में लग जाएगा पत्थर तेरे नाम का' गाना गाया, तब उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि 40 साल बाद पूरा भारत राम मंदिर निर्माण के लिए एकसाथ आ जाएगा.
विश्व हिंदू परिषद ने 2021 की जनवरी-फरवरी में राम मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण इकट्ठा करने के लिए अभियान शुरू किया था. इस दौरान 20 लाख से ज्यादा वॉलेंटियर ने 12.7 करोड़ परिवारों तक पहुंचकर चंदा इकट्ठा किया था. ये एकत्रित धनराशि राम मंदिर ट्रस्ट के खाते में जमा की जा रही है.
लोग इंतजार करते थे कि वॉलेंटियर्स उनके पास आएं और निधि समर्पण लेकर जाएं. कुछ लोग खुद से आगे बढ़कर निधि समर्पण दे रहे थे. ज्यादातर लोगों के लिए ये सपने के सच होने जैसा था, क्योंकि 500 साल के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर बनने जा रहा था.
अब जैसे-जैसे अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तारीख (22 जनवरी) नजदीक आ रही है, तो इस बात पर भी एक नजर डालते हैं कि इसे भारत के इतिहास में सबसे बड़ा फंड जुटाने का अभियान क्यों कहा जा रहा है?
राम मंदिर निर्माण के लिए फंड जुटाने की पहुंच...
आरएसएस की मीडिया विंग के प्रमुख राजीव तुली ने बताया कि राम जन्मभूमि आंदोलन 1984 में शुरू हुआ था. उस समय दिल्ली के बोट क्लब में एक बड़ी रैली हुई थी, जिसमें रविंद्र जैन का 'सवा रुपैया दे दे रे भैया राम शिला के नाम का...' गाना भी गाया था.
राजीव तुली ने बताया कि 2021 में 'राम मंदिर निधि समर्पण अभियान' शुरू हुआ. 45 दिन तक चलने वाला ये अभियान 15 जनवरी से 27 फरवरी 2021 तक चला था. इसकी अगुवाई विश्व हिंदू परिषद ने की थी, जिसे संघ के संगठनों ने समर्थन दिया था.
80 के दशक में राम मंदिर शिलान्यास के लिए कम से कम 1.25 रुपये का निधि समर्पण मांगा गया था. इस बार निधि समर्पण की रकम कम से कम 10 रुपये रखी गई थी. इसलिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग राम मंदिर के लिए निधि समर्पण दे सकें. क्योंकि निधि समर्पण इकट्ठा करना लक्ष्य नहीं था, बल्कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को राम मंदिर से जोड़ना मकसद था.
उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान हम देश की 15 फीसदी आबादी तक पहुंचे. उन्होंने दावा किया कि देश में किसी भी अभियान की इतनी व्यापक पहुंच नहीं रही.
विश्व हिंदू परिषद के मुताबिक, अभियान के दौरान वॉलेंटियर्स ने 5 लाख से ज्यादा गांवों को कवर किया और 65 करोड़ लोगों तक पहुंचे. इस दौरान राम मंदिर के लिए 2,100 करोड़ रुपये का निधि समर्पण इकट्ठा हुआ.
तुली ने बताया, लोगों ने सोचा कि राम मंदिर निर्माण में योगदान देने का उनके पास मौका है. वो अपने बच्चों और पोते-पोतियों को बता सकते हैं कि राम मंदिर निर्माण में उनका भी योगदान था. उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में दान का बड़ा महत्व है.

किस-किसने दिया दान?
वीएचपी के प्रवक्ता प्रवेश कुमार ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन बस किसी मंदिर के लिए आंदोलन नहीं था. बल्कि ये भगवान राम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए एक संघर्ष था, जो भारत की पहचान है. इस आंदोलन में 3.7 लाख से ज्यादा लोगों ने बलिदान दिया है. फिर सालों तक अदालत में मामला चला है.
उन्होंने बताया कि जब कानूनी लड़ाई जीत ली गई, तब तय किया गया कि एक भव्य और दिव्य मंदिर बनाया जाएगा. ये भी तय हुआ कि राम मंदिर का निर्माण सरकार या किसी कारोबारी के पैसों से नहीं बनवाया जाएगा.
प्रवेश कुमार ने बताया कि अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए 500 साल लंबी लड़ाई आम जनता ने लड़ी. इसलिए ये तय किया गया कि राम मंदिर निर्माण के लिए हमें जनता के पास जाना चाहिए.
वीएचपी का कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए लोग निधि समर्पण देने के लिए तैयार बैठे थे, बस उन तक पहुंचने की देर थी.
लोग कैसे निधि समर्पण देने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, इसका उदाहरण देते हुए प्रवेश कुमार ने बताया कि सिक्किम के एक गांव में 95 साल की महिला ने सालों से अपनी पेंशन से कुछ हिस्सा बचाकर रखा और 51 हजार रुपये का दान दिया.
उन्होंने बताया कि किन्नर समाज ने भी इसमें योगदान दिया. मध्य प्रदेश के गंजबासौदा के मुन्ना किन्नर ने अपना पूरा समर्थन दिया. राजस्थान के मेवाड़ की किरण बाई ने 3 लाख और जोधपुर की सरोज मौसी ने 5 लाख रुपये से ज्यादा का दान दिया.
उन्होंने बताया कि मुंबई के घाटकोपर रेलवे स्टेशन की सेक्स वर्कर्स ने भी निधि समर्पण दिया. ये दिखाता है कि राम सबके दिल में हैं. उन्होंने ये भी बताया कि नागपुर के गोदिया और गुरुग्राम में भिखारियों ने दिनभर में जो कुछ कमाया था, वो सब राम मंदिर के लिए दे दिया.
वीएचपी के सदस्य और पेशे से वकील मंदीप बंसल ने भी दिल्ली के रोहिणी में चलाए गए अभियान के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि किसी की कमाई कितनी भी कम क्यों न हो, सबने दिल खोलकर और जितना वो कर सकते थे, दान दिया. सड़क किनारे बैठने वाले मोची, रिक्शावाले, सफाई कर्मचारी और सिक्योरिटी गार्ड, हर कोई राम मंदिर के लिए दान देने के लिए आगे आया.
उन्होंने बताया कि जैसे ही लोगों को पता चलता कि हम राम मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण इकट्ठा करने के लिए आए हैं, वैसे ही लोग खुद ही पैसे देने की पेशकश करने लगते थे.

भगवान राम और पूर्वोत्तर भारत
जो लोग रामभक्त हैं, वो तो निधि समर्पण देने के लिए आगे आए. लेकिन देश के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जहां राम से ज्यादा कृष्ण के भक्त ज्यादा हैं.
दिल्ली से करीब 2,300 किलोमीटर दूर असम के तिनसुकिया जिले में आरएसएस के जिला सह कार्यवाह हरीश सैकिया ने बताया कि लोग उनसे राम के बारे में सवाल करते थे और पूछते थे कि अयोध्या में बनने वाले मंदिर के लिए हम क्यों दान दें.
उन्होंने बताया कि वो फिर समझाते थे कि बीहू गीत और असमिया प्रार्थना में कृष्ण के साथ जिन राम का उल्लेख किया गया है, वो अयोध्या के राम हैं. हमने उन्हें अहसास कराया और इस अभियान से जोड़ा.
सैकिया ने बताया कि जो लोग भगवान राम और अयोध्या में बन रहे मंदिर के बारे में जानते थे, उन्होंने बढ़-चढ़कर दान दिया. उन्होंने बताया कि तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा शहर में एक चाय बागान में काम करने वाली आदिवासी महिला ने पड़ोसी से 11 रुपये उधार लिए और राम मंदिर के लिए दान दिया.
'सबके राम'
राम मंदिर निर्माण के लिए सिर्फ हिंदुओं ने ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों को मानने वाले लोगों ने दान दिया.
वीएचपी के प्रवेश कुमार बताते हैं कि कैसे अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के बौद्ध भिक्षुओं, दूर-दराज के गांवों के ईसाइयों और देशभर के सिख और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने राम मंदिर के लिए दान दिया.
उन्होंने बताया कि यूपी के एक व्यक्ति ने राम मंदिर में दान देने के लिए अपनी जमीन बेच दी थी. उन्होंने बताया कि प्रतापगढ़ के सियाराम गुप्ता ने एक करोड़ रुपये दान देना चाहते थे, उन्होंने इसके लिए अपनी 16 बीघा जमीन बेच दी थी. फिर भी 15 लाख रुपये कम पड़ रहे थे तो उन्होंने अपने रिश्तेदारों से उधार लिया. उन्होंने 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में बुलाया गया है.

22 जनवरी के लिए तैयारियां
जैसे-जैसे मंदिर उद्घाटन की तारीख पास आ रही है, वैसे-वैसे उत्साह भी बढ़ता जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि वो 22 तारीख को अयोध्या आने की बजाय घर पर ही दीये जलाएं.
वीएचपी और आरएसएस ने 22 जनवरी को मंदिरों में प्रार्थना के साथ-साथ उद्घाटन को बड़ी स्क्रीन पर प्रसारित करने की योजना बनाई है.
हरीश सैकिया ने बताया कि जब प्राण प्रतिष्ठा होगी, तब हम बगल के मंदिर में जाकर प्रार्थना करेंगे. उसके बाद आगे का कार्यक्रम बड़ी स्क्रीन पर सबके साथ देखेंगे.
जब अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनेगा, ये उन करोड़ों लोगों का राम मंदिर होगा जिन्होंने अपना सब कुछ दिया. राम मंदिर में जनता की हिस्सेदारी है, जो अब उनका मंदिर है.