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मिथक vs फैक्ट्स! जनगणना से हिचकने वाले ये बातें जरूर जान लें

देशभर में जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी और भ्रांतियों के कारण जनगणना कर्मियों को परेशानी हो रही है. गाजियाबाद के मुरादनगर में एक व्यक्ति ने जनगणना अधिकारी के घर पहुंचने पर गोली चला दी, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. आखिर किस तरह की अफवाहें जनगणना के लिए परेशानी बन रही हैं.

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जनगणना को लेकर लोगों में कुछ भ्रम भी हैं
जनगणना को लेकर लोगों में कुछ भ्रम भी हैं

देशभर में जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इसके लिए तय कर्मी आपके दरवाजे तक कुछ बेहद जरूरी सवालों की लिस्ट के साथ पहुंच रहे हैं. लेकिन प्रक्रिया को लेकर लोगों में जागरूकता और जानकारी की कमी के कारण जनगणना कर्मियों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद से सामने आया है.

यहां मुरादनगर में एक शख्स ने अपने पड़ोसी पर इसलिए गोली चला दी क्योंकि वह जनगणना अधिकारी को लेकर उसके घर पहुंच गया था. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. 

यानी कुल मिलाकर जनगणना को लेकर लोगों में भ्रांतियां इस स्तर तक हैं कि वह खौफनाक हो रही हैं और जानलेवा भी साबित हो रही हैं. जबकि सरकार की ओर से पब्लिक डोमेन में सोशल मीडिया के जरिये लगातार इन मिथकों को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. एक्स जैसे प्लेटफॉर्म और टीवी मीडियम पर ऐसे कई वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जो 'जनगणना' का महत्व तो समझाते ही हैं, साथ ही लोगों के आम सवालों का भी जवाब दे रहे हैं.

जनगणना को लेकर लोगों में क्या-क्या भ्रांतियां और मिथक हैं, इन पर डालते हैं एक नजर और साथ ही आपको फैक्ट्स भी बताएंगे-

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मिथक- जनगणना अधिकारी आपसे फोटो आईडी, दस्तावेज और फोन से ओटीपी भी मांगते हैं.

तथ्य- नहीं! जनगणना अधिकारी आपसे कोई भी फोटो आईडी, ओटीपी और दस्तावेज नहीं मांगेंगे. आपको बस उनके सवालों का ईमानदारी व सच्चाई से जवाब देना है. ऐसी अफवाहों से दूर रहिए और जनगणना में हिस्सा लीजिए.

मिथक- जनगणना के दौरान आपकी ओर से दी गई जानकारी किसी भी एजेंसी के साथ शेयर की जा सकती है. इसलिए अपने डेटा, अपनी निजी जानकारी को साझा करने से बचें, सतर्क रहें.

तथ्य- ऐसा बिल्कुल नहीं है. जनगणना के दौरान दी गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित है और गोपनीय भी. इसे किसी संस्था के साथ शेयर नहीं किया जाता है.

मिथक- जनगणना में दी गई जानकारी के आधार पर आपका नाम किसी भी सरकारी योजना में जोड़ा या घटाया जा सकता है!

तथ्य- बिल्कुल गलत. ऐसा नहीं होता है. जनगणना में दी गई जानकारी का इस्तेमाल आपको किसी सरकारी योजना में जोड़ने या हटाने के लिए नहीं किया जाएगा. आपकी जानकारी सिर्फ जनसंख्या के आंकड़ों के लिए है.

मिथक- जनगणना में दी गई जानकारी वो सरकार के पास जाती है. कल को उससे आपके ऊपर जांच हो सकती है, टैक्स का नोटिस आ सकता है. इसलिए सोच समझकर जानकारी दीजिए!

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तथ्य- ये एक बड़ी गलतफहमी है. सच ये है कि आपके द्वारा दी गई जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के अनुसार पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी. इसे किसी भी जांच या टैक्स के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है. आपकी दी गई जानकारी सिर्फ जनसंख्या के आंकड़े तय करने के लिए उपयोग की जाती है.

तो कुल मिलाकर साफ-साफ प्वाइंट्स में समझिए-

1. जनगणना अधिकारी OTP और बैंक डिटेल्स नहीं मांगेंगे, आपको कोई दस्तावेज भी नहीं जमा करना है.
2. आपका कोई भी डेटा या जानकारी टैक्स या जांच के लिए इस्तेमाल नहीं होनी है. आपकी सारी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय है. 
3. जनगणना में दी गई जानकारी से आपकी किसी भी तरह की लाभार्थी स्थिति पर फर्क नहीं पड़ेगा. आप को जो सरकारी लाभ मिल रहे हैं वो इसकी जद में नहीं आते हैं.
4. जनगणना के लिए आपको किसी तरह की कोई भी फीस नहीं देनी होगी. जनगणना पूरी तरह निशुल्क है और HLO या खुद से भी इसके आंकड़े .या फॉर्म ऑनलाइन मीडियम से भरने पर भी फीस नहीं लगती है.
5.ऐसा भी नहीं है कि कोई भी जनगणना अधिकारी बनकर आ सकता है. आप हमेशा QR के साथ सत्यापन करके ऑफिशियल आइडेंटिटी कार्ड की जांच कर सकते हैं.

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कुल मिलाकर जनगणना इस विशाल देश के नागरिकों का अधिकार है और उनकी संगठित शक्ति की पहचान है. इसके जरिए विकसित भारत की नींव मजबूत होती है और यह प्रक्रिया तय करती है कि देश के विकास के लिए हर घर, हर परिवार और हर व्यक्ति बहुत अहम है. जनगणना हर व्यक्ति के लिए सही योजना और सही नीति बनाए जा सकने का आधार है. इसमें जरूर हिस्सा लें और अफवाहों से बचें.

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