लंदन ओलंपिक से पहले यातायात और सुरक्षा समस्याओं से निपटने के लिये आयोजकों ने भले ही व्यापक स्तर पर बंदोबस्त कर रखे हों लेकिन खेलगांव में एक अलग तरह की परेशानी सामने आई है.
समस्या यह है कि चार अधिकारी या कई बार छह खिलाड़ियों पर एक ही टॉयलेट है जिससे उन्हें नित्यकर्म से निवृत होने के लिये अपनी दिनचर्या में बदलाव करना पड़ रहा है.
एक भारतीय अधिकारी ने कहा, ‘यह हैरान करने वाली बात है कि दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन में खिलाड़ियों को इन चीजों से जूझना पड़ रहा है. यह फ्लैट की डिजाइन का मसला हो सकता है लेकिन खिलाड़ी काफी परेशान हैं.’ अधिकारी ने कहा कि यदि कोई खिलाड़ी टॉयलेट में अधिक समय बिताता है तो दूसरे उसे घूरने लगते हैं.
भारतीय दल में शामिल एक मुक्केबाज और एक निशानेबाज ने इसकी पुष्टि की कि खेलगांव में आने के बाद खिलाड़ियों के बीच सबसे पहली बातचीत टॉयलेट टाइम को लेकर हुई.
भारतीय निशानेबाज ने कहा, ‘अब एक अतिरिक्त टॉयलेट के साथ अलग फ्लैट का ऑर्डर नहीं दिया जा सकता. हमें जो मिला है, उसी से संतोष करना पड़ेगा. लेकिन प्रतियोगिता के समय काफी संजीदा मसला हो जायेगा.’
वहीं मुक्केबाज ने कहा कि दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलगांव के अपार्टमेंट में सुविधायें इससे बेहतर थी. उसने कहा, ‘खिलाड़ियों को टॉयलेट जाने के लिये कतार में खड़े नहीं होना पड़ता था.’
ऑस्ट्रेलियाई हाकी कोच रिक चार्ल्सवर्थ की शिकायत के बाद यह समस्या सुखिर्यों में आई. चार्ल्सवर्थ इस बात पर लाल पीले थे क्योंकि पुरुष हाकी ड्रा के अनुसार उनके खिलाड़ियों को तीन मुकाबले जल्दी खेलने हैं. ऑस्ट्रेलिया के तीन मैच स्थानीय समयानुसार सुबह साढे आठ बजे शुरू होने हैं. चार्ल्सवर्थ ने कहा कि इससे खिलाड़ियों को सुबह पांच बजे उठना होगा. खेलगांव हालांकि उसी ओलंपिक पार्क क्षेत्र में है जहां हॉकी पिच है.
उसी परिसर में रहते हुए जब हॉकी टीम शिकायत कर सकती है तो निशानेबाजों की सोचिये जिनकी रेंज खेलगांव से काफी दूर है.