लिपस्टिक अंडर माइ बुर्का और कपूर एंड संस जैसी तमाम फिल्मों में काम कर चुकीं रत्ना पाठक थियेटर में भी बहुत सक्रिय रही हैं. उन्होंने टीवी सीरियल्स में कई दमदार रोल किए हैं. बुधवार को इंडिया टुडे वुमन समिट एंड अवार्ड्स के अहम सत्र कमिंग ऑफ ऐज- वेन ग्रे इज गुड के अहम सत्र में एक्ट्रेस रत्ना शाह पाठक ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन कावेरी बमजई ने किया.
सत्र में रत्ना पाठक ने बेबाकी के साथ कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. रत्ना से पूछा गया आपने लिपस्टिक अंडर माई बुर्का में काम किया है. इस फिल्म में काम करने का अनुभव कैसा था. इस सवाल के जवाब में रत्ना ने कहा, जब लिपस्टिक अंडर माई बुर्का सही भाषा में कहें तो जब एक एडल्ट फिल्म में अपने रोल की कहानी पढ़ी तो मैं खुश हो गई. मुझे खुशी थी ऐसी कहानियों पर काम होता है. मैं हमेशा ऐसा काम करना चाहती हूं लेकिन कभी ऐसा काम नहीं मिला.
बॉलीवुड में राइटर्स की नहीं होती इज्जत
रत्ना पाठक ने कहा, बॉलीवुड में अच्छी कहानियां नहीं हैं. इसकी वजह है क्योंकि यहां राइटर्स की इज्जत नहीं होती है. फिल्म बनाने वाले लेखक की वैल्यू नहीं समझते हैं. वो उन्हें काम करने के पैसे नहीं देते हैं. अब आप ही सोचिए क्या राइटर इतने कम पैसों में घास खाएगा. अगर घास खाएगा तो घास ही तो लिखेगा. फिल्में बनाने वाले नहीं समझते राइटर की वैल्यू, ये बॉलीवुड इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ट्रैजडी है. थियेटर में दुनियाभर के राइटर हैं लेकिन फिल्मों में वहीं साजिद-वाजिद, पपपू चप्पू कब तक वो लिखेंगे नया. यही वजह है कि मैं थियेटर में खुश हूं. फिल्मों में अच्छे ऑफर नहीं हैं.
टीवी शो के सीक्वल से आहत रत्ना
रत्ना को आजकल के टीवी शो भी खास पसंद नहीं. उन्होंने सास-बहू की कहानियों पर बेबाकी से कहा, एक सीन को तीन बार दिखाते हैं, ऑडियंस कैसी होती जा रही है, क्या बोर नहीं होती है. मत भूलो रिमोट तुम्हारे हाथ में है, अब तो बदल जाओ. रत्ना ने कहा, मैंने भी कई सीरियल्स में काम किया है, लेकिन अब ऐसे सीरियल्स बनते कहां हैं? जो बन रहा है वो भी पुराने सीरियल का सीक्वल. अरे भाई ऐसा करते कैसे हो, नया कहां है. कब तक पुरानी चीजों को नया करते रहोगे.
नए कलाकारों को एक्टिंग से ज्यादा इमेज की चिंता
रत्ना ने बॉलीवुड में नए कलाकारों के बारे में कहा, वो सीन ऐसा शूट करते हैं, जिसमें वो हीरो लगे. उनका अपमान नहीं होना चाहिए. रत्ना ने एक फिल्म का वाकया सुनाया जो कपूर एंड संस से जुड़ा था. उन्होंने बताया मुझे सीन में रजत पर सामान फेकना था. इस सीन का रजत और मैंने कईबार रिहर्सल किया. लेकिन आज कल के कई स्टार तो ऐसे सीन करने में शरमाते हैं. वो सोचते हैं पर्दे पर हुई उनकी बेइज्जती होगी तो रियल लाइफ में भी होगी. ये बहुत फनी है;
नेपोटिज्म पर बोलीं रत्ना
इंडिया फुल नेपोटिज्म है, फिर हिंदी सिनेमा को लेबल देना गलत है. ये बात सबको पता है, सब इसमें हिस्सेदार हैं. इसलिए किसी एक ग्रुप को ये लेबल देना गलत है.
नसीरुद्दीशाह की पत्नी होना और सालों के रिश्ते पर बोलीं रत्ना
शादी के सालों बाद नसीर के बारे में बोलूं तो वो मेरे पार्टनर हैं. मुझे याद भी नहीं कितने साल बीत गए साथ रहते हुए. हम एक-दूसरे के साथ जीते चले आए और वो मेरे गुरु हैं. वैसे वो ये सुनना पसंद नहीं करते लेकिन वो मेरे ही नहीं सबके गुरु हैं. मैं खुश हूं कि उनकी पत्नी हूं. वो मुझसे बेहतर एक्टर हैं. हम दोनों में समानता है, यही सबसे खूबसूरत चीज है.