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'मैंने कभी किसी को अंगुली भी नहीं दिखाई, परमाणु के पीछे ये मकसद'

जॉन अब्राहम ने इंडिया टुडे को दिए एक स्पेशल इंटरव्यू में बताया कि फिल्म 'परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण' के जरिए वे अपने दर्शकों को क्या दिखाना चाहते हैं.

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'परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण'
'परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण'

जॉन अब्राहम अपनी अगली फिल्म 'परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण' के कारण चर्चा में हैं. ये फिल्म भारत द्वारा 1998 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षण पर आधारित है. जॉन अब्राहम फिल्म के प्रोड्यूसर और लीड एक्टर हैं. जॉन ने इंडिया टुडे को दिए एक स्पेशल इंटरव्यू में बताया कि इस फिल्म के जरिए वे अपने दर्शकों को क्या दिखाना चाहते हैं.

जॉन ने कहा, 'मेरे लिए कंटेंट सबसे अहम है. जेए इंटरटेनमेंट ऐसी फिल्में बनाना चाहता है, जो डिस्ट्रीब्यूशन चेन के हर व्यक्त‍ि के लिए पैसा बनाए. परमाणु में मुझे ये चीज नजर आई. परमाणु से हमने उम्मीद रखी कि ज्यादातर लोग इसे देखें.  हमने स्टोरी से बिना छेड़छाड़ किए बहुत साधारण रखा. हम इस पर राष्ट्रवाद का कार्ड नहीं खेलना चाहते थे. मैं बहुत ही अहिंसक आदमी हूं. मैंने कभी किसी को अंगुली भी नहीं दिखाई. परमाणु को थ्रिलर के तौर पर दिखाना चाहते हैं.' 

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जॉन ने आगे कहा, 'मैं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घटनाक्रमों से वाकिफ हूं, इसलिए नहीं कि मैं लोगों को ये दिखाना चाहता हूं, बल्क‍ि इसलिए कि मुझे पढ़ना पसंद है.'

जॉन का कहना है कि लोग मुझसे कहते थे कि मैंने 'मद्रास कैफे' बनाकर कांग्रेस का सपोर्ट किया. अब परमाणु के लिए कहा जा रहा है कि ये भाजपा को प्रमोट करती है. मैं राजनीतिक रूप से किसी की तरफदारी नहीं करना चाहता. मैं अटल बिहारी वाजपेयी का सम्मान करता हूं कि उन्होंने पोखरण परीक्षण को हरी झंडी दिखाई.

बता दें कि जॉन की ये फिल्म अभिषेक शर्मा निर्देशित कर रहे हैं. ये 25 मई को रिलीज होगी. फिल्म के बारे में जॉन कह चुके हैं, 'परमाणु मेरे बच्चे की तरह है. मैं 25 मई को इसे जन्म दूंगा. मैंने इस बच्चे की कस्टडी के लिए लड़ाई की है. मुझे अपने इस बच्चे पर गर्व है. शूटिंग के अंतिम दिन मुझे बहुत खुशी हुई थी कि हमने इतने मुश्किल शूट को पूरा कर लिया है, लेकिन मैं इसका क्रेडिट नहीं ले सकता. पूरी कास्ट और क्रू का शुक्रिया.'

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