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मनोरंजन

फिल्मों का यह 'विलेन' पिता से डरता था, छिपाई थी एक्टर होने की बात

फिल्मों का यह 'विलेन' पिता से डरता था, छिपाई थी एक्टर होने की बात
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दिग्गज एक्टर प्राण का परिचय हिंदी सिनेमा में एक ऐसे खतरनाक विलेन के रूप में किया जाता है जिससे 50 और 60 का दशक खौफजदा था. प्राण का जन्म 12 फरवरी 1920 को दिल्ली के बल्लीमारान में हुआ था. प्राण साहेब ने अपने किरदारों से बॉलीवुड के सबसे बड़े विलेन के रूप में पहचान बनाई. बता दें कि जितने खतरनाक और निर्दयी किरदार उन्होंने प्ले किए निजी जिंदगी में वे उसके विपरीत थे.

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हम आपको बताएंगे उनके निजी जीवन के कुछ ऐसे किस्से जो साबित करेंगे कि वे विलेन नहीं बल्कि एक रियल हीरो थे.
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प्राण ने एक्टिंग करियर के बारे में अपने घर में नहीं बताया था. उन्हें डर था कि कहीं एक्टर बनने की बात सुनकर उनके पिता गुस्सा ना हो जाएं. उन्होंने अपनी बहनों से कहकर अपने पहले इंटरव्यू की खबर वाले न्यूजपेपर को छिपवा दिया था. सफल होने के बाद भी अपने पिता के प्रति उनका यह खौफ दर्शाता है कि उनके दिल में पिता के लिए कितना सम्मान और आदर था.
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1973 में बे-इमान फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए चुना गया. प्राण ने कमेटी पर गलत जजमेंट का आरोप लगाते हुए अवॉर्ड लेने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि बेस्ट म्यूजिक के लिए अवॉर्ड फिल्म पाकीजा के म्यूजिक डायरेक्टर गुलाम मुहम्मद को मिलना चाहिए था. जो किसी अन्य को दे दिया गया था.
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प्राण साहब यारों के यार भी थे और दिलदार भी. जब राज कपूर बॉबी बना रहे थे तो फिल्म में ऋषि कपूर के पिता के रोल के लिए वो प्राण को कॉस्ट करना चाहते थे. लेकिन वो प्राण की भारी भरकम फीस को अफोर्ड नहीं कर सकते थे. जब प्राण को इस बात का पता चला तो वो फिल्म में मात्र 1 रुपए में काम करने को तैयार हो गए.
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इसके अलावा प्राण ने कई फिल्मों में अच्छी भूमिकाएं भी कीं. फिल्म परिचय, उपकार, डॉन, जंजीर इसका उदाहरण हैं. सिर्फ कुछ दशकों ने प्राण को विलेन के रूप में देखा, पर एक पूरी सदी ने उन्हें एक बेहतरीन इंसान और बेजोड़ कलाकार के रूप में देखा ही नहीं बल्कि माना भी.
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