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मनोरंजन

नीरज के लिखे 10 सदाबहार फिल्मी गाने, आज भी चाव से सुनते हैं लोग

नीरज के लिखे 10 सदाबहार फिल्मी गाने, आज भी चाव से सुनते हैं लोग
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मशहूर कवि, शायर और गीतकार गोपालदास नीरज का गुरुवार को निधन हो गया. वो 93 वर्ष के थे. नीरज जिंदगी, प्रेम और विरह की सच्चाइयों को बयान करने वाले रचनाकार के तौर पर विख्यात हैं. उन्होंने कुछ वक्त तक फिल्मों के लिए भी गीत लिखे. ये गीत आज भी चाव से सुने जाते हैं. हर उम्र के लोग नीरज के इन गीतों के प्रशंसक हैं. उत्तर प्रदेश के इटावा में जन्मे गोपालदास नीरज ने कई सालों तक फ़िल्मी गीत लिखे. लेकिन बाद में मायानगरी को अलविदा कह अलीगढ़ वापस चले आए. न्यूज एजेंसी 'भाषा' के मुताबिक 1970 के दशक में लगातार तीन वर्षों तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. आइए नीरज के लिखे उन 10 सदाबहार गानों पर नजर डालते हैं जिनके शब्दों का कोई सानी नहीं है.
नीरज के लिखे 10 सदाबहार फिल्मी गाने, आज भी चाव से सुनते हैं लोग
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1971 में एक फिल्म आई थी शर्मीली. इसका एक गाना "आज मदहोश हुआ जाये रे मेरा मन..मेरा मन" बहुत लोकप्रिय हुआ था. नीरज के लिखे गीत पर एसडी बर्मन ने म्यूजिक दिया था. गाना  राखी और शशि कपूर पर फिल्माया गया था जिसे किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने गाया था.

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1971 में "गैंबलर" फिल्म का गाना आज भी अपनी बोल की वजह से सुना जाता है. किशोर कुमार की आवाज में "दिल आज शायर है गम आज नगमा है" का म्यूजिक एसडी बर्मन ने तैयार किया था. नीरज का लिखा ये गाना सदाबहार अभिनेता देवानंद के ऊपर फिल्माया गया था.
नीरज के लिखे 10 सदाबहार फिल्मी गाने, आज भी चाव से सुनते हैं लोग
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1971 में आई फिल्म "शर्मीली" का एक और गाना आज भी चाव से सुना जाता है. नीरज के लिखे "खिलते हैं गुल यहां..मिलके बिखरने" को किशोर कुमार ने अपनी जादुई आवाज में गाया था. ये गाना शशि कपूर और राखी पर फिल्माया गया था जिसका म्यूजिक एस डी बर्मन ने तैयार किया था.
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1971 में आई राजकपूर की फिल्म "मेरा नाम जोकर" का ये गाना भला किसने नहीं सुना होगा. नीरज के लिखे "ऐ भाई जरा देख के चलो, आगे ही नहीं पीछे भी" को मन्ना डे ने अपनी दिलकश आवाज में गाया था. राजकपूर पर फिल्माए इस गाने का म्यूजिक शंकर जयकिशन ने तैयार किया था.
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1969 में आई हिंदी फिल्म "चंदा और बिजली" का गाना "काल का पहिया घूमे भैया" काफी लोकप्रिय हुआ था. इसे नीरज ने ही लिखा था. शंकर जयकिशन के म्यूजिक पर इसे मन्ना डे ने गाया था. इसे संजीव कुमार पर फिल्माया गया था.
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1968 में शशिकपूर की फिल्म "कन्यादान" का ये गाना "लिखे जो खत तुझे" को हिंदी फिल्मों के क्लासिक गाने में शुमार किया जाता है. शंकर जयकिशन के म्यूजिक पर इसे मोहम्मद रफ़ी ने गाया था. रोमांटिक गाना शशि कपूर पर फिल्माया गया था.
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1965 में "नई उमर नई फसल" फिल्म आई थी. इस फिल्म का एक गाना "कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे" नीरज की कालजयी गीतों में शुमार की जाती है. नीरज के बोल पर रोशन ने म्यूजिक तैयार किया था जिसे मोहम्मद रफी ने गाया था.
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1970 में देवानंद की फिल्म "प्रेम पुजारी" आई थी. इसमें नीरज का लिखा एक गीत था- "फूलों के कलम से, दिल की कलम से". एस डी बर्मन के संगीत निर्देशन में इसे किशोर कुमार ने गाया था.
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1970 में आई "प्रेम पुजारी" का एक और गाना "रंगीला रे तेरे रंग में" हिंदी फिल्मों के सदाबहार गानों में शुमार है. वहीदा रहमान पर फिल्माए इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया था. इसका म्यूजिक एस डी बर्मन ने दिया था.

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1970 में आई "प्रेम पुजारी" का एक और रोमांटिक गाना "शोखियों में घोला जाए फूलों का शवाब" भी नीरज ने ही लिखा था. इसका संगीत एसडी बर्मन ने तैयार किया था जिसे किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने गाया था. ये गाना देवानंद और वहीदा रहमान पर फिल्माया गया था.