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Project Hail Mary रिव्यू: भौंचक्क कर देने वाले विजुअल्स से भरा स्पेस मिशन, एक एलियन और इमोशनल जर्नी की कहानी

प्रोजेक्ट हेल मैरी एक स्पेस मिशन फिल्म होने के साथ-साथ इंसानियत और भावनाओं की कहानी है. रायन गॉसलिंग का किरदार और एलियन ‘रॉकी’ की बॉन्डिंग इसे खास बनाती है. शानदार विजुअल्स के साथ फिल्म साइंस, फिलोसॉफी और इमोशन का ऐसा मेल है, जो इसे एक यादगार सिनेमाई अनुभव बना देता है.

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प्रोजेक्ट हेल मैरी रिव्यू (Photo: Instagram/@projecthailmary)
प्रोजेक्ट हेल मैरी रिव्यू (Photo: Instagram/@projecthailmary)

संकट में घिरी धरती, अंतरिक्ष में जीवन का चांस और मानवता के लिए बेहद जरूरी एक मिशन... ये तीन चीजें अलग-अलग मात्रा में मिलाकर कई दमदार साइंस फिक्शन या स्पेस मिशन वाली फिल्में बनाई जा चुकी हैं. इनमें सबसे अच्छी आपको मोस्टली वही लगेंगी जिनकी कहानी आपको एक साथ दो यात्राओं पर ले जाती है— एक यात्रा अंतरिक्ष की है, दूसरी अंतर्मन की. दोनों यात्राओं का पड़ाव बहुत अलग-अलग होता है. लेकिन इन दोनों चीजों का कनेक्शन एक ऐसा मुद्दा है जहां विज्ञान, आध्यात्म और दर्शन भी अक्सर एक साथ खड़े मिलते हैं.

हॉलीवुड फिल्म प्रोजेक्ट हेल मैरी शायद इतिहास की सबसे शानदार स्पेस मिशन फिल्मों में ना गिनी जाए. शायद इसके विजुअल्स आपको स्पीलबर्ग की फिल्मों जितने ग्राउंड-ब्रेकिंग ना लगें. या शायद इसकी साइंस को वैज्ञानिक नोलन की फिल्मों जितना क्रांतिकारी न मानें. लेकिन ये उस कनेक्शन को बहुत करीब से फील करवाती है, जिसकी बात अभी हमने ऊपर की.

प्रोजेक्ट हेल मैरी के बारे में जो कुछ भी पढ़ने-सुनने को मिल रहा था उसके हिसाब से ये फिल्म पहले दिन देखी जानी चाहिए थी. इस फिल्म तक पहुंचने में मुझे थोड़ा वक्त जरूर लगा. मगर प्रोजेक्ट हेल मैरी उन फिल्मों में से एक है जिन्हें अपनी लिस्ट में 'देख चुके हैं' मार्क कर लेना किसी भी फिल्मची को अलग शांति देगा.

क्या है प्रोजेक्ट हेल मैरी की कहानी?
प्रोजेक्ट हेल मैरी एक स्कूल टीचर, रायलैंड ग्रेस की कहानी है, जो बहुत सारे हीरोज की तरह 'मैड जीनियस' है. इतना जीनियस कि शायद सिस्टम को या एकेडमिक स्ट्रक्चर को उसकी सही कद्र नहीं है. लेकिन धरती को जीवन देने वाला स्टार, सूरज खत्म होने लगा है. एक माइक्रो ऑर्गेनिज्म, एस्ट्रोफेज सूरज की सतह पर पहुंच गया है. इस एस्ट्रोफेज के चलते अंतरिक्ष में कई सितारे ठंडे पड़ चुके हैं. उम्मीद है कि करीब 30 सालों में सूरज पूरी तरह ठंडा हो जाएगा.

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नासा को सैकड़ों प्रकाश वर्ष दूर एक सितारे, टाऊ-सेती (Tau Ceti) का पता चला है जो एस्ट्रोफेज के अटैक से बच निकला है. नासा का प्लान उस स्टार तक जाकर ये समझना है कि वो एस्ट्रोफेज से कैसे बचा? इस सॉल्यूशन से सूरज को बचाया जाए, ताकि धरती बची रहे. इस मिशन के लिए ग्रेस को नासा खोजकर निकालता है, उसके टैलेंट की वजह से. लेकिन ऐन मौके पर मिशन पर जाने वाले बायोलॉजिस्ट की मौत हो जाती है. अब टीम में एक ही ऐसा मजबूत वैज्ञानिक है, जो मिशन पर भेजा जा सकता है— रायलैंड ग्रेस.

प्रोजेक्ट हेल मैरी की शुरुआत स्पेस में ही होती है जहां ग्रेस आपको स्पेसशिप में बेहोश दिखता है. उसके साथ के बाकी दो लोग मर चुके हैं और होश में आने के बाद उसे याद नहीं है कि वो कहां है और क्यों है. मिशन की शुरुआत, और मिशन पूरा कर रहे ग्रेस की कहानी के सीक्वेंस फिल्म में आगे-पीछे चलते हैं. लेकिन अपने ग्रह को बचाने टाऊ-सेती पर पहुंचने वाला ग्रेस अकेला प्राणी नहीं है. वहां उसे पत्थर जैसी शेप वाला एक और प्राणी मिलता है, जो किसी दूसरे ग्रह से आया है. ग्रेस उसे रॉकी नाम देता है. रॉकी की अपनी हालत भी ग्रेस जैसी है. अब इन दोनों को मिलकर दो ग्रह बचाने हैं. कहानी फिल्मी है, तो मिशन पूरा होगा ही... लेकिन कैसे होगा, यही प्रोजेक्ट हेल मैरी को देखने लायक बनाता है.

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कैसे जादू करती है ये फिल्म?
प्रोजेक्ट हेल मैरी की सबसे बड़ी खासियत ये बताई गई थी कि एक स्पेस फिल्म होने के बावजूद इसे ग्रीन स्क्रीन पर नहीं शूट किया गया. फिल्म में प्रैक्टिकल इफेक्ट्स हैं. यानी जो स्पेसशिप, अंतरिक्ष और एलियन आप देख रहे हैं, वो सेट पर प्रैक्टिकली तैयार किए गए हैं. इसका असर आपको प्रोजेक्ट हेल मैरी के विजुअल्स पर नजर आता है.

विजुअल्स की डेप्थ, किरदारों का टच, उनका आपसी इंटरेक्शन और अपने माहौल से उनका इंटरेक्शन बहुत रियल लगता है. लाइटिंग और रियल सेट्स का खेल ऐसा है कि स्पेस के सीन्स के अद्भुत सीन्स देखकर आपकी आंखें ही नहीं, मुंह भी खुला रह जाएगा. इसलिए इसे बड़ी से बड़ी IMAX स्क्रीन पर देखने पर और ज्यादा मजा आएगा. लेकिन प्रोजेक्ट हेल मैरी की असली खासियत ये नहीं है. इसकी खासियत ग्रेस और रॉकी की बॉन्डिंग में छुपी है.

रॉकी बेहद क्यूट एलियन है और उसकी इंटेलिजेंस भी कमाल है. केवल साउंड्स और इशारों में बात करने वाले इस एलियन को डायरेक्टर जोड़ी फिल लॉर्ड और क्रिस्टोफर मिलर ने ऐसा कैरेक्टर दिया है जो फिल्म में आपको इमोशनली इन्वेस्ट रखता है. पूरी फिल्म में कम से कम 3-4 जगहों पर आपकी आंखें भीग सकती हैं. और ग्रेस का किरदार इतनी संजीदगी से निभाने के लिए रायन गॉसलिंग को इस साल जमकर तारीफें मिलने वाली हैं. रायन ने ग्रेस के किरदार को हीरो नहीं बनाया है, उसे इतना आम इंसान बना दिया है कि इस किरदार की एक-एक बीट आपको अपने दिल में गूंजती फील होती है. ये एक्टिंग की दुनिया में बहुत बड़ा काम माना जाता है.

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प्रोजेक्ट हेल मैरी अपनी सतह पर एक स्पेस मिशन और ग्रह को बचाने की कहानी है. लेकिन अंदर से ये अपनी इंसानियत और भावनाओं को बचाए रखने की कहानी है. कुछ मौकों पर ये आपके इमोशनल यूनिवर्स के उन कोनों तक पहुंच जाती है, जहां आपने शायद बहुत दिन से झांककर न देखा हो! इस एक फीलिंग के सामने, इस विजुअल ग्रेटनेस के सामने प्रोजेक्ट हेल मैरी की दिक्कतें दिख तो शायद जाएं, मगर उन पर ध्यान नहीं जाता.

कई सीक्वेंस हैं जहां थोड़ा और देखने की इच्छा को फिल्म अधूरा छोड़ देती है. जैसे रॉकी के ग्रह का जीवन और उसकी लाइफ के फंक्शन. कई बार आप ग्रेस से, उसके कूल-लाइट अंदाज से ज्यादा और गंभीरता चाहते हैं. रॉकी और ग्रेस की बॉन्डिंग एक्सप्लोर करने के लिए फिल्म जब स्लो होती है, तो कई रूटीन साइंस-फिक्शन फिल्मों जैसी लगने लगती है. लेकिन ये सारी बातें थिएटर से बाहर आने के बाद दिमाग में आती हैं. थिएटर के अंदर तो प्रोजेक्ट हेल मैरी एक ऐसा अनुभव देती है कि आप इससे बाहर नहीं आना चाहेंगे.

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