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Citadel Season 2 Review: प्रियंका की सीरीज में स्टाइल है, ग्लैमर है, लेकिन दिल जीतने वाला दम गायब!

प्रियंका चोपड़ा और रिचर्ड मैडन स्टारर सिटाडेल 2 बड़े स्केल और शानदार विजुअल्स के बावजूद कमजोर कहानी और फीकी केमिस्ट्री की वजह से उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती. जानिए कैसा है पूरा रिव्यू.

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कैसी है सिटाडेल 2? (Photo: Screengrab)
कैसी है सिटाडेल 2? (Photo: Screengrab)
फिल्म:एक्शन स्पाई
2.5/5
  • कलाकार : प्रियंका चोपड़ा जोनास, रिचर्ड मैडेन, स्टेनली टुची
  • निर्देशक :जोई रुसो

सिटाडेल का पहला सीजन जब आया था, तो उसके बड़े बजट, इंटरनेशनल लेवल के एक्शन और हॉलीवुड स्टाइल प्रेजेंटेशन ने लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ा दी थीं. लेकिन जैसे-जैसे एपिसोड आगे बढ़े, कहानी का रोमांच थोड़ा फीका पड़ने लगा. अब दूसरा सीजन भी आ चुका है, लेकिन इस बार एंट्री उतनी धमाकेदार नहीं रही.

इस नए सीजन में प्रियंका चोपड़ा और रिचर्ड मैडन की कहानी फिर आगे बढ़ती है. इस बार बड़ा खुलासा होता है कि सिटाडेल का असली गद्दार कोई और नहीं, बल्कि मेसन केन यानी काइल ही था, जिसने अपनी मां दाहिला के लिए एजेंसी की सीक्रेट जानकारी लीक की थी. अब सवाल ये है कि नादिया सिन को जब इस धोखे का पता चलेगा, तब क्या होगा?

कहानी में ट्विस्ट बहुत, लेकिन कनेक्शन कम

सीजन 2 वहीं से शुरू होता है जहां पहली कहानी खत्म हुई थी. Bernard Orlick अब Manticore के खतरनाक खिलाड़ी Paulo Braga के कब्जे में है. दूसरी तरफ नादिया अपनी बेटी आशा के साथ शांत जिंदगी जीने की कोशिश कर रही है. लेकिन स्पाई की जिंदगी कहां चैन से रहने देती है?

एक हमले के बाद नादिया को एहसास होता है कि खतरा अभी खत्म नहीं हुआ. इसी दौरान उसे पता चलता है कि एजेंसी का गद्दार मेसन था. वहीं मेसन अपनी दोहरी जिंदगी और फैमिली के बीच उलझा हुआ दिखता है. शो में ट्विस्ट, फ्लैशबैक और लगातार टाइमलाइन बदलने का खेल चलता रहता है. लेकिन यही चीज कई बार कहानी को उलझा देती है. दर्शक किरदारों से पूरी तरह जुड़ नहीं पाते.

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एक्शन है… लेकिन असर कम

सीरीज का सबसे बड़ा हथियार इसका स्केल और लुक है. लोकेशंस शानदार हैं, कैमरा वर्क भी काफी स्टाइलिश है. लेकिन सिर्फ खूबसूरत विजुअल्स से कहानी नहीं चलती. एक्शन सीन्स कई जगह रिपिटेटिव लगते हैं. जिन सीन्स में धड़कनें तेज होनी चाहिए थीं, वहां कहानी ठंडी पड़ जाती है. शो खुद को बहुत स्मार्ट और इंटेंस दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन हर बार निशाना थोड़ा चूक जाता है.

अगर इस सीजन में कुछ सबसे ज्यादा चमकता है, तो वो हैं प्रियंका चोपड़ा. नादिया सिंघ का किरदार पूरी सीरीज में सबसे ज्यादा दमदार लगता है. प्रियंका कई कमजोर सीन्स को भी अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से बेहतर बना देती हैं.

खास बात ये भी है कि इस बार वो कुछ हिंदी डायलॉग्स बोलती नजर आती हैं, जो इंडियन ऑडियंस को थोड़ा ज्यादा कनेक्ट महसूस कराते हैं. वहीं रिचर्ड का किरदार काफी दिलचस्प हो सकता था, लेकिन कहानी उन्हें पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाती.

फैमिली ड्रामा और स्पाई थ्रिलर के बीच फंसी सीरीज

सीरीज सबसे ज्यादा यहीं कमजोर पड़ती है. एक तरफ ये हाई-ऑक्टेन स्पाई थ्रिलर बनना चाहती है, दूसरी तरफ फैमिली इमोशंस पर भी जोर देती है. लेकिन दोनों चीजों का बैलेंस ठीक से नहीं बैठ पाता. कई जगह शो जरूरत से ज्यादा स्लो महसूस होता है. 40 मिनट के एपिसोड होने के बावजूद कहानी में वो तेजी नहीं आती, जिसकी एक स्पाई थ्रिलर से उम्मीद की जाती है.

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भारतीय दर्शक हाल ही में बड़े पैमाने वाले एक्शन और रॉ स्पाई ड्रामा देख चुके हैं. ऐसे में सिटाडेल सीजन 2 थोड़ा ज्यादा पॉलिश्ड और कम इमोशनल लगता है. दिलचस्प बात ये है कि इंडियन स्पिन-ऑफ सिटाडेल: हनी बनी कई मामलों में ज्यादा एंटरटेनिंग और बेहतर तरीके से एक्सिक्यूटेड महसूस होता है.

सिटाडेल एक ऐसी सीरीज है, जिसमें पैसा, स्केल और स्टार पावर तो भरपूर है, लेकिन दिल छू लेने वाला थ्रिल और याद रह जाने वाला इमोशन कम है. प्रियंका चोपड़ा पूरी मेहनत से शो को संभालती हैं, लेकिन कमजोर कहानी और फीकी केमिस्ट्री इसे एक औसत स्पाई ड्रामा बनने से नहीं बचा पाती.

अगर आप सिर्फ स्टाइलिश विजुअल्स और हल्का-फुल्का स्पाई एंटरटेनमेंट देखना चाहते हैं, तो ये सीरीज एक बार देखी जा सकती है. लेकिन अगर आप तेज रफ्तार, दिमाग घुमा देने वाला थ्रिल चाहते हैं, तो शायद ये शो आपको पूरी तरह संतुष्ट न करे.

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