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बहुत फालतू बातें किया करता था, हालांकि मेरी मर्जी से शादी की थी सतीश ने: नादिरा बब्बर 

सतीश कौशिक के जीवन में नादिरा बब्बर उन चंद लोगों में से हैं, जिनसे वो केवल प्रोफेशनली ही नहीं बल्कि इमोशनल लेवल पर भी जुड़े थे. सतीश नादिरा को बाजी कहकर बुलाते थे. कभी दिल टूटने की कहानी हो, या किसी लड़की पर प्यार आया हो, वो हर बात उनसे शेयर करते थे.

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सतीश कौशिक-नादिरा बब्बर
सतीश कौशिक-नादिरा बब्बर

अपने दोस्त सतीश कौशिक के जन्मदिन के मौके पर नादिरा ने भी उनके कई अनसुने किस्से बताकर याद किया. तबीयत नासाज होने के बावजूद वो स्टेज पर कुर्सी में बैठ सतीश की नादानियों का जिक्र कर रही थीं.

नादिरा कहतीं, पता नहीं कहां से शुरू करूं कुछ समझ नहीं आता. खैर, सतीश मुझे दिल से अजीज से थे और बहुत प्यार करते थे मुझसे. दिल्ली में जब हम मिले थे, तो उस वक्त हमारी यही कोशिश होती थी कि कहीं कुछ काम करे और पैसे मिले. मुझे याद है दिल्ली में रहते हुए मैं सेटेलाइट का शो कर रही थी, उसमें मैंने सतीश को धोबी का रोल दिया था. हालांकि उसके किरदार के लाइन में कोई खास बात नहीं थी, लेकिन सतीश ने शूट होते ही कुछ और बोलना शुरू कर दिया था. सब हैरान जरूर हुए लेकिन वो कमाल का था. 

8 लोगों के साथ रहता था सतीश 

नादिरा आगे बतातीं, बॉम्बे आने के बाद सांताक्रूज में उसने कमरा लिया था, जिसमें बहुत से लोग रहते थे. उस डेढ़ कमरे में आठ लोग रहते थे. वो रोजाना मेरे पास आता था खाना यहीं खाता था. वो अक्सर कुछ ऐसी हरकतें करता रहता था, जिससे आपकी हंसी नहीं रुकेगी. एक बार एनएसडी के दो लोग मेरे पास आकर कहने लगे कि हमारे पास रहने के लिए घर नहीं है. सतीश भी वहीं उनकी बातें सुन रहा था. इससे पहले मैं उनको कुछ कह पाती, सतीश बोल उठता, हमारे घर में कोई जगह नहीं है. मजेदार बात यह है कि. बाद में वो दो लोग भी सतीश के घर पर ही रहने लगे. उन दिनों वो आलोक(आलोकनाथ) से बड़ा नाराज था. एक दिन आकर मुझसे कहने लगा कि आलोक को इतने अच्छे-अच्छे रोल्स मिलते हैं. आपका मेरे बारे में क्या ख्याल है. मैंने कहा कि तुमसे तो अच्छा कोई है ही नहीं, तो कहता ये बात मुझसे नहीं महफिलों में कहा कीजिए तब शायद लोग अच्छे रोल्स देना शुरू कर दें. 

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नादिरा की पसंद से की थी सतीश ने शादी 
सतीश के अफेयर्स का किस्सा शेयर करते हुए नादिरा कहतीं, लड़कियों को सतीश से ज्यादा मोहब्बतें हुई नहीं. सतीश जिसे पसंद कर रहे होते थे, वो उन्हें पसंद नहीं करती थीं. ये हमेशा होता था. एक लड़की थी, जिस पर सतीश कुछ ज्यादा फिदा था. वो भी थोड़ी सी इस पर फिदा थीं. लेकिन उसके घरवाले मान नहीं रहे थे. मैंने कहा कि तुम कहो, तो मैं उस लड़की के घर वाले से बात करूं. तो उसने मना करते हुए कहा कि कोई और लड़की देख लें आप. इसी बीच परिवार वालों ने एक लड़की ढूंढी. फैमिली वालों ने मुझसे कहा कि आप जाकर लड़की देख आएं, अगर आप सतीश को कहेंगी कि लड़की अच्छी है, वो ऐतराज नहीं करेगा और शादी कर लेगा. मैं मुलुंड गई, वहां शशि को देखा..वो अच्छे से तैयार होकर बाहर आईं थीं. उसे देखकर मुझे पहली नजर में लगा था कि शादी के बाद जो साथ निभाने वाली लड़कियां होती हैं, उसके हिसाब से तो शशि परफेक्ट है. मैंने सतीश को बताया कि लड़की तो बहुत बढ़ियां हैं, तुम्हारे लिए उससे अच्छी लड़की नहीं हो सकती.. फौरन शादी कर लो उससे. और उसने शशि से शादी कर ली. 

बाजी वो रिहर्सल में टेंपो लेकर चलें 
एक बार की बात है, हम रिहर्सल कर वापस लौट रहे थे. मैं सारे एक्टर्स से गुस्सा थी. गाड़ी में चिल्लाते हुए कहा था बिलकुल तुमलोगों से काम नहीं हो रहा है. तुम सब एक्टिंग छोड़ दो.तुम सब की रिहर्सल में टेंपो ही नहीं है. जैसे ही हमारी गाड़ी चर्च के पास आ रुकी, तो बगल में एक टेंपो आकर रुका था. सतीश कार का शीशा नीचे कहते हुए टेंपो वाले को पुकारने लगा. मुझसे पीछे मुड़कर कहता, बाजी ये टेंपो वाला राजी है, कहें, तो इसे अपने रिहर्सल में साथ ले चलते हैं. बताओ कितना बद्तमीज है वो. मैंने उसे कहा कि कितने बुरे हो तुम, अब मैं दोबारा तुम्हारे साथ काम नहीं करना चाहती, तो कहता.. अच्छा बाजी.. ऐसा मत कहिए, मुझे बहुत बुरा लगेगा.. कसम से सतीश बहुत फालतू बातें करता था.

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