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मेनस्ट्रीम सिंगर्स का नया टारगेट हैं 'स्कूल गर्ल्स', विवाद के बाद बादशाह का गाना डिलीट, Gen Z के लिए है खराब?

बादशाह का 'टटीरी' एक हाई-एनर्जी हिप-हॉप ट्रैक है, जो हरियाणवी फोक स्वैग के साथ रिलीज हुआ है. गाने में बादशाह खुद को 'दुल्हन चढ़ने' वाला दूल्हा बताते हैं, लेकिन इसके लीरिक्स में महिलाओं को किसी ऑब्जेक्ट यानी वस्तु की तरह पेश करने वाले शब्दों की भरमार है.

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बादशाह का गाना Gen Z के लिए है खराब (Photo: ITG)
बादशाह का गाना Gen Z के लिए है खराब (Photo: ITG)

रैपर बादशाह एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इसका कारण उनका नया हरियाणवी गाना 'टटीरी' (Tateeree) है. हाल ही में रिलीज हुए इस गाने ने न सिर्फ यूट्यूब पर करोड़ों व्यूज बटोरे हैं, बल्कि महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के सेक्शुअलाइजेशन को लेकर भी भारी विवाद खड़ा कर दिया है. हरियाणा के महिला आयोग ने बादशाह को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है, जबकि सोशल मीडिया पर यूजर्स और क्रिटिक्स ने गाने के अश्लील लीरिक्स और वीडियो को 'घिनौना' बताते हुए बॉयकॉट की मांग की है. हालांकि विवाद होता देख, बादशाह ने अपना ये गाना देर रात डिलीट कर दिया.

यह विवाद मेनस्ट्रीम सिंगर्स के उस खतरे की याद दिलाता है, जहां स्कूल यूनिफॉर्म पहने लड़कियों को आकर्षण का केंद्र बनाकर एक जहरीला ट्रेंड चल रहा है.

'टटीरी' के अश्लील लीरिक्स और स्कूल गर्ल्स का 'फैंटेसी' फैक्टर

बादशाह का 'टटीरी' एक हाई-एनर्जी हिप-हॉप ट्रैक है, जो हरियाणवी फोक स्वैग के साथ रिलीज हुआ है. गाने में बादशाह खुद को 'दुल्हन चढ़ने' वाला दूल्हा बताते हैं, लेकिन इसके लीरिक्स में महिलाओं को किसी ऑब्जेक्ट यानी वस्तु की तरह पेश करने वाले शब्दों की भरमार है. जैसे, 'आया बादशाह दुल्हन चढ़ने, इन टेटरी वाली को...' जैसी लाइनें न सिर्फ महिलाओं का अपमान करती हैं, बल्कि सेक्शुअल हिंट से भरी हैं. क्रिटिक्स का कहना है कि ये बोल नाबालिगों को भी निशाना बनाते हैं, क्योंकि वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म पहने लड़कियां डांस करती नजर आ रही हैं.

हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रानी सेखरावत ने कहा, 'गाने के बोलों में महिलाओं और नाबालिगों के प्रति अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जो समाज के लिए हानिकारक है.' आयोग ने 6 मार्च को बादशाह को नोटिस जारी किया, जिसमें वीडियो में माइनर्स को शामिल करने और अश्लील कंटेंट पर सफाई मांगी गई है. सोशल मीडिया पर #BoycottTateeree ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स लिख रहे हैं, 'स्कूल गर्ल्स को सेक्शुअल ऑब्जेक्ट बनाना क्या कला है? बादशाह, ये तो अपराध है.' एक यूजर ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया, 'ये गाना स्कूल की लड़कियों को फैंटेसी का हिस्सा बना रहा है, जो रियल लाइफ में खतरा पैदा करेगा.'

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बादशाह ने अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. हालांकि यूट्यूब से गाने को हटा लिया गया है. लेकिन उनके पुराने विवादों, जैसे 'गर्मी' गाने पर सेंसरशिप को देखते हुए यह ट्रेंड उनके लिए नया नहीं लगता. गाने के बोलों की अश्लीलता सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं, यह एक पैटर्न है, जहां मेनस्ट्रीम के सितारे युवा दर्शकों को लुभाने के चक्कर में नैतिक सीमाओं को तोड़ रहे हैं.

बादशाह का गाना हुआ डिलीट (Photo: Screengrab)

मेनस्ट्रीम सिंगर्स की 'स्कूल गर्ल फेटिश'

यह समस्या बादशाह तक सीमित नहीं है. हाल के सालों में कई बड़े सितारे अपने म्यूजिक वीडियोज में स्कूल गर्ल्स को टारगेट करते नजर आ रहे हैं, जो न सिर्फ अश्लील है बल्कि समाज में गलत संदेश देता है. एक प्रमुख उदाहरण है गुरु रंधावा का 2025 में रिलीज हुआ गाना 'अजुल' (Azul). इस गाने का वीडियो एक ऑल-गर्ल्स स्कूल में सेट है, जहां यूनिफॉर्म पहने यंग लड़कियां, गुरु की इश्कबाजी का केंद्र हैं.

'अजुल' ने 42 मिलियन से ज्यादा व्यूज हासिल किए थे. लेकिन इसके साथ ही भारी बैकलैश भी आया. क्रिटिक्स ने इसे 'टीचर-स्टूडेंट फैंटेसी' बताया, जिसमें 16 बार अल्कोहल के रेफरेंस माइनर्स से जोड़े गए. रेडिट पर एक थ्रेड में यूजर्स ने लिखा, 'एक ग्रोन-अप मैन का टीनएजर गर्ल्स के लिए क्रेजी होना क्रिपी है. क्या ये नॉर्मल है?' गुरु ने विवाद के बाद इंस्टाग्राम कमेंट्स रिस्ट्रिक्ट कर दिए और एक क्रिप्टिक पोस्ट शेयर की थी, जिसमें लिखा था, 'जब गॉड साथ है, तो सब ठीक.' लेकिन फेमिनिस्ट ग्रुप्स ने इसे 'माइनर्स का हाइपर-सेक्शुअलाइजेशन' करार दिया, जो भारतीय पॉप कल्चर में स्कूल गर्ल्स को 'इनोसेंट सिडक्शन' के रूप में पेश करने का हिस्सा है.

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यह ट्रेंड 'अजुल' से पहले भी दिखा. यो यो हनी सिंह और करण औजला को 2025 में महिला आयोग ने उनके गानों के अश्लील लीरिक्स के लिए कोर्ट में बुलाया था. हनी सिंह के 'ब्लू आइज' जैसे ट्रैक्स में भी सेक्शुअल हिंट्स की भरमार थी. जबकि करण औजला के गानों में मां-बहन जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल हुआ. एक रिपोर्ट के मुताबिक, बॉलीवुड और पंजाबी म्यूजिक में 70% से ज्यादा गाने सेक्सिस्ट लिरिक्स से भरे हैं, जो 'ब्यूटी-स्टेटस एक्सचेंज' थ्योरी पर आधारित हैं.

लीरिक्स की अश्लीलता का समाज पर क्या असर?

इन गानों की सबसे बड़ी समस्या इनके बोल हैं. 'टटीरी' में महिलाओं को 'टटीरी वाली' जैसे शब्दों से कमतर दिखाया गया, जो हिंदी सिनेमा के पुराने सेक्सिस्ट गानों की याद दिलाते हैं. 'अजुल' में तो अल्कोहल और रोमांस को माइनर्स से लिंक किया गया, जो कानूनी रूप से POCSO एक्ट के दायरे में आ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कंटेंट से युवा पीढ़ी में गलत धारणाएं बनती हैं. लोगों को लड़कियों को ऑब्जेक्टिफाई करना 'कूल' लगने लगता है.

फेमिनिज्म इन इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'म्यूजिक वीडियोज में स्कूल गर्ल्स का इस्तेमाल एक फेटिश है, जो रियल लाइफ में यौन शोषण को नॉर्मलाइज करता है.' आर्केस्ट्रा कल्चर में भी ऐसे गाने माइनर डांसर्स के एब्यूज को बढ़ावा देते हैं.

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जिम्मेदारी की जरूरत

बादशाह का 'टटीरी' और गुरु रंधावा का 'अजुल' इस बात के दो उदाहरण हैं कि यह एक सिस्टमिक समस्या है, जहां OTT प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब की फ्रीडम का दुरुपयोग हो रहा है. सेंसर बोर्ड को सख्ती बरतनी होगी, और कलाकारों को सोचना होगा कि उनका 'एंटरटेनमेंट' समाज को कितना नुकसान पहुंचा रहा है. अगर मेनस्ट्रीम के सितारे बदलाव नहीं लाएंगे, तो विवाद ही उनका नया 'हिट फॉर्मूला' बन जाएगा. समय आ गया है कि म्यूजिक फिर से प्रेरणा दे, न कि लोगों में जहर भरे.

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