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जब अशोक कुमार को देखने के लिए राज कपूर की पत्नी ने उठाया घूंघट, मजेदार है किस्सा

राज कपूर ने कई फिल्मों में किया है रीवा का जिक्र, राज कपूर की कार का नम्बर भी रीवा का था. कृष्णा के पिता करतार नाथ मल्होत्रा आईजी थी और उनका पूरा परिवार यहां रहता था. प्रेम नाथ, राजेंद्र नाथ और नरेंद्र नाथ की कृष्णा बहन है. शादी के बाद ही राज कपूर की फिल्में सुपरहिट हुई थीं. जहां शादी हुई थी ठीक वही पर कृष्णा-राजकपूर की याद में ऑडिटोरियम बनाया गया है.

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राज कपूर राज कपूर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राज कपूर का है रीवा से कनेक्शन
  • हुई थी राज और कृष्णा की शादी

रीवा में बॉलीवुड के द ग्रेट शोमैन राज कपूर का ब्याह 12 मई 1946 में हुआ था. पृथ्वीराज कपूर मुंबई से बारात लेकर आये थे और धूमधाम के साथ ब्याह हुआ था. राज कपूर, कृष्णा मल्होत्रा के साथ ब्याह के बंधन में बंधे थे. सात फेरे और ब्याह की रस्म निभाई थी. तब कृष्णा की उम्र 16 वर्ष की थी और वह 10वीं क्लास की छात्रा थीं.

राज कपूर ने कई फिल्मों में किया है रीवा का जिक्र, राज कपूर की कार का नम्बर भी रीवा का था. कृष्णा के पिता करतार नाथ मल्होत्रा आईजी थी और उनका पूरा परिवार यहां रहता था. प्रेम नाथ, राजेंद्र नाथ और नरेंद्र नाथ की कृष्णा बहन है. शादी के बाद ही राज कपूर की फिल्में सुपरहिट हुई थीं. जहां शादी हुई थी ठीक वही पर कृष्णा-राजकपूर की याद में ऑडिटोरियम बनाया गया है. इस ऑडिटोरियम का भूमिपूजन बेटे रणधीर कपूर ने किया था और लोकार्पण में भी रणधीर के साथ प्रेम चोपड़ा और प्रेमनाथ के बेटे प्रेम किशन शामिल हुए थे. प्रेम चोपड़ा की पत्नी उमा का भी जन्म रीवा में ही हुआ था. 

यूं तो ज्यादातर एक्ट्रेस करियर के चलते कुंवारे रहना पसंद करते है लेकिन शोमैन राज कपूर की बात इनसे अलग है. कुंवारे राज पहली बार अपने दोस्त प्रेमनाथ के साथ रीवा घूमने आये थे. फिर जब दूसरी बार आये तो उनके साथ बारात थी और सिर पर दुल्हे का सेहरा. रीवा में राज कपूर को पहली नजर में कृष्णा से प्रेम हो गया था. फिर उनकी झट मंगनी और ब्याह हो गया. शादी के बाद राज ने जो सफलता पाई वह आसान नहीं थी. उनका करियर बुलंदियों तक चमका और रिश्तों की डोर भी उतनी ही शिद्दत से निभाई.

राज कपूर की शादी का कार्ड

पत्नी कृष्णा के नाम बनवाया ऑडिटोरियम

बॉलीवुड के ग्रेट शोमैन राज कपूर का नाता कृष्णा के चलते रीवा से जुड़ा था. यहां कृष्णा-राज अटूट बंधन में बधे और सदा के लिए अमर प्रेम की बागडोर जोड़ गए. कृष्णा और राज कपूर का ब्याह सिविल लाइन्स बंगले (वर्तमान राज कपूर ऑडिटोरियम) में 12 मई 1946 को संपन्न हुआ था. बॉलीवुड के इस भावी स्टार की बारात में पृथ्वीराज कपूर के करीबी रिश्तेदार शामिल हुए थे. एक्टर विश्व मेहरा एक ऐसे ही शख्स थे, जो कि पेशावर से मुंबई और फिर रीवा में बाराती बनकर पहुंचे.

एक्टर विश्व मेहरा, राज कपूर के मामा होने के साथ हम उम्र और बेहद करीबी थे. मेहरा बताते है कि यह शादी शाही शादी से किसी मायने में कम नही थी. स्वागत, सेवा-सत्कार सब कुछ देखने लायक था. बारात 10 मई 1946 को मुबंई से चलकर 12 मई 1946 को सतना स्टेशन पहुंची और फिर सड़क मार्ग से रीवा तक आई थी. 

मेहरा के अनुसार लगभग 50 की संख्या में खास बाराती थे, इनके लिए मुबंई-बनारस ट्रेन की एक बोगी आरक्षित की गई थी. सतना रेलवे स्टेशन से बारात तांगे और मोटर कार से 12 मई 1946 को दोपहर बाद रीवा पहुंचती थी. बारात को रॉयल मेन्स की ऐतिहासिक इमारतों में ठहराया गया था, रात को बारात का स्वागत द्वारचार और विवाह सम्पन्न हुआ अगले दिन 13 मई को बारात नें आराम किया इसी दिन श्रष्ठाचार और बारातियों को शहर घुमाया गया था. बारात का लंच रियासत के किले मे रखा गया था जहां तत्कालीन महाराज ने खुद बारातियों की मेहमाननबाजी की थी. 

इसके अगले दिन 14 मई 1946 को बारात की विदाई की गई. उस दौर में बसी-विदा की परंपरा भी विन्ध्य क्षेत्र में थी (बसी अर्थात विश्राम). शादी तीन दिन की हुआ करती थी, पहले दिन बारात का आगमन दूसरे दिन बसी जिसमे सबसे मुलाकात श्रष्ठाचार और अगले दिन बिदाई होती थी. 18 तारीख 1946 को पृथ्वीराज कपूर के निज निवास मुंबई में राज के ब्याह की रिसेप्शन पार्टी आयोजित की गई थी. इस पार्टी मे कई नामचीन सितारों ने शिरकत की थी. पृथ्वी राज कपूर के साथ ही शम्मी कपूर और शशि कपूर बारात में आये थे तब शशि कपूर की उम्र महज 6 वर्ष की थी.

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रिसेप्शन से जुड़ा है किस्सा

कृष्णा कपूर प्रेमनाथ की बहन थीं और पिता राय साहब करतार नाथ मल्होत्रा रीवा रियासत के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक थे. राय साहब की चौथी संतान के रूप में सन् 30 दिसंबर 1930 को कृष्णा का जन्म हुआ था. राय साहब का परिवार मूलतः पेशावर (ब्रिटिश भारत) करीमपुरा घंटाघर के पास का रहने वाला था. सरकारी नौकरी के सिलसिले में राय साहब कई स्थानों में अपनी सेवाएं देते हुए पुलिस महानिरीक्षक के रूप में रीवा आये और आजादी के बाद के बाद भी यहां पदस्थ रहे. 1944 से 1946 देश के स्वतंत्र होने तक कि राय साहब पूरे परिवार के साथ रीवा में ही रहे. कृष्णा का सुदर्शन कुमारी (एस.के) स्कूल रीवा में 9वीं की छात्रा के रूप में दाखिला कराया था. दसवीं की पढ़ाई भी सुदर्शन कुमारी स्कूल में ही पूरी की थी इसके बाद व्याह होने पर ससुराल मुंबई चली गई.

विश्व मेहरा ने बताया कि ये वाक्य मुझे कभी नही भूलता... कृष्णाजी बड़ी ही संस्कारी थी. मुबई में 18 मई के रिसेप्शन का वाक्या है निज निवास में रिसेप्शन पार्टी थी, कृष्णाजी लम्बा घूंघट कर स्टेज में बैठी हुई थी. रिश्तेदारों के कहने के बाद भी उन्होंने घूंघट ऊपर नहीं किया. इसी बीच लोगों ने बताया कि अशोक कुमार स्टेज की तरफ आ रहे है और कृष्णा ने अशोक कुमार को देखने की उत्सुकता में घूंघट ऊपर किया और मौजूद महमान खूबसूरत दुल्हन कृष्णा का चेहरा देखने लग गये.  
 
बॉलीवुड के नामचीन अभिनेता रहे. अभिनेता, निर्माता, निर्देशक के रूप में प्रेमनाथ मल्होत्रा नें बॉलीवुड में मुकाम हासिल किया जबकि राजेन्द्र नाथ नें हास्य अभिनेता बनकर फिल्मों में सिने प्रेमियो को खूब हंसाया. इसके अलावा अभिनेता नरेंद्र नाथ नें फिल्मी दुनिया में नाम और खूब शोहरत पाई. कृष्णा की बहन उमा का जन्म रीवा में ही हुआ था. उमा का ब्याह मशहूर अभिनेता प्रेम चोपड़ा से हुआ है. इस तरह दोनो बहनें बाॅलीवुड के नामचीन घरानों में ब्याही और राजकपूर-प्रेम चोपड़ा रिश्ते में साढू बने. बेटे रणधीर कपूर बताते है कि रीवा का नाम आते ही मां कृष्णा रोमांच से भर जाती थी. शम्मी कपूर ने रीवा शहर में घुड़सवारी और तैराकी सीखी थी. इतना ही नही यहां की आवो हवा से उनका वजन और कद में वृद्धि हुई थी यह उनका पसंदीदा शहर था.

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फिल्मों में भी दिखा रीवा

फिल्म ‘आग’ 1948 में राज कपूर निर्देशित और अभिनीत पहली फिल्म थी. इस रोमांटिक फिल्म  में राज कपूर और प्रेमनाथ दोनों साथ-साथ नजर आये. फिल्म की स्किन में उस कार के रूप मे दिखाई दी जिसका नम्बर रीवा 347 था. यह फोर्ड कार रीवा से खरीदी गई थी और इसका लाइसेंस रीवा का था. राय साहब रीवा राज्य के पुलिस महानिरीक्षक के साथ मोटर ट्रांसपोर्ट कंट्रोलर अधिकारी भी थे. यह कार 15 फरवरी 1947 को रीवा से मुंबई पहुंची थी. एक इत्तेफाक यह भी है कि जिस दिन यह कार राज जी के निज निवास मुबंई पहुंची उसी दिन रणधीर कपूर जी का जन्म हुआ. 

फिल्म ‘आह’ में राज कपूर ने रीवा का नाम गर्व के साथ ऊंचा करने का काम किया था. फिल्म में संक्रमण की बीमारी से ग्रसित होते हुए भी बार-बार रीवा का अविस्मरणीय जिक किया है. तांगे का वह चर्चित और अमर दृश्य जिसमें नायक राज कपूर तांगे वाले से कहते है. मुझे रीवा जाना है... रीवा ले चलोगे, रीवा. इसमें तांगे वाले का अभिनय सुविख्यात गायक मुकेश कुमार ने किया था. इस फिल्म में राज कपूर नें लगभग 7 बार रीवा का नाम फिल्म के स्क्रीन पर लिया. ‘‘रीवा, रीवा चलोगे, रीवा ले चलोगे, मुझे रीवा जाना है’’. तांगे का वह चर्चित दृश्य जिसमे नायक राज कपूर तांगे वाले से कहते है मुझे रीवा जाना है... रीवा ले चलोगे, भैया मुझे रीवा पहुंचा दो..

फिल्म इंडस्ट्री में राजजी मेहमान नवाजी के लिए बेहद लोकप्रिय रहे हैं आप, खाने और खिलाने दोनो के बेहद शौकीन थे. आपकी दावतों का इंतजार अक्सर नामचीन हस्तियां किया करती थी. आपकी दावतों में मेहमानों की खातिरदारी और उसकी पूरी व्यवस्था पर्दे के पीछे रह कर संस्कारी श्रीमती कृष्णाजी करती थीं. विश्व मेहरा (मामा) के अनुसार दावत की तारीख तय होने से लेकर सफल संचालन का पूरा कार्य अत्यंत सहजता से कृष्णाजी किया करती थी. यही वजह थी कि मेहमानों के साथ ही मैडम की आया नौकरानी और मेहमानों के ड्राइवर कभी भी दावत से भूखे नही जाते थे. कृष्णा सभी वर्ग का बखूबी ख्याल रखती थी. राज कपूर के साथ दाम्पत्य सूत्र में जुड़ने के बाद कृष्णा को बॉलीवुड की सर्वाधिक सम्मानित महिला होने का गौरव प्राप्त हुआ है. 

पूर्व मंत्री एवं विधायक रीवा राजेन्द्र शुक्ल के अथक प्रयासों से कृष्णा-कपूर की याद में ठीक उसी जगह पर ऑडिटोरियम बनाया गया है. जहां व्याह की रस्में निभाई गई थी. ऑडिटोरियम  का भूमिपूजन रणधीर कपूर ने किया था. लोकापर्ण समारोह में रणधीर कपूर और मल्होत्रा परिवार से प्रेमनाथ के बेटे प्रेमकिशन साथ ही कृष्णा की बहन उमा-प्रेम चोपड़ा शामिल हुए थे.

 

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